मस्जिद विध्वंस के आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिवसीय वर्चुअल मीटिंग हुई.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की दो दिवसीय वर्चुअल मीटिंग हुई.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने बताया कि दो दिनों तक उसके सदस्यों की वर्चुअल मीटिंग में यह फैसला किया गया है. इस बाबत बोर्ड ने एक पत्र भी जारी किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 11:52 PM IST
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लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (All India Muslim Personal Law Board) बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri Masjid demolition) के सभी 32 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी किए जाने के सीबीआई कोर्ट (CBI Court) के फैसले को हाई कोर्ट (High Court) में चुनैती देगा. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बताया कि दो दिनों तक उसके सदस्यों की वर्चुअल मीटिंग में यह फैसला किया गया है. इस बाबत बोर्ड ने एक पत्र जारी किया है. उस पत्र में बताया गया है कि कि इस वर्चुअल मीटिंग में देश भर के सदस्यों ने हिस्सा लिया.

दो दिनों तक चली वर्चुअल मीटिंग

आपको बता दें ये बैठक पिछले दो दिनों से चल रही थी. दरअसल, बाबरी विध्वंस मामले पर अदालत के आए फैसले से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नाराज था. बोर्ड ले सचिव जफरयाब जिलानी ने तो फैसले पर हैरानी जताई थी. जिसके बाद अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस मामले में सीबीआई अदालत के फैसले को चुनौती देने का फैसला किया है. आपको बताते चलें कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराने के मामले को लेकर लखनऊ की सीबीआई अदालत ने सितंबर में फैसला सुनाया था. इस मामले में उसने सभी 32 आरोपियों को बरी कर दिया था. इस केस में 28 साल बाद आए सीबीआई की विशेष अदालत का फैसला बोर्ड को नागवार गुजरा था. कोर्ट ने फैसले में कहा था कि आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं. लिहाजा, सभी 32 आरोपियों को बरी किया जाता है.




फैसले के तुरंत बाद भी बोर्ड ने किया था विरोध

हालांकि इस फैसले के आने के तुरंत बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचीव जफरयाब जिलानी ने इस पर हैरानी जताते हुए इसे नाइंसाफी करार दिया था. AIMPLB के सचिव मौलाना वली रहमानी ने भी उस समय पत्र जारी करते हुए कहा था कि सीआईबी अदालत का फैसला नाइंसाफी की एक मिसाल है. रहमानी ने दावा किया था कि यह फैसला न्याय से कोसों दूर है. उन्होंने कहा था कि आरोपियों को बरी करने का जो भी कारण हो, लेकिन हम सबने विध्वंस के वीडियो और तस्वीरें देखी हैं. बोर्ड की बैठक में सदस्यों द्वारा ये भी कहा गया कि राम मंदिर और धारा 370 के बाद सरकार का अगला लक्ष्य समान नागरिक संहिता हो सकता है, लिहाजा मुद्दे की नजाकत को देखते हुए अल्पसंख्यकों और समाज के लोगों के साथ तफ्सील बैठकें आयोजित की जानी चाहिए. और ये कानून कैसे हानिकारक हो सकता है इस पर जनमत को समझाना चाहिए. बैठक में सरकार द्वारा सीआरपीसी और आईपीसी में सुधारों के लिए केंद्र सरकार की समिति का मुद्दा भी शामिल किया गया. इसके साथ ही बैठक में मस्जिदों, ईदगाहों और कब्रिस्तान से जुड़े मामलों की भी समीक्षा की गई और महत्वपूर्ण फैसले किए गए.
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