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सीएम योगी बोले-रियल स्टेट सेक्टर में घोटाले की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री नोएडा नहीं जाते थे!

यूपी सीएम योगी आदित्‍यनाथ

यूपी सीएम योगी आदित्‍यनाथ

लखनऊ में रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी (Real Estate Regulatory Authority) के राष्ट्रीय अधिवेशन (National Convention) में यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा (Noida) न जाने पर तंज कसते हुए सीएम योगी (CM YOGI)ने कहा कि उनसे पहले कोई भी मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा या नोएडा नही जाता था क्योंकि यह मिथ फैलाया गया कि जो सीएम नोएडा या ग्रेटर नोएडा गया उसकी कुर्सी चली जाएगी. उन्होंने कहा यहां बड़ा घोटाला था इसलिए ये मिथ फैलाया गया.

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लखनऊ. राजधानी लखनऊ में रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी (Real Estate Regulatory Authority) के राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा व ग्रेटर नोएडा ना जाने की वजह रियल स्टेट सेक्टर की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को बताया. इस दौरान उन्होंने प्रदेश के बायर्स और बिल्डर्स दोनों को रियल स्टेट के क्षेत्र में इंवेस्टमेंट को सुरक्षित बनाने और सभी समस्यायों के हल के लिए रेरा की उपयोगिता के बारे में भी बताया.

मिथ था!
सोमवार को राष्ट्रीय अधिवेशन में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिल्डर्स को ये आश्वस्त किया कि प्रदेश में किसी बिल्डर को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी इसके साथ ही मकान खरीदने वाले बायर्स भी इस बात के लिए आश्वस्त रहें कि उनके साथ कोई धोखा नहीं होने दिया जाएगा. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्रियों के नोएडा न जाने पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 19 मार्च 2017 को शपथ ली थी और उस वक्त कोई भी मुख्यमंत्री ग्रेटर नोएडा या नोएडा नही जाता था क्योंकि यह मिथ फैलाया गया कि जो मुख्यमंत्री नोएडा या ग्रेटर नोएडा गया उसकी कुर्सी चली जाएगी. उन्होंने कहा ग्रेटर नोएडा या नोएडा में बड़ा घोटाला था इसलिए ही ये मिथ फैलाया गया.

सीएम योगी ने कहा कि राज्य सरकार रियल एस्टेट मामले में चुपचाप तमाशा नहीं देख सकती. पिछले दस से 15 सालों में रियल इस्टेट वालों से घर खरीदने वाले परेशान थे. उनके पैसे की बंदरबांट हुई. पूरे पैसे देने के बाद भी उन्हें घर पर कब्जा नहीं दिया गया. इसलिए प्रदेश में रेरा की सख्त दरकार थी. इस समारोह के दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री हरदीप सिंह पुरी भी मौजूद थे.

रियल एस्टेट रेग्यूलेटरी अथारिटी के राष्ट्रीय अधिवेशन में सीएम योगी


रेरा का श्रेय पीएम मोदी को 
केंद्रीय आवास एवं शहरी विकास राज्यमंत्री ने रेरा को प्रदेश में लाने का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली प्रेरणा को देते हुए रेरा की खुलकर वकालत की उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय अधिवेशन में रेरा को लेकर बहुत सारी बातें की जा चुकी हैं. इसको घर खरीदने वालों (बायर्स) के सभी हितों को सुरक्षित करने के साथ 2016 में रियल एस्टेट कारोबारी के हितों के लिए लागू किया गया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से यह शुरू हुआ है. यह रोजगार सृजन के लिए बड़ा क्षेत्र है. रेरा ने घर खरीदने वालों के हितों के भरोसे के लिए बड़ा काम किया है.

वहीं कार्यक्रम में यूपी रेरा के कानूनी सलाहकार वेंकट राव कहतें हैं कि रेरा बिल्डर और बायर दोनों के लिए एक मजबूत कड़ी साबित हो रहा है. अब लोग अपनी परेशानी को लेकर रेरा में सीधे वाद दायर कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि दिल्ली से सटे एनसीआर में बड़े पैमाने पर बायर्स के साथ धोखा-धड़ी की शिकायतें सामने आईं जिनका निस्तारण रेरा ने बखूबी किया है.

कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए बिल्डर्स का कहना है कि इस तरह के कॉन्कलेव होते रहने चाहिए जिससे बिल्डर्स का भी भरोसा बढ़ता है और रेरा के कारण अब निर्माण से जुड़े तमाम काम सिंगल विंडो में हो जाते हैं. अब प्रोजेक्ट डिलीवरी में देरी हो या फिर तय निर्माण के प्लान में तब्दीली, अतिरिक्त फीस की वसूली हो या पार्किंग स्पेस, स्टोरेज स्पेस या एलीवेटर जैसी सुविधाओं के न मिलने की समस्या. अगर आप भी बायर हैं और आप भी ऐसा कोई इश्यू फेस कर रहे हैं तो आप रेरा के तहत अपनी शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं.

ऐसे दर्ज कराएं अपनी शिकायत
होम बायर्स अपनी शिकायत को ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं कई राज्यों में ऑनलाइन आवेदन करने का विकल्प मौजूद है. उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में बायर को डायरेक्टली शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मौजूद है. एक बायर के तौर पर आपको अपना नाम, पता, फोन नंबर जैसी निजी जानकारी समेत प्रोजेक्ट डिटेल देनी होंगी.

प्रोजेक्ट डिटेल में प्रमोटर का नाम, कुल जमा की गई राशि, फ्लैट की कीमत और डेवलपर द्वारा दी गई कोई रसीद या डॉक्यूमेंट शामिल होगा. इसके साथ आपको एजेंट या डेवलपर के साथ चल रहे मुद्दे का सार भी बताना होगा. साथ ही यह भी बताना होगा कि आप इस समस्या के समाधान के तौर पर क्या चाहते हैं
अगर आपने इस मुद्दे को लेकर पहले कोई केस फाइल किया है तो आपको उसकी डिटेल भी देनी होगी.
यह सारी डिटेल देने के बाद आपको निर्धारित फीस भरनी होगी. यह फीस अलग-अलग राज्यों के लिए अलग हो सकती है. महाराष्ट्र में यह फीस 5 हजार रुपए है जबकि कर्नाटक में 1 हजार रुपए. गौरतलब है कि 27 जुलाई 2019 तक रेरा ने देशभर में 20,454 मामलों का निपटारा किया है.

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