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यूपी में गिरा है क्राइम का ग्राफ, पिछले ढाई साल में कहीं नहीं लगा कर्फ्यू: यूपी सरकार

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 23, 2019, 8:28 PM IST
यूपी में गिरा है क्राइम का ग्राफ, पिछले ढाई साल में कहीं नहीं लगा कर्फ्यू: यूपी सरकार
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) पीवी रामा शास्त्री ने कहा है कि साल 2016 के सापेक्ष 2017 में हत्या, लूट, अवैध वसूली की घटनाओं में कमी आई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अपर पुलिस महानिदेशक (Additional Director General of Police) (कानून-व्यवस्था) (Law and Order) पीवी रामा शास्त्री (PV Rama Shastri) ने कहा है कि साल 2016 के सापेक्ष 2017 में हत्या, लूट, अवैध वसूली की घटनाओं में कमी आई है.

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लखनऊ. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Record Bureau) द्वारा जारी 2017 के क्राइम डाटा (Crime Data) के मुताबिक, महिलाओं समेत कई तरह के अपराध में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) पूरे देश में टॉप पर है. यूपी में महिला अपराधों में 2016 में 49262 तो 2017 में 56011 एफआईआर दर्ज की गई. डाटा के मुताबिक, पूरे देश में महिला उत्पीड़न के 14 फीसदी मामले अकेले यूपी से हैं. दलित उत्पीड़न के मामलों में भी यूपी देश में सबसे ऊपर है.

कानून व्यवस्था पर टिप्पणी करने वाले अपने गिरेबान में झांके
वहीं इस मामले में सरकार के प्रवक्ता महेंद्र सिंह ने भी अपना बयान दिया है. उन्होंने कहा कि पूरे भारत के
10.10 प्रतिशत अपराध यूपी में हुए. जबकि यूपी में देश की 17 फीसदी आबादी रहती है. उन्होंने कहा कि महिला संबंधी अपराधों में यूपी का 16वां स्थान रहा. उन्होंने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों में देश में तीसरा स्थान यूपी का रहा है और 2016 के सापेक्ष 2017 में हिंसात्मक अपराधों में कमी आई. प्रवक्ता ने कहा कि हत्या में 11, फिरौती में 29 फीसदी की कमी आई. पिछले ढाई सालों में कहीं कर्फ्यू नहीं लगा. हमारी कानून व्यवस्था पर टिप्पणी करने वालों को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए.

हत्या, डकैती में 2018, 2019 के आंकड़े जल्द सामने रखेंगे
वहीं इस मामले पर अब अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) पीवी रामा शास्त्री (PV Rama Shastri) ने कहा है कि साल 2016 के सापेक्ष 2017 में हत्या, लूट, अवैध वसूली की घटनाओं में कमी आई है. वहीं अपर मुख्य सचिव गृह का बयान है कि हत्या, डकैती में 2018, 2019 के आंकड़े जल्द सामने रखेंगे. उन्होंने कहा कि पॉक्सो के मामलों में सज़ा दिलवाई जा रही है. इसके अलावा बुलंदशहर के मंदिर मामले में अपर मुख्य सचिव गृह ने कहा कि मंदिरों को व्यवस्थित करने का प्रदेश में फिलहाल कोई कानून नहीं है. हम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया में की जा रहीं विवादित टिप्पणियों पर सख़्त कार्रवाई की जायेगी.

‘तोड़-मरोड़ कर पेश किए जा रहे हैं आंकड़े’
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वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह का कहना है कि विपक्ष द्वारा राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2017 के अपराध आंकड़ें जनता के बीच तोड़-मरोड़ कर पेश किए जा रहे हैं. सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष, विशेष तौर पर प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव बिना समुचित अध्ययन किए राजनैतिक रोटियां सेंकने का प्रयास कर रहे हैं. सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि एनसीआरबी के आंकड़ों को समझने के लिये जनसंख्या के आधार पर अनुपात निकाला जाना चाहिए.

 क्राइम रेट एक अच्छा एवं विश्वसनीय संकेतक
सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि जिन प्रदेशों की जनसंख्या अधिक है, वहां पर अपराध भी अधिक घटित व पंजीकृत होते हैं. अपराध की स्थिति समझने के लिए क्राइम रेट एक अच्छा एवं विश्वसनीय संकेतक है. एनसीआरबी के मुताबिक, क्राइम रेट को प्रति एक लाख जनसंख्या के सापेक्ष अपराधों की संख्या के रूप में परिभाषित अपराध दर (क्राइम रेट) एक सार्वभौमिक वास्तविक संकेतक है. यह राज्य के आकार और जनसंख्या में वृद्धि के प्रभाव को संतुलित करता है अर्थात जिस प्रदेश में जनसंख्या अधिक होगी, वहां अपराध की संख्या भी अधिक होगी.

बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन आने वाला एनसीआरबी 1954 से लगातार अपराध के आंकड़े जारी कर रहा है.

(रिपोर्ट- अजीत सिंह)
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First published: October 23, 2019, 8:14 PM IST
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