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NCRB के मुताबिक यूपी में कम नही हुआ 'छपाक' का दर्द, जारी है एसिड अटैक

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 15, 2020, 4:36 PM IST
NCRB के मुताबिक यूपी में कम नही हुआ 'छपाक' का दर्द, जारी है एसिड अटैक
एसिड अटैक की घटनाओं में नहीं हुई कमी

महिला सम्मान को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बीच पूरे देश में साल 2014 से 2018 के बीच 700 से ज्यादा एसिड अटैक की घटनाएं सामने आई है.

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लखनऊ. बड़े पर्दे पर जहां एक तरफ फिल्म दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) की फिल्म 'छपाक' (Chhapaak) में एसिड एटैक (Acid Attack) पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल (Lakshmi Agrawal) के दर्द को दिखाया गया है, तो असल जिंदगी में भी एसिड एटैक (Acid Attack) का दंश झेल रही महिलाओं का दर्द इससे कही ज्यादा है. जिसका खुलासा नेशनल क्राइम ब्यूरो रिकार्ड के आकड़े में साफ-साफ दिख रहा है. अगर सिर्फ उत्तर प्रदेश की बात करें तो पिछले 5 सालों में 240 से ज्यादा महिलाएं इसकी शिकार हुई हैं.

नेशनल क्राइम ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट का है ये दावा

साल 2005 में एसिड हमले की शिकार पर बनी फिल्म छपाक ने एक बार फिर से इस समस्या को सतह पर ला दिया है. विडंबना यह है कि इस घटना पर शोरगुल तो बहुत हुआ लेकिन ऐसी घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही. नेशनल क्राइम ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट से पता चलता है कि ऐसी घटनाएं कम होने की बजाय लगातार बढ़ रही हैं. तो सवाल भी उठाना लाजमी है कि क्या सिर्फ फिल्मों में इस समस्या को दिखा देने भर से समस्या का समाधान हो जाएगा? अगर ऐसा नहीं है तो फिर जरूरत है मंथन की. जिसके लिए एक बार फिर से इन आंकड़ों पर गौर फरमाना होगा जो वाकई में चौंकाने वाले हैं.

2014 से 2018 के बीच 700 से ज्यादा एसिड अटैक

महिला सम्मान को लेकर किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों के बीच पूरे देश में साल 2014 से 2018 के बीच 700 से ज्यादा एसिड अटैक की घटनाएं सामने आई है. जिसमें उत्तर प्रदेश में 260, वेस्ट बंगाल में 248, दिल्ली में 114, मध्य प्रदेश में 59, उड़ीसा में 52, पंजाब में 50, आंध्र प्रदेश में 47, हरियाणा में 46, बिहार में 39, और गुजरात में 37 मामले एसिड अटैक के सामने आए हैं.

हालांकि यह आंकड़े है जो सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हैं. जबकि दावा ये है कि यह तादाद असल घटनाओं के मुकाबले बेहद कम है. ऐसे कई मामले दर्ज ही नहीं होते और देश में एसिड हमले की घटनाएं आम हो जाती है, जिनका संज्ञान तक नहीं लिया जाता. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विमला बाथम के मुकाबिक एसिड अटैक करने वाला आरोपी सोच समझ कर नहीं गुस्से के जुनून में ऐसी हरकत को अंजाम देता है. जिसके बाद पीड़िता को शारीरिक और मानसिक तौर पर सामान्य होने में सालों लग जाते हैं. हालांकि ऐसी युवतियों के इलाज और जीवन यापन के लिए सरकार की तरफ से रानी लक्ष्मी बाई योजना चल रही है. जिसके तहत 3 से 10 लाख की मदद एसिड एटैक पीडिता को की जाती है.

ये है कानूनएसिड अटैक मामलों में सरकार ने कड़ा रुख नहीं अपनाया. कानून के मुताबिक एसिड अटैक करने वालो को 10 साल की सजा या उम्र कैद हो सकती हैं. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देश के मुताबिक एसिड सिर्फ उन्हीं दुकानों में मिल सकता हैं जिनको इसके लिए रजिस्टर्ड किया गया हैं. बजाय इसके बाजार और दुकानों में एसिड धड़ल्ले से बिक रहा है. जबकि ज्यादातर मामलों में अभियुक्तो की तरफ से पीड़िता को और उसके परिजनों को धमकी दी जाती है. इस वजह से एसिड की शिकार होने के बावजूद पीड़िता के परिजन पुलिस के पास नहीं जाते.

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First published: January 15, 2020, 4:36 PM IST
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