NEWS 18 EXCLUSIVE: जिस पूर्व IAS के खिलाफ दर्ज की गई है FIR, उनका अयोध्या राम मंदिर से रहा है गहरा नाता
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NEWS 18 EXCLUSIVE: जिस पूर्व IAS के खिलाफ दर्ज की गई है FIR, उनका अयोध्या राम मंदिर से रहा है गहरा नाता
रिटायर्ड आईएएस एसपी सिंह

एसपी सिंह यूपी के कुछ उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी में अयोध्या (Ayodhya) में विवादित ढांचे का 1986 में ताला खोला गया था.

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लखनऊ. सोशल मीडिया (Social Media) के जरिए भ्रामक खबरें फैलाने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने पूर्व आईएएस अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह (Surya Pratap Singh) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है. उनके खिलाफ आईटी एक्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट और एपिडेमिक एक्ट के तहत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. एसपी सिंह 1982 बैच के आईएएस ऑफिसर रहे हैं और 4 साल पहले उन्होंने वीआरएस ले लिया था. क्या आप जानते हैं कि उनका अयोध्या राम मंदिर (Ayodhya Ram Mandi) से गहरा नाता रहा है. एसपी सिंह कुछ उन चुनिंदा अफसरों में शामिल हैं, जिनकी मौजूदगी में अयोध्या के विवादित ढांचे का 1986 में ताला खोला गया था, तब प्रदेश में वीर बहादुर सिंह की सरकार थी और एसपी सिंह उनके विशेष सचिव थे.

जब मुख्यमंत्री ने आधी रात को किया अयोध्या रवाना
एसपी सिंह उस घटना को याद करते हुए बताते हैं कि आधी रात को सीएम वीर बहादुर सिंह ने उन्हें अपने आवास पर बुलाया और कहा कि फौरन अयोध्या निकल जाओ. राम मंदिर में सालों से लगा ताला खोलना है. उनके लिए एक एंबेसडर गाड़ी आ गई, क्योंकि तब विशेष सचिव को कोई गाड़ी सरकार की तरफ से नहीं मिलती थी. कार में सवार होकर भोर में ही वह अयोध्या पहुंच गए और सीधे जिलाधिकारी इंदु कुमार पांडे के आवास पर पहुंचे. वहां से उन्हें लेकर विवादित ढांचे पर पहुंचे, तब तक एसपी को भी बुला लिया गया.

चाबी नहीं मिली तो तोड़ा गया ताला
एसपी सिंह यह भी याद करते हुए बताते हैं कि ताला खोलने के लिए जब चाबी की मांग की गई तो चाबी नहीं मिली. ऐसी स्थिति में विवादित ढांचे का ताला तोड़ा गया. हम सभी जानते हैं कि उसके बाद से राम मंदिर आंदोलन में एक बहुत बड़ा मोड़ आ गया. समय था 1986 का. उन्हें नौकरी में महज 3 साल ही हुए थे और वे इतनी महत्वपूर्ण घटना के गवाह बने.



हाल ही में आए थे चर्चा में
अयोध्या राम मंदिर मुद्दे से एसपी सिंह का दूसरा वास्ता अभी हाल में ही पड़ा, जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच मध्यस्थता की कमेटी बनाई गई. इस कमेटी में धर्मगुरु श्री श्री रविशंकर भी शामिल थे. श्री श्री रविशंकर से एसपी सिंह का बहुत गहरा नाता रहा है. ऐसा कहा जाता है कि मध्यस्थता में फ्रंट फुट पर श्री श्री रविशंकर का चेहरा था, लेकिन उनकी तरफ से सारी तैयारी, सारी मेहनत और सारी जानकारी एसपी सिंह ही दे रहे थे. श्री श्री रविशंकर के पीछे बैकस्टेज से एसपी सिंह ही सारी भूमिका अदा कर रहे थे.

2016 में लिया था वीआरएस
2016 में एसपी सिंह ने वीआरएस ले लिया था. वीआरएस लिए जाने से पहले वे माध्यमिक शिक्षा में प्रमुख सचिव की अहम भूमिका अदा कर चुके थे. उस वक्‍त अखिलेश यादव की सरकार थी. यूपी में होने जा रही बोर्ड परीक्षाओं से ऐन पहले उन्हें इस पद से हटा दिया गया था. इस पद से हटाए जाने के बाद सूर्य प्रताप सिंह ने अखिलेश यादव सरकार पर नकल माफियाओं के साथ गठजोड़ के आरोपों के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था और काफी चर्चा में आए थे.

यूपी में कोरोना जांचों को लेकर उठाए थे सवाल
11 जून को उन्होंने एक ट्वीट करके योगी सरकार पर सवाल उठाया था कि प्रदेश में कोरोना की बहुत कम जांच हो रही है. उन्होंने मुख्य सचिव को ट्वीट करते हुए यह सवाल भी पूछा था कि सरकार ने जिलाधिकारियों को कम जांच करने के निर्देश क्यों दिए हैं? उनके इस ट्वीट के बाद ही हजरतगंज थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. एसपी सिंह का कहना है कि सवाल पूछना उनका मौलिक अधिकार है. मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद से ये मामला सोशल मीडिया में पूरे देश भर में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है. ट्विटर पर उन्होंने अपने सवालों को दोहराते हुए 2 मिनट 12 सेकंड का एक वीडियो रिलीज किया है, जिसे 55 हजार से ज्यादा लोगों ने अभी तक देखा है.

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