News 18 Exclusive: यूपी के परिषदीय स्कूलों का हाल- दावा कॉन्वेंट का, टीचर एक भी नहीं

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 31, 2018, 3:24 PM IST
News 18 Exclusive: यूपी के परिषदीय स्कूलों का हाल- दावा कॉन्वेंट का, टीचर एक भी नहीं
यूपी के परिषदीय स्कूलों का हाल. Photo: News 18

जिन स्कूलों में एक टीचर है या जहां एक टीचर दो-दो स्कूल संभाल रहे हैं वहां की स्थितियां काफी चौंकाने वाली हैं. उसी टीचर को ही बच्चों को पढ़ाने और परीक्षा के अलावा जूते-मोजे, स्वेटर, यूनिफॉर्म, किताबें बांटने से लेकर मीड डे मील बंटवाने तक सारी व्यवस्था देखनी होती है.

  • Share this:
उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का हाल ये है कि सूबे के कई प्राइमरी स्कूलों में आज एक भी शिक्षक नहीं हैं. ये हकीकत बेसिक शिक्षा विभाग के उन परिषदीय स्कूलों की है, जिन्हें कॉन्वेंट के तर्ज पर विकसित करने का दावा किया जा रहा है. लेकिन इन स्कूलों के हालात देखकर तो ऐसा लगता है जैसे विभाग खुद इन स्कूलों को बदहाल करके कॉन्वेंट स्कूलों को आगे बढ़ने में मदद कर रहा है.

प्रदेश के नगर क्षेत्रों में इस समय 4516 प्राइमरी स्कूल हैं लेकिन इनमें पढ़ाने वाले शिक्षक सिर्फ 3480 हैं. यानी 1036 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं हैं. वहीं 4516 में से 3480 स्कूल तो ऐसे हैं, जो सिर्फ 1-1 शिक्षक के भरोसे हैं. न्यूज 18 ने जब स्कूलों के इन हालात की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं.

सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में ही हो रही शिक्षकों की भर्तियां

असल में बेसिक शिक्षा विभाग के स्कूलों को ग्रामीण और नगर दो हिस्सों में बांटा गया है. विभागीय सूत्रों ने बताया कि इनमें से नगर क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में 25 साल से भी अधिक समय से नए शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हुई. अपर प्राइमरी स्कूलों में भी 1208 स्कूलों के लिए सिर्फ 1429 शिक्षक ही हैं. पिछली सरकारों से लेकर अब तक सहायक अध्यापकों की जो भी भर्तियां हुई, वह सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों के लिए हुईं. इसी क्रम में हाल ही में वर्तमान सरकार ने भी 41556 पदों पर सहायक अध्यापकों की जो भर्ती की. उसमें भी नगर क्षेत्र को कोई शिक्षक नहीं मिला. इतना ही नहीं विभाग के पास ऐसी कोई पॉलिसी भी नहीं कि ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों से नगर क्षेत्र में शिक्षकों को ट्रांसफर करके यहां शिक्षकों की कमी को पूरा किया जा सके.

मुख्यमंत्री आवास के बगल में ही एक टीचर के भरोसे चल रहे दो स्कूल  

ऐसे में इन स्कूलों के बच्चे क्या पढ़ते होंगे और परीक्षा कैसे होती होगी, इसका अंदाजा खुद ही लगाया जा सकता है. न्यूज 18 की टीम जब मुख्यमंत्री आवास के ही 1 किलोमीटर के दायरे में बने कैबिनेट गंज, प्राथमिक विद्यालय पहुंची तो बताया गया कि यहां भी एक ही स्कूल में दो स्कूल चलते हैं. यहां कक्षा 1 से 5 तक के 100 छात्रों को पढ़ाने के लिए महज एक शिक्षिका है.

विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रिजवाना परवीन कहती हैं कि शिक्षका एक कमरे में रहती है तो दूसरे क्लासरूम में छात्रों को देखने वाला कोई नहीं रहता. परीक्षा के समय दिक्कत और बढ़ जाती है. इसके अलावा कुछ स्कूल तो सिर्फ शिक्षामित्र के भरोसे ही चल रहे हैं.
Loading...

सात साल से ट्रांसफर और समायोजन का जुगाड़ भी रुका

न्यूज 18 टीम की पड़ताल में सामने आया कि पिछले कई सालों में सिर्फ 3 बार ही ग्रामीण क्षेत्रों से नगर क्षेत्रों में शिक्षकों का समायोजन और ट्रांसफर किया गया. 2001, 2002 और 2010-11. इसके बाद 2016 में एक बार फिर ऐसा करने का शासनादेश तो हुआ लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 2017 में विधानसभा चुनाव के चलते आचार संहिता लागू होने से यह रुक गया.  नगर क्षेत्र में शिक्षामित्रों के समायोजन से जो कमी पूरी हुई थी तो जुलाई 2017 में उन शिक्षामित्रों का समायोजन भी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रद्द हो गया.

मामला सिर्फ इतना ही नहीं. जिन स्कूलों में एक टीचर है या जहां एक टीचर दो-दो स्कूल संभाल रहे हैं वहां की स्थितियां काफी चौंकाने वाली हैं. एक टीचर को ही बच्चों को पढ़ाने और परीक्षा के अलावा जूते-मोजे, स्वेटर, यूनिफॉर्म, किताबें बांटने से लेकर मीड डे मील बंटवाने तक सारी व्यवस्था देखनी होती है. इसके अलावा कभी विभागीय बैठक तो कभी पैरेंट्स-टीचर्स मीटिंग. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर विभाग क्यों इतने सालों से इन स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती नहीं कर रहा? कहीं यह कॉन्वेंट स्कूलों को फायदा पहुंचाने की कोशिश तो नहीं.

आंकड़े बयां कर रहे सच्ची तस्वीर

— सूबे के नगर क्षेत्र में 4516 प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ 3480 शिक्षक
— 1036 स्कूलों के लिए एक भी शिक्षक नहीं
— 3480 स्कूलों को बस एक-एक शिक्षक का सहारा
— कई शिक्षकों पर दो-दो स्कूल की जिम्मेदारी
— अपर प्राइमरी में भी 1208 स्कूलों के लिए सिर्फ 1429 शिक्षक
— 25 साल से भी अधिक समय से नगर क्षेत्र में नहीं हुई शिक्षकों की भर्ती
— पिछले कई साल में सिर्फ तीन बार ग्रामीण से नगर क्षेत्र में भेजे गए शिक्षक

(रिपोर्ट: शैलेश अरोड़ा)

ये भी पढ़ें: 

स्टैच्यू आॅफ यूनिटी पर बोलीं मायावती- बहुजन समाज से माफी मांगें बीजेपी और आरएसएस

जानिए अखिलेश ने क्यों कहा- सीएम योगी कमाल के हैं, जो बोलते हैं, अच्छा बोलते हैं

खून का काला कारोबार: सामने आया एक बुजुर्ग, कहा- मिलावटी खून चढ़ाने से हुई बेटे की मौत

हाशिमपुरा नरसंहार में 16 पीएसी जवानों को उम्रकैद, 42 लोगों की हुई थी हत्या

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 31, 2018, 3:24 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...