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निर्भया कांड: 21 वीं सदी में पहली बार एक साथ 4 गुनाहगारों को मिलेगी फांसी !
Lucknow News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 18, 2019, 8:53 PM IST
निर्भया कांड: 21 वीं सदी में पहली बार एक साथ 4 गुनाहगारों को मिलेगी फांसी !
निर्भया कांड के दोषी की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में निर्भया कांड (Nirbhaya Case) के चौथे दोषी की याचिका खारिज हो गई है. ऐसे में मामले के चारों दोषियों को फांसी (Death Sentence) देने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. देश की आजादी के बाद ऐसा दूसरी बार होगा जब एक साथ 4 दोषियों को फांसी के तख्ते पर लटकाया जा सकता है.

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लखनऊ. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया कांड (Nirbhaya Case) के सभी दोषियों को आज फांसी की सजा दिए जाने (Death Sentence) का रास्ता सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया कांड के दोषी अक्षय को मिली फांसी की सजा पर उसकी पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. जबकि तिहाड़ जेल में बंद तीन अन्य दोषियों की राष्ट्रपति के यहां से दया याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है. हालांकि इस दौरान निर्भया के दोषियों के खिलाफ डेथ वारंट जारी करने की याचिका को पटियाला कोर्ट ने आगामी 7 जनवरी तक टाल दिया है. इसके चलते अब 7 जनवरी को ही निर्भया के दोषियों को फांसी के फंदे पर लटकाए जाने की तारीख तय की जाएगी. मेरठ से जल्लाद पवन जल्द ही अपने बुलावे के इंतजार में तैयार हैं.

पहली बार चार गुनाहगारों को एक साथ फांसी
निर्भया कांड के 6 दोषियों में से 4 को फांसी पर चढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है. क्योंकि निर्भया कांड का एक दोषी पहले ही आत्महत्या कर चुका है, तो वहीं दूसरे गुनाहगार को नाबालिग होने के चलते छोड़ा जा चुका है. ऐसे में अब शेष बचे विनय, अक्षय, मुकेश और पवन. इन चारों गुनाहगारों को जल्दी ही फांसी के तख्ते पर चढ़ाया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो 21वीं सदी में यह पहली बार होगा, जब चार  गुनाहगारों को भारत में एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया जाएगा.

1983 में 4 को एक साथ दी गई थी फांसी



यूं तो आजादी से पहले कई बार अंग्रेजों द्वारा कई लोगों को एक साथ फांसी पर चढ़ाया जा चुका है, लेकिन आजादी के बाद अब तक सिर्फ एक बार 4 लोगों को फांसी दी गई है. 10 लोगों की जघन्य हत्या से जुड़े अभयंकर जोशी केस में 27 नवंबर 1983 को पुणे की यरवदा जेल में एक साथ 4 लोगों को फांसी पर चढ़ाया गया था. ऐसे में निर्भया कांड में 4 लोगों की फांसी आजाद भारत में दूसरा और 21वीं सदी का पहला मामला होगा.तिहाड़ जेल के इतिहास में भी अब तक कभी दो से अधिक दोषियों को फांसी के तख्ते पर एक साथ नहीं लटकाया गया है.

जनवरी 2020 में हो सकती है फांसी
अक्षय की पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट से खारिज किए जाने के बाद जेल प्रशासन ने चारों दोषियों को फांसी देने की तैयारी तेज कर दी है. 3 गुनाहगार पहले से ही तिहाड़ जेल में बंद हैं. मंडोली जेल में बंद चौथे दोषी पवन गुप्ता को भी तिहाड़ जेल में शिफ्ट किया जा चुका है. जेल सूत्रों के मुताबिक तिहाड़ की जेल नंबर-3 में बने फांसी घर में निर्भया के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए न सिर्फ बक्सर से फांसी की रस्सी मंगाई जा चुकी है. बल्कि चार लोगों को एक साथ फांसी देने के लिए फांसी के तख्ते समेत पूरे प्लेटफार्म को भी तैयार किया जा चुका है. तिहाड़ जेल के पास अभियुक्तों को फांसी देने के लिए कोई जल्लाद नहीं है. इसलिए जेल प्रशासन ने यूपी पुलिस को पत्र लिखकर जल्लाद की मांग की है.

तिहाड़ ने यूपी से मांगा जल्लाद
news 18 से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश के डीजी जेल आनंद कुमार बताते हैं कि 'तिहाड़ जेल के अधीक्षक ने हमें एक पत्र भेजा है. जिसमें फांसी की सजा पाए अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाने के लिए तिहाड़ के पास जल्लाद न उपलब्ध होने की जानकारी देते हुए यूपी से जल्लाद की मांग की है. उन्होंने बताया कि यूपी के लखनऊ और मेरठ जेल के पास एक-एक जल्लाद है. ऐसे में हमने उनके पत्र का जवाब देते हुए सहमति दे दी है कि 'आपको जब भी जरूरत होगी, हम उनको आपकी सेवा में भेज देंगे.'

फांसी देने को तैयार है पवन जल्लाद
उधर मेरठ में निर्भया कांड के दोषियों को फांसी पर चढ़ाने की जानकारी मिलते ही मेरठ का पवन जल्लाद भी खासा खुश नजर आ रहा है. पवन जल्लाद निर्भया कांड के दोषियों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने के लिए तैयार बैठा हुआ है. उसे तिहाड़ जेल प्रशासन से बुलावे का इंतजार है. पवन जल्लाद के मुताबिक उसके बाबा ने ही तिहाड़ में रंगा-बिल्ला नाम के अपराधियों को फांसी के फंदे पर लटकाया था और अब वह निर्भया कांड के गुनाहगारों को फांसी पर लटकाएगा. निर्भया के गुनहगारों को फांसी के फंदे पर लटकाने से बड़ा काम उसके जीवन में कोई दूसरा नहीं हो सकता. वो इस बात पर जीवन भर फख्र महसूस करेगा कि उसने ऐसे दानवों को फांसी पर लटकाया था.

16 दिसंबर 2012 को शर्मसार हुई थी इंसानियत
देश की राजधानी दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को पैरामेडिकल की छात्रा निर्भया के साथ एक ऐसी घटना घटी. जिसने इंसानियत को शर्मसार करने के साथ-साथ देश में महिला सुरक्षा के इंतजामों पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. 29 दिसंबर को निर्भया जिंदगी की जंग हार गई, लेकिन इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया. सात साल चले इस केस में आखिरकार वो घड़ी अब नजदीक आ गई जब निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा मिलेगी.

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First published: December 18, 2019, 8:53 PM IST
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स्रोत: स्वास्थ्य मंत्रालय, भारत सरकार
अपडेटेड: April 09 (05:00 PM)
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स्रोत: जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी, U.S. (www.jhu.edu)
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