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स्टडी में खुलासा- RTI कानून को UP सरकार खुद बना रही कमजोर

News18India
Updated: October 12, 2019, 1:37 PM IST
स्टडी में खुलासा- RTI कानून को UP सरकार खुद बना रही कमजोर
प्रतीकात्मक चित्र.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (TII) की पूर्व संध्या पर जारी एक रिपोर्ट में इस बात का पता चला है. रिपोर्ट (Report) में देश के 28 राज्यों के सूचना आयोग के काम का विश्लेषण भी किया गया है.

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नई दिल्ली. आरटीआई कानून (RTI Act) लागू होने के 14 साल बाद भी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार ने इसके अंतर्गत अभी तक एक भी रिपोर्ट प्रकाशित नहीं किया, जबकि साल में एक रिपोर्ट प्रकाशित करना जरूरी होता है. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) हर साल रिपोर्ट प्रकाशित करने वाला राज्य है. यह बात शुक्रवार को स्वैच्छिक समूह ने कही है.

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (TII) की पूर्व संध्या पर जारी एक रिपोर्ट में इस बात का पता चला है. रिपोर्ट में देश के 28 राज्यों के सूचना आयोग के काम का विश्लेषण भी किया गया है. आपको बता दें कि 12 अक्टूबर 2005 को देश में आरटीआई (RTI) कानून लागू हुआ था.

आरटीआई अधिनियम की धारा 25 (1) यह कहती है
आरटीआई अधिनियम की धारा 25 (1) केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोग को हर साल की इस अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट प्रकाशित करने और उसकी एक प्रति केंद्र सरकार को भेजने का आदेश देती है. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार इन नियमों की 14 साल से धज्जियां उड़ा रही है.

समय के साथ सरकार बदलती रही और मुख्यमंत्री बदलते रहे, लेकिन किसी ने इस रिपोर्ट को तैयार कराने की हिम्मत नहीं दिखाई. इस मामले में छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जिसने हर 2005 से 2018 तक आरटीआई के तहत हर साल की वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की है. जो छत्तीसगढ़ सरकार की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है.

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First published: October 12, 2019, 1:36 PM IST
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