यूपी सहकारिता भी अब होगी 'भगवामय', खत्म होगा मुलायम और शिवपाल का वर्चस्व!

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 29, 2019, 12:30 PM IST
यूपी सहकारिता भी अब होगी 'भगवामय', खत्म होगा मुलायम और शिवपाल का वर्चस्व!
यूपी सहकारिता के क्षेत्र में मुलायम सिंह यादव का वर्षों तक वर्चस्व रहा.

विधानसभा और लोकसभा में परचम लहरा रही बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं को संजोकर रखने के लिए ‘मिशन 7500’ तैयार किया है. दरअसल बीजेपी सहकारिता (Co-operative) के क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं को जगह दिलाने की कोशिश में है.

  • Share this:
विधानसभा और लोकसभा में परचम लहरा रही बीजेपी (BJP)  ने 2022 के यूपी विधानसभा की तैयारी शुरू कर दी है. इसके तहत बीजेपी ने अपने कार्यकर्ताओं को संजोकर रखने के लिए ‘मिशन 7500’ तैयार किया है. दरअसल बीजेपी सहकारिता (Co-operative) के क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं को जगह दिलाने की कोशिश में है. बीजेपी की नजर उन सहकारी समितियों पर है, जहां शिवपाल यादव का झंडा बुलंद है. पशुपालन, दुग्ध विकास और हथकरघा जैसे अन्य समितियों में चुनाव होने हैं, जिसको लेकर बीजेपी ने अपना प्लान तैयार कर लिया है.

लोकसभा चुनाव तक शिवपाल यादव पर मुलायम दिख रही बीजेपी अब सख्त नजर आ रही है. सहकारिता के लिए अब होने वाले चुनाव के लिए महामंत्री संगठन सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा, महामंत्री विद्यासागर सोनकर सहित पार्टी पदाधिकारियों ने रणनीति तैयार कर ली है. इसके लिए एक सहकारिता से जुड़े लोगों की बैठक भी बुलाई गई. बीजेपी की मानें तो बीजेपी कार्यकर्ता सहकारिता को मजबूत करने के उद्देश्य से मैदान में उतर रहे हैं.

1977 से मुलायम ने सहकारिता को बनाया अपना 'हथियार'

दरअसल उत्तरप्रदेश का सहकारिता विभाग पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल से याद किया जाता है. 1977 में मुलायम सिंह यादव पहली बार सहकारिता मंत्री बनें और वहीं से उन्होंने सहकारिता को अपना हथियार बना लिया. आज उत्तरप्रदेश में 7500 सहकारी समितियां हैं, जिसके लगभग एक करोड़ सदस्य हैं. बीजेपी अब इन्हीं समितियों के सदस्यों के सहारे अपना विस्तार करना चाह रही है.

पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की जितनी पकड़ सहकारिता में रही वैसे पैठ किसी भी नेता की नहीं रही. मुलायम सिंह जब पहली बार सहकारिता मंत्री बने तभी से इस पर काम करना शुरू कर दिया. वे जब मुख्यमंत्री रहे, तब भी इस विभाग को या तो अपने पास रखा या फिर अपने छोटे भाई शिवपाल को दिया. समाजवादी पार्टी ने अपनी राजनीति में सहकारिता का भरपूर इस्तेमाल किय़ा.

यूपी की हर शीर्ष सहकारी संस्थाओं पर रहा सपा का कब्जा

प्रदेश की शीर्ष सहकारी संस्थाओं की बात करें तो इनमें उप्र कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड, उप्र सहकारी बैक लिमिटेड, उप्र सहकारी ग्राम्य विकास बैक, उप्र राज्य निर्माण सहकारी संघ, उप्र राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ, उप्र राज्य उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड, उप्र जूट सहकारी संघ लिमिटेड, उप्र कोआपरेटिव यूनियन लिमिटेड प्रमुख हैं. इन सभी जगहों पर अपने लोगों को बैठाकर मुलायम सिंह यादव ने सहकारिता के अंदर समाजवादी पार्टी की पैठ करा दी.
Loading...

मुलायम के जनाधार में सहकारिता का विशेष योगदान

वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में 70 के दशक से ही सहकारिता आंदोलन को मजबूत करने के लिए गांव-गांव और छोटे-छोटे कस्बों में सहकारिता समितियां बनाई गईं. इसके तहत किसानों, मजदूरों को संगठित करना, उन्हें लोन दिलाना, बैंक स्थापित करना, लैंड डेवलपमेंट करवाना जैसे तमाम काम मुलायम सिंह यादव का बड़ा योगदान माना जाता है. कहा जाता है कि यही मुलायम की राजनीतिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार रहा है. इसी के कारण कई समाजवादी विचारधारा के लोग मुख्य धारा से जुड़े इनमें जनेश्वर मिश्र, शिवपाल यादव, मोहन सिंह आदि प्रमुख हैं. सहकारी आंदोलन ने किसानों को और प्रदेश की आर्थिक तरक्की दी.

मुलायम के रास्ते चलकर शिवपाल ने कायम किया वर्चस्व
मुलायम के बाद सहकारिता में प्रसपा नेता शिवपाल यादव की अभी भी पकड़ बनी हुई है. वे उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के सभापति हैं तो उनके बेटे आदित्य यादव प्रादेशिक सहकारी संघ के चेयरमैन हैं. अभी तक बीजेपी की निगाहें शिवपाल यादव की पार्टी के कब्जे वाले पदों पर नहीं थी, क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव तक बीजेपी की रणनीति शिवपाल यादव के लिए सॉफ्ट थी. अब राजनीतिक स्थिति को देखते हुए बीजेपी का नजरिया बदल चुका है.

swatantra dev singh
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी सहकारी समितियों पर वर्चस्व कायम करने की कोशिश में है.


समय के साथ बदल गया सहकारिता का 'रोल'

वैसे कहने के लिए तो सहकारिता किसानों, मजदूरों, गरीब लोगों के लिए एक हथियार था, लेकिन आंदोलन कहीं और रह गया और विभाग राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उपकृत करने का यंत्र बन गया. अब बीजेपी की निगाहें इस पर लग गई हैं.

2022 विधानसभा चुनाव से पहले सहकारिता के पशुधन, दुग्ध विकास, हथकरघा जैसे क्षेत्र में चुनाव होने हैं, वहां बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं की एडजस्ट करने की जुगत में है. अभी तक सहकारिता में जहां-जहां चुनाव हुए हैं. वहां-वहां बीजेपी का कब्जा नजर आ रहा है. समितियों का चुनाव सितंबर में होना है, जिस पर बीजेपी की निगाहें लगी हुई हैं. 7500 सहकारी समितियों पर कब्जा अब बीजेपी का लक्ष्य है.

(रिपोर्ट: कुमारी रंजना)

ये भी पढ़ें:

आजम खान पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, अब डकैती की FIR

बुलंदशहर के पूर्व डीएम अभय सिंह तीन IAS भ्रष्टाचार में शामिल, CBI ने भेजी शासन को रिपोर्ट

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 29, 2019, 12:28 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...