लाइव टीवी

तो CAA के कारण अब अखिलेश यादव होंगे प्रियंका गांधी के निशाने पर!
Azamgarh News in Hindi

MANISH KUMAR | News18 Uttar Pradesh
Updated: February 12, 2020, 5:24 PM IST
तो CAA के कारण अब अखिलेश यादव होंगे प्रियंका गांधी के निशाने पर!
आजमगढ़ दौरे पर जनता का अभिवादन स्वीकारतीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी.

अखिलेश यादव (Akhilesh yadav) के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ (Azamgarh) में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वालों पर जब पुलिस की कार्रवाई हुई तो कांग्रेस को अखिलेश यादव पर हमले का एक बड़ा मौका मिल गया. अखिलेश के आजमगढ़ न जाने को कांग्रेस ने मुद्दा बना लिया और आनन-फानन में प्रियंका गांधी ने वहां का दौरा भी कर लिया.

  • Share this:
लखनऊ. कांग्रेस (Congress) अपने आप को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में फिर से जिन्दा करने के लिए जद्दोजहद कर रही है लेकिन, सवाल यह है कि उसका वजूद किसकी कीमत पर आकार लेगा? तो खबर यह है कि अब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अपनी राजनैतिक चाल बदल ली है. उसके एजेंडे में अब बीजेपी (BJP) से ज्यादा सपा और बसपा आ गई है. इन दोनों में से भी सबसे ज्यादा फोकस कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी पर लगाना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव पर कांग्रेस के हमले इस बात की गवाही दे रहे हैं.

अखिलेश के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में जो कुछ भी हुआ उससे कांग्रेस का एजेंडा साफ हो जाता है. आजमगढ़ में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वालों पर जब पुलिस की कार्रवाई हुई तो कांग्रेस को अखिलेश यादव पर हमले का एक बड़ा मौका मिल गया. अखिलेश के आजमगढ़ न जाने को कांग्रेस ने मुद्दा बना लिया और आनन-फानन में प्रियंका गांधी ने वहां का दौरा भी कर लिया. प्रियंका गांधी से वहां की महिलाओं ने सपा विधायक पर साथ न देने की शिकायत भी की.

जितना हो सके सपा पर हमले की बनीं रणनीति
कांग्रेसी सूत्रों की मानें तो नेतृत्व ने अपने कार्यकर्ताओं को साफ कर दिया है कि जितना हो सके उतना सपा पर हमले करो. ऐसा उस पार्टी के साथ हो रहा है जिसके साथ मिलकर राहुल गांधी ने चुनावी रैलियां की थीं. यूपी को साथ पसंद है का नारा आपको याद ही होगा, जब एक ही गाड़ी पर राहुल और अखिलेश साथ-साथ चुनावी मौसम में निकले थे. लेकिन, अब कांग्रेस को लगने लगा है कि उसके वोट बैंक को भाजपा से ज्यादा सपा और बसपा ने हथिया रखा है. आंकड़े भी इसकी गवाही देते हैं. जैसे जैसे सपा और बसपा का ग्राफ यूपी में बढ़ता गया कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरता गया. खासकर समाजवादी का तो उदय ही कांग्रेस के पतन पर हुआ. ऐसा नहीं है कि भाजपा ने उसे राजनीतिक नुकसान नहीं पहुंचाया है, लेकिन मोटा नुकसान तो सपा और बसपा ने ही उसे पहुंचाया है.

बीजेपी से ज्यादा सपा और बसपा ने कांग्रेस को पहुंचाया नुकसान
समाजवादी पार्टी के गठन से पहले और उसके बाद के चुनावी आंकड़े इस बात की गवाही भी देते हैं. 1991 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अविभाजित यूपी की 425 सीटों में से 413 पर चुनाव लड़ी थी. इसमें उसे 17.59 फीसदी वोट मिले जबकि जनता दल को (इसी से टूटकर समाजवादी पार्टी 1992 में बनी थी ) 21 फीसदी और बसपा को महज 10.26 फीसदी वोट मिले. लेकिन, समाजवादी पार्टी के अस्तित्व में आने के साथ ही कांग्रेस खत्म होते चली गई. 1993 में हुए मध्यावधि चुनाव में भी कांग्रेस का वोट शेयर गिरकर 17 से 15 फीसदी रह गया. 1996 में पार्टी को थोड़ा सहारा मिला.

लगातार गिरता गया वोट शेयरलेकिन, 21 वीं सदी के आते-आते यूपी में कांग्रेस का दम निकल गया. 2002 के चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर महज 8.99 फीसदी रह गया जबकि सपा का बढ़कर 26.27 फीसदी और बसपा का 23.19 फीसदी पहुंच गया. तब से लेकर आज तक कांग्रेस 10 फीसदी वोट शेयर के आसपास ही घिसती चली आ रही है. कांग्रेस तो यूपी से 1990 के बाद से ही खत्म होती चली गई लेकिन, जब तक उत्तराखण्ड अलग राज्य नहीं बना था तब तक वहां से मिले वोट उसके वोट शेयर को बढ़ाए रखते थे. जैसे ही उत्तराखण्ड अलग राज्य बना कांग्रेस यूपी में एकदम हवा-हवाई दिखने लगी.

इस बात को पिछले साल कांग्रेस मुख्यालय में हुई एक बड़ी मीटिंग में भी बड़े नेताओं ने इंगित किया था. तब मंच से निर्मल खत्री और पीएल पूनिया ने कहा था कि भाजपा से ज्यादा उसका मुकाबला सपा और बसपा से होना चाहिए. अब कांग्रेस की नई टीम इसी एजेण्डे पर जुट गई है.

ये भी पढ़ें:

आजमगढ़ पहुंची प्रियंका गांधी ने सुना CAA का विरोध कर रही महिलाओं का दर्द

67 हजार रुपये बिजली बकाए पर बसपा सुप्रीमो मायावती की कोठी पर विभाग का नोटिस

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए आजमगढ़ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 12, 2020, 3:57 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर