COVID-19: अब लखनऊ के KGMU में भी शुरू हुआ प्लाज्मा थेरेपी से संक्रमित मरीजों का इलाज

उरई के डॉक्टर को शनिवार को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था. रविवार को भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. (प्रतीकात्मक फोटो)
उरई के डॉक्टर को शनिवार को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था. रविवार को भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. (प्रतीकात्मक फोटो)

केजीएमयू (KGMU) में उरई निवासी डॉक्टर को पहली डोज के रूप में 200 एमएल प्लाज्मा दिया गया है.

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लखनऊ. कोरोना वायरस (Corona virus) का प्रकोप कम होने का नाम नहीं ले रहा है. हालांकि, कोरोना वॉरियर्स दिन-रात इस वायरस को हराने के लिए काम कर रहे हैं. अभी तक कोरोना से देशभर में 26 हजार से भी ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं. वहीं, सैकड़ों लोगों की मौत हो गई है. लेकिन अभी तक भारत सहित पूरे विश्व में इस वायरस को जड़ से खत्म करने के लिए किसी भी वैक्सीन की खोज नहीं हो पाई है. हालांकि, भारत में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy) के जरिए मरीजों का नए तरीके से इलाज की शुरुआत की गई है. कहा जा रहा है कि इस थेरेपी से कई मरीजों में बहुत सुधार हुआ है. इस थेरेपी को सबसे पहले दिल्ली के अस्पतालों में अजमाया गया है. प्लाज्मा थेरेपी के बाद दिल्ली में कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो चुके हैं.अब धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक, प्लाज्मा थेरेपी द्वारा अब लखनऊ में ही कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज किया जा रहा है. इस थेरेपी की शुरुआत लखनऊ में रविवार को की गई है. केजीएमयू (KGMU) में उरई निवासी डॉक्टर को पहली डोज के रूप में 200 एमएल प्लाज्मा दिया गया है. वहीं, राजधानी की पहली कोरोना संक्रमित महिला डॉक्टर ने प्लाज्मा डोनेट किया है. यह महिला डॉक्टर पहले खुद कोरोना से संक्रमित थीं. लेकिन अब वह कोरोना को हराकर घर लौट चुकी हैं और पूरी तरह स्वस्थ हैं.

डॉक्टर को शनिवार को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था
अमर उजाला के मुताबिक, उरई के डॉक्टर को शनिवार को केजीएमयू में भर्ती कराया गया था. रविवार को भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ. उन्हें सांस लेने में समस्या हो रही थी. शरीर में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम हो गया था. उनकी वेंटिलेटर पर भी स्थिति नियंत्रित नहीं हो रही थी. ऐसी हालत में उन्हें प्लाज्मा थेरेपी दी गई. दरअसल, केजीएमयू में शुक्रवार को रेजीडेंट डॉक्टर व एक अन्य व्यक्ति ने प्लाज्मा डोनेट किया था. दोनों का ब्लड ग्रुप ‘बी’ पॉजिटिव था, जबकि उरई के डॉक्टर का ‘ओ’ पॉजिटिव. तब कोरोना से ठीक होने वाली गोमतीनगर की महिला डॉक्टर को बुलाया गया. महिला डॉक्टर ने 500 एमएल प्लाज्मा डोनेट किया. इसमें से 200 एमएल प्लाज्मा चढ़ाया गया. अब दो दिन बाद रिस्पांस देखने के बाद दूसरी थेरेपी दी जाएगी.
इसमें डोनर से सीधे प्लाज्मा लिया जाता है


वहीं, ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की अध्यक्ष डॉक्टर तूलिका चंद्रा का कहना है कि प्लाज्मा के 200 एमएल और 100 एमएल के बैग में सुरक्षित रखा गया है. इसमें डोनर से सीधे प्लाज्मा लिया जाता है और मरीज को चढ़ाया जाता है. कोविड-19 की चपेट से बाहर आए मरीजों के ब्लड से प्लाज्मा निकालकर दूसरे संक्रमितों को ठीक करने के लिए दिया जाता है.

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