Analysis: उपचुनाव से पहले योगी सरकार के लिए 'OBC' आरक्षण का चक्रव्यूह

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने 17 जातियों को एससी कैटेगरी में डालने के यूपी सरकार के कदम को अनुचित करार दिया. उन्‍होंने कहा था कि यह अधिकार ि‍सिर्फ संसद को है.

NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 8:56 AM IST
Analysis: उपचुनाव से पहले योगी सरकार के लिए 'OBC' आरक्षण का चक्रव्यूह
योगी सरकार के लिए OBC आरक्षण का चक्रव्यूह
NAVEEN LAL SURI | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 8:56 AM IST
उत्तर प्रदेश में 11 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले सीएम योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा पिछड़े वर्ग (OBC) की 17 जातियों को अनुसूचित जातियों में शामिल करने के मामले में चक्रव्यूह में फंसती नजर आ रही है. आखिर क्या है कानूनी दांव पेंच? इस मामले में राजनीतिक विश्लेषक रतन मणि लाल ने न्यूज18 से बातचीत में बताया कि पिछड़े वर्ग को आरक्षण देने पर केंद्र सरकार के मंत्री थावर चंद गहलोत खुद इसपर आपत्ति दर्ज करवा चुके हैं. ऐसे में यह उपचुनाव से पहले योगी सरकार के लिए एक बड़ा झटका है. लाल बताते हैं कि कोई भी राज्य आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी की लिस्ट में बदलाव का अधिकार सिर्फ संसद को है.

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि तमिलनाडु, गुजरात और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षण को लेकर मांग उठती रही है. उन्होंने बताया कि संविधान के मुताबिक कोई भी लिस्ट जारी होने से पहले संसद के दोनों सदनों की सहमति जरूरी है. उपचुनाव से पहले योगी सरकार के इस फैसले का कितना असर होगा इस सवाल पर रतन मणि लाल ने कहा, 'सरकार को नफा-नुकसान से कोई लेना देना नहीं है. सरकार की मंशा साफ है कि वो विपक्षी पार्टियों को बताना चाहती है कि कानूनी अड़चन के बाद भी हम लोग ओबीसी को आरक्षण देने को तैयार हैं, लेकिन विपक्ष इसका विरोध कर रही है.'

केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल

केंद्र सरकार ने 17 ओबीसी जातियों को एससी कैटेगरी में शामिल करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को अनुचित करार दिया है. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि यूपी सरकार का फैसला संविधान के अनुरूप नहीं है, क्योंकि एससी, एसटी और ओबीसी की लिस्ट में बदलाव का अधिकार सिर्फ संसद को है.

ये जातियां हुई SC में शामिल

योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 24 जून को डीएम और कमिश्नरों को आदेश दिया था कि वे ओबीसी में शामिल 17 अति पिछड़ी जातियों- कश्यप, राजभर, धीवर, बिंद, कुम्हार, कहार, केवट, निषाद, भार, मल्लाह, प्रजापति, धीमर, बठाम, तुरहा, गोड़िया, मांझी और मचुआ को अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी करें. इस पर कई दिनों से विवाद है.

 संसद में गूंजा OBC आरक्षण का मुद्दा
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राज्यसभा में यह मामला उठाते हुए बीएसपी के सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार ने मनमाने तरीके से इन 17 जातियों को एससी लिस्ट में डाल दिया है, जबकि संविधान के तहत ऐसा करने का अधिकार सिर्फ संसद को है. बसपा नेता ने केंद्र से राज्य सरकार को यह ‘असंवैधानिक आदेश’ वापस लेने के लिए परामर्श जारी करने का अनुरोध किया. वहीं, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि सरकार की मंशा सिर्फ विधानसभा उपचुनावों में वोट लेने की है.

फेल हुए हैं पहले भी प्रयास

उत्‍तर प्रदेश में इससे पहले साल 2005 में तत्कालीन मुलायम सरकार ने ओबीसी की कई जातियों को एससी कैटेगरी में शामिल करने का फैसला लिया था, जिस फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. इसके बाद साल 2013 में शिल्पकार और धनगड़ जातियों में कुछ उपजातियों को जोड़कर उन्हें एससी कैटेगरी में शामिल करने की कोशिश की गई थी, लेकिन तत्कालीन सरकार का यह फैसला भी हाईकोर्ट में टिक नहीं सका.

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First published: July 8, 2019, 8:34 AM IST
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