प्रतिबंध का असर: पहले दिन 298 किलो पॉलिथीन जब्त, 34 हजार जुर्माना वसूला

राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी 
(प्रतिकात्मक फोटो)

राज्यपाल ने दी अध्यादेश को मंजूरी (प्रतिकात्मक फोटो)

सरकार के फैसले के बाद पूरे प्रदेश में करीब 100 करोड़ की पॉलिथीन डंप हो गई. लखनऊ में लगभग 15 करोड़ की पॉलिथीन फैक्ट्री और दुकानदारों के पास रखी हुई है.

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राजधानी लखनऊ में पॉलिथीन प्रतिबंध के पहले दिन मिलाजुला असर देखने को मिला. जिला पर्शासन और नगर निगम की टीम ने रविवार को छापेमारी कर लगभग 298 किलो पॉलिथीन जब्त कर 34, 200 रुपए का जुर्माना वसूला. नगर निगम ने सभी जोनों में टीम बनाकर एक साथ अभियान की शुरुआत की. जिसके बाद दुकानदारों में अफरातफरी मच गई. हालांकि, पॉलिथीन बैन होने के बाद शहर के जागरूक लोग घरों से थैला लेकर निकले.



अमीनाबाद में नगर आयुक्त डॉ इन्द्रमणि त्रिपाठी व सिटी मजिस्ट्रेट विवेक श्रीवास्तव की मौजूदगी में पॉलिथीन जब्ती का अभियान चलाया गया. कर अधीक्षक राजेश सिंह के नेतृत्व में नरही, राणा प्रताप रोड, अशोक मार्ग पर अभियान चलाकर 150 किलोग्राम पॉलिथीन जब्ती की कार्रवाई की गई. सोमवार को जब्ती के साथ जुर्माने वसूलने की कार्रवाई भी शुरू कर दी जाएगी.



100 करोड़ रुपए की पॉलिथीन डंप





सरकार के फैसले के बाद पूरे प्रदेश में करीब 100 करोड़ की पॉलिथीन डंप हो गई. लखनऊ में लगभग 15 करोड़ की पॉलिथीन फैक्ट्री और दुकानदारों के पास रखी हुई है. प्रतिबंध लगने से पहले शहर में वैध-अवैध मिलाकर लगभग 100 फैक्ट्रियां पॉलिथीन बैग बना रही थीं.
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लखनऊ प्लास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जैन ने बताया कि वैसे तो शहर में 50 माइक्रोन से मोती पॉलिथीन बन रही है, प्रतिबंध के बाद फैक्ट्रियों में लगभग 300 टन पतली पॉलिथीन डंप पड़ा है. बता दें पूरे प्रदेश में हजारों वैध और अवैध फैक्ट्रियां हैं, जहां तीन हजार टन बनी पॉलिथीन डंप पड़ी हुई है.



राज्यपाल ने अध्यादेश को दी मंजूरी



उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने पॉलिथीन के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर कड़ी सजा की व्यवस्था वाले अध्यादेश को रविवार को मंजूरी दे दी. राजभवन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक राज्यपाल ने ’’उत्तर प्रदेश प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा कचरा (उपयोग और निस्तारण का विनियमन) (संशोधन) अध्यादेश, 2018’’ को मंजूरी दे दी है. इस सिलसिले में वर्ष 2000 में बने संबंधित कानून को इस अध्यादेश के जरिये संशोधित करते हुए और भी कठोर तथा प्रभावी बनाया गया है.



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इस अध्यादेश के जरिये कानून में किये जाने वाले संशोधन के तहत जैविक रूप से नष्ट नहीं होने वाले 50 माइक्रॉन से कम मोटाई के प्लास्टिक के थैले, पॉलिथीन, नायलॉन, पीबीसी, पॉलीप्रोपाइलिंग, पॉलीस्ट्रिन एवं थर्माकोल के प्रयोग तथा उनके पुनर्निमाण, बिक्री, वितरण, पैकेजिंग, भण्डारण, परिवहन, आयात एवं निर्यात आदि को भी चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधित एवं विनियमित किये जाने का प्रावधान किया गया है.



पहली बार पकड़े जाने पर ये है सजा





अध्यादेश में व्यवस्था की गयी है कि इस अधिनियम में उल्लिखित पाबंदियों का पहली बार उल्लंघन करने के दोषी व्यक्ति को एक माह तक की कैद या कम से कम एक हजार रूपये और अधिकतम दस हजार रूपये तक के जुर्माने की सजा होगी. दूसरी बार उल्लंघन करने पर छह माह की सजा या न्यूनतम पांच हजार और अधिकतम 20 हजार रूपये तक के जुर्माने की सजा दी जाएगी.
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