मुलायम के साथ देने के सवाल पर शिवपाल बोले, ‘कोई साथ दे या ना दे, फर्क नहीं पड़ता’

नई पार्टी बनाने के बाद रविवार को लखनऊ में ‘जनाक्रोश रैली’ करने जा रहे शिवपाल ने कहा ‘‘अब हमारे सामने देश और समाज के बहुत से मुद्दे हैं. उन्हीं मुद्दों के कारण हमने रविवार को जनाक्रोश रैली बुलायी है. हम जनता के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ेंगे.’’

भाषा
Updated: December 8, 2018, 11:48 PM IST
मुलायम के साथ देने के सवाल पर शिवपाल बोले, ‘कोई साथ दे या ना दे, फर्क नहीं पड़ता’
मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव (फाइल फोटो).
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Updated: December 8, 2018, 11:48 PM IST
अपने बड़े भाई और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (प्रसपा-लो) प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने शनिवार को कहा कि अब कोई उनका साथ दे या ना दे, फर्क नहीं पड़ता.

समाजवादी पार्टी (सपा) में ‘उपेक्षा‘ के कारण अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (प्रसपा-लो) का गठन करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व काबीना मंत्री शिवपाल सिंह यादव रविवार को लखनऊ में ‘जनाक्रोश रैली’ करके अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेंगे.

शिवपाल ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में सपा संस्थापक मुलायम के साथ देने से हिचकने के सवाल पर कहा, ‘कौन हमारे साथ है, कौन नहीं है, इसकी मुझे अब कोई चिंता नहीं है.’ इस सवाल पर कि वह हमेशा मुलायम का आशीर्वाद प्राप्त होने का दावा करते हैं, मगर क्या कारण है कि सपा संस्थापक उनकी बजाय अपने बेटे अखिलेश यादव के साथ दिखाई देते हैं, शिवपाल ने कहा, ‘मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं और मैं अब जानकारी करना भी नहीं चाहता.’

नई पार्टी बनाने के बाद रविवार को लखनऊ में ‘जनाक्रोश रैली’ करने जा रहे शिवपाल सिंह यादव ने कहा ‘‘अब हमारे सामने देश और समाज के बहुत से मुद्दे हैं. उन्हीं मुद्दों के कारण हमने रविवार को जनाक्रोश रैली बुलायी है. हम जनता के मुद्दों को लेकर आगे बढ़ेंगे.’’

उल्लेखनीय है कि शिवपाल ने मुलायम के सामने प्रसपा-लो का नेतृत्व करने की पेशकश रखी थी. वह मुलायम का आशीर्वाद प्राप्त होने का भी लगातार दावा करते रहे हैं. हालांकि ज्यादातर मौकों पर मुलायम अपने बेटे और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ ही नजर आते रहे हैं.

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नई पार्टी बनाने के बाद यह शिवपाल की पहली बड़ी रैली होगी. लोकसभा चुनाव की सरगर्मी शुरू होने के साथ हो रही इस रैली में शिवपाल न सिर्फ सपा में ‘उपेक्षा‘ के शिकार समाजवादी नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश करेंगे, बल्कि समान विचारधारा वाले दलों को भी अपने पाले में दिखाने का प्रयास करेंगे. कुल मिलाकर शिवपाल के लिए यह रैली किसी शक्ति परीक्षण की तरह होगी.

वर्ष 2016 में शिवपाल के संयोजकत्व में लखनऊ के ही रमाबाई रैली स्थल पर सपा की एक रैली में तीसरे मोर्चे के गठन की कोशिश की गई थी. माना जा रहा है कि सोमवार को होने वाली रैली में शिवपाल खुद को एक नेतृत्वकर्ता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करेंगे.
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