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अयोध्या विवाद: तीन जजों की स्पेशल बेंच 10 जनवरी को तय करेगी रोजाना सुनवाई होगी या नहीं

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की भूमि पर मालिकाना हक मामले से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई एक बार फिर टल गई है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक टाल दिया. अब इस मामले को तीन नए जज की स्पेशल बेंच सुनेगी. तीन जजों की बेंच ही यह तय करेगी कि मामले में रोजाना सुनवाई होगी की नहीं. इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई और जस्टिस एस के कौल की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था.

मात्र दो मिनट की सुनवाई में ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई और जस्टिस एस के कौल की पीठ ने तीन जजों की स्पेशल बेंच को गठित करने का निर्देश देते हुए मामले को 10 जनवरी तक टाल दिया. अब 6 से 7 जनवरी तक नए जजों की बेंच गठित हो जाएगी और फिर 10 जनवरी को वही तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई कैसे की जानी है.

करीब सात दशक पुराने बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि विवाद की अहम सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होनी थी. 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद : अगर रोजाना सुनवाई को भी तैयार हुआ सुप्रीम कोर्ट तब भी लगेंगे 8 महीने!

आज की सुनवाई में मुख्य अपीलों पर सुनवाई की तिथि और पीठ तय होने की उम्मीद थी. आज मामले से जुड़ी एक नई जनहित याचिका भी सुनवाई के लिए लगी थी, जिसमें अयोध्या मामले की अपीलों पर तय समय में सुनवाई की मांग की गई है.

राम मंदिर पर हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ आईं थी 14 अपील   


गौरतलब है कि सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ का गठन करने की संभावना है. चार दीवानी वादों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपील दायर हुई हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर बराबर बांटा जाए.

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शुक्रवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष रामजन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी थी. जिसमें से 13 हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पक्षकारों की वे अपीलें हैं जिन्हें कोर्ट विचारार्थ स्वीकार कर चुका है और अब उनकी मेरिट पर सुनवाई होनी है. एक याचिका शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की है. जिसने अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए हिन्दुओं का समर्थन किया है. 20वें नंबर पर हरिनाथ राम की एक नई जनहित याचिका लगी थी, जिसमें अयोध्या मसले से संबंधित सभी अपीलों पर तय समय में सुनवाई की मांग की गई है. साथ ही केस के स्थगन और कारण दर्ज करने के बारे में दिशा-निर्देश का भी आग्रह किया गया है.

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Tata Airbus: UP में टाटा एयरबस का लगेगा प्लांट, C-295 विमानों का होगा निर्माण

UP: उत्तर प्रदेश में टाटा समूह सी-295 व एयरबस विमानों का निर्माण करेगा. (File Photo)

UP News: टाटा समूह सी-295 व एयरबस विमानों का निर्माण करेगा. मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत सी-295 एयरबस विमानों का निर्माण किया जाना है. सैन्य परिवहन में इस्तेमाल होने वाले इन एयरबस को केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी है

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में मेक इन इंडिया (Make In India) के तहत बड़े निवेश की तैयारी है. दरअसल यहां टाटा एयरबस (Tata Airbus) का प्लांट लगेगा. जानकारी के अनुसार केंद्र से 22 हजार करोड़ रुपए की डील हो चुकी है. अब यूपी में टाटा समूह सैन्य विमानों का निर्माण करेगा. बता दें टाटा समूह देश की पहली निजी कंपनी होगी, जो मेक इन इंडिया के तहत सैन्य विमानों का निर्माण करेगी. टाटा समूह अब तक इन सैन्य विमानों को हैदराबाद या बेंगलुरु में तैयार करने की योजना बना रहा था. लेकिन अब टाटा समूह इस योजना के लिए उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का भी रुख कर रहा है.

जानकारी के अनुसार टाटा सी-295 व एयरबस विमानों का निर्माण करेगा.  मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत सी-295 एयरबस विमानों का निर्माण किया जाना है. सैन्य परिवहन में इस्तेमाल होने वाले इन एयरबस को केंद्र सरकार ने अनुमति दे दी है. इस परियोजना के तहत इंडियन एयर फोर्स को 56 एयरबस मिलेंगे.

बता दें केंद्र सरकार और टाटा समूह के साथ हुए करार के तहत स्पेन से 48 माह के अंदर 16 परिवहन विमान भारत आएगा. 60 दशक के बाद यह भारत का पहला यूरोपियन फर्म से रक्षा अनुबंध समझौता है. इसके बाद अगले 10 वर्षों में शेष 48 विमानों का निर्माण टाटा कंसोर्टियम कंपनी मेक इन इंडिया के तहत सैन्य विमानों का निर्माण करेगी. हालांकि केंद्र और टाटा ग्रुप में 6 साल पहले ही इस परियोजना पर सहमति बन गई थी.

टाटा द्वारा तैयार किए जा रहे सी-295 एक बहु भूमिका परिवहन वाला विमान होगा, जिसकी अधिकतम पे-लोड क्षमता 9.25 टन है. इस विमान की खासियत होगी कि यह छोटे रनवे वाले एयरपोर्ट पर भी आसानी से उतर व उड़ान भर सकता है. सभी 56 विमान स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट के साथ स्थापित किए जाएगा. यह परियोजना भारत में एयरो स्पेस पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देगी.

UP ATS ने 1 लाख के इनामी साइबर अपराधी अब्दुल रज्जाक को महाराष्ट्र से किया गिरफ्तार

UP: साइबर ठगी के मामले में यूपी पुलिस की एटीएस ने महाराष्ट्र से एक लाख के इनामी अब्दुल रज्जाक को गिरफ्तार किया है.

UP News: अब तक इस साइबर ठगी के मामले में 3 चीनी नागरिकों समेत इस गिरोह के 17 सदस्य गिरफ्तार हो चुके हैं. एटीएस द्वारा गिरफ्तारी के बाद अब्दुल रज्जाक मेमन को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है.

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लखनऊ. हजारों फर्जी सिम के माध्यम से भारत (India) और चीन (China) में बैठकर साइबर एवं आर्थिक अपराध करने वाले गिरोह का वांछित सदस्य और 1 लाख का इनामी अब्दुल रज्जाक अब्दुल नबी मेमन महाराष्ट्र (Maharashtra) के ठाणे से गिरफ्तार किया गया है. उत्तर प्रदेश की एटीएस (UP ATS) ने ठाणे से अब्दुल रज्जाक अब्दुल नबी मेमन को गिरफ्तार किया है. मेमन को साइबर आर्थिक अपराध मामले में गिरफ्तार किया गया है. हजारों फर्जी सिम कार्ड के जरिए ठगी का मामला है. पता चला है कि फर्जी आईडी पर प्री एक्टिवेटेड सिम से धोखाधड़ी की जा रही थी.

बता दें मामले में अब तक 3 चीनी नागरिकों समेत इस गिरोह के 17 सदस्य अब तक गिरफ्तार हो चुके हैं. एटीएस द्वारा गिरफ्तारी के बाद मेमन को ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाया जा रहा है. पुलिस के अनुसार आरोपी प्री एक्टिवेटेड सिम के जरिए ओटीपी प्राप्त करते थे और ऑनलाइन अकाउंट खोलते थे. फिर ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर अवैध रूप से धन मंगाते थे. प्री एक्टिवेटेड सिम कार्ड चीन भी भेजे गए थे. चीन और पड़ोसी देशों में बैठकर ये नेटवर्क चलाया जा रहा था.

अब्दुल रज्जाक अब्दुल नबी मेमन मुंब्रा के ठाकुरपाड़ा का रहने वाला है. पुलिस के अनुसार मेमन के खिलाफ जाली नोटों के रैकेट से जुड़े मामले में भारतीय दंड संहिता और आईटी कानून की संबंधित धाराओं के तहत लखनऊ में मामला दर्ज किया गया है. उत्तर प्रदेश एटीएस की लखनऊ इकाई ने मेमन को देश से भागने से रोकने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया था.

देखिए इस क्रिकेटर ने लखनऊ से तय किया अफ्रीका तक का सफर

क्रिकेटर अभिनव दीक्षित स्टेडियम में प्रैक्टिस करते हुए.

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहने वाले क्रिकेटर अभिनव दीक्षित का साउथ अफ्रीका में चैट्सवर्थ क्लब में मैच खेलने के लिए चयन हुआ है जो कि अपने आप में ही एक विशेष उपलब्धि है. यह मैच अक्टूबर के महीने में होगा और अभिनव लखनऊ से 10 को रवाना हो जायेंगे.

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हमारे देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है. अगर सही मंच मिले तो वह देश  नही बल्कि विदेश तक में परचम लहरा सकते हैं. जिसकी बानगी उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में देखने को मिली. उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहने वाले क्रिकेटर अभिनव दीक्षित का साउथ अफ्रीका में चैट्सवर्थ क्लब में मैच खेलने के लिए चयन हुआ है जो कि अपने आप में ही एक विशेष उपलब्धि है. यह मैच अक्टूबर के महीने में होगा और अभिनव लखनऊ से 10 को रवाना हो जायेंगे.


1998 से कि केडी बाबू स्टेडियम से शुरु किया सफर

अभिनव की मानें तो उन्होंने वर्ष 1998-1999 के दौरान लखनऊ के ही केडी सिंह बाबू स्टेडियम से उन्होंने अपने सफर की शुरुआत की थी. जिसके बाद उत्तर प्रदेश अंडर 15 के कप्तान की भूमिका निभाई थी. उसके बाद में अंडर 17, अंडर 19, अंडर 22, अंडर 25 टूर्नामेंट में भी खेल चुके हैं.

कुछ इस तरह का रणजी सफर

वर्ष 2015-16 में रणजी ट्रॉफी खेलने के लिए उत्तर प्रदेश की टीम में अभिनव दीक्षित को जगह मिली थी. उन्होंने 2014-15 के बीच वन सेअर्स में भाग लिया था. उन्होंने अपनी उपलब्धियों को निरंतर जारी रखा और उपलब्धियों की शिखर को छूते हुए उनको रेलवे की टीम में भी वर्ष 2018-2019 में चयनित किया गया. इतना ही नहीं 2018-19 के आयोजन में विजय हजारे ट्रॉफी में भी अपने कौशल से उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया. उन्होंने इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें 200 साल पुरानी विरासत में अब खेलने का अवसर मिल पाएगा. हालांकि उन्हें इस बात का मलाल है कि इंडियन टीम में खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाई. उनका कहना है कि भविष्य में और मेहनत करेंगे.

लखनऊ बुलेटिन : अब लखनऊ के 24 स्थलों पर मिलेगी फ्री वाई-फाई की सुविधा

लखनऊ के 24 स्थलों पर मिलेगी फ्री वाई-फाई की सुविधा

उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मेरठ, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृंदावन और फीरोजाबाद नगर निगम वाले शहरों के अलावा नगर पालिका परिषद वाले छोटे शहरों में भी मुफ्त वाई फाई की सुविधा उपलब्ध कराएगी.

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उत्तर प्रदेश सरकार अब यूपी की जनता को फ्री वाईफाई की सुविधा देने जा रही है.उन जगहों पर विशेष तौर पर वाई फाई की सुविधा होगी जहां लोग अधिक संख्या में आते हैं. सरकार ने इन जगहों पर फ्री इंटरनेट कनेक्शन देने के लिए सिक्का ब्रॉडबैंड से एक सितंबर को अनुंबध किया था, जिसे अब जल्द लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है. अक्टूबर के महीने में शुरू हो सकती है फ्री वाई-फाई की सुविधा.
उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ, कानपुर, आगरा, अलीगढ़, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, गोरखपुर, अयोध्या, मेरठ, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, मथुरा-वृंदावन और फीरोजाबाद नगर निगम वाले शहरों के अलावा नगर पालिका परिषद वाले छोटे शहरों में भी मुफ्त वाई फाई की सुविधा उपलब्ध कराएगी.

2. लखनऊ वासियों की सेहत को ध्यान में रखते हुए शहर के पार्कों में एलडीए लगाएगा हेल्थ एटीएम
एलडीए ने लखनऊ के 6 बड़े पार्कों में हेल्थ एटीएम लगाने की मंजूरी दे दी है. हेल्थ एटीएम पर लोग चेकअप के लिए बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले इसके लिए जांच शुल्क बेहद मामूली होगा. रिपोर्ट के अनुसार हेल्थ एटीएम संचालन के लिए स्वास्थ्यकर्मी भी तैनात किए जाएंगे.
गोमती नगर के लोहिया पार्क, गोमती नगर विस्तार के जनेश्वर मिश्र पार्क, गोमती रिवर फ्रंट, बेगम हजरत महल पार्क, इको गार्डन पार्क, अंबेडकर पार्क और लखनऊ विकास प्राधिकरण परिसर में हेल्थ एटीएम मशीनें लगाई जाएंगी.

3. लखनऊ में अशोक मार्ग से निशातगंज और महानगर को जोड़ने वाले दोनों पुलों की होगी मरम्मत. करीब 70 लाख रुपये का खर्च रखरखाव और जरूरी मरम्मत पर आएगा. पुल काफी पुराना है इस कारण इसे मरम्मत की जरूरत है. पुल के कई हिस्सों में दरारें पड़ चुकी है.जिसको ठीक करना बेहद जरूरी है. प्रमुख रूप से पुल के पिलर और वायडक्ट के बीच लगी बियरिंग्स को बदला जाना है. यह बियरिंग्स पुल को हैवी ट्रैफिक के समय सुरक्षित बनाती है. इसके अलावा दूसरी टूटफूट को भी ठीक किया जाएगा.

UP JEECUP Counselling 2021: आज जारी होगी तीसरे राउंड की सीट अलॉटमेंट लिस्ट, ऐसे करें चेक

JEECUP 3rd Allotment list 2021: इस वर्ष 1.7 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की है

UP JEECUP Counselling 2021 की शुरुआत 14 सितंबर, 2021 को हुई थी. जिसके लिए तीसरे राउंड की सीट आवंटन की सूची आज यानी 23 सितंबर, 2021 को जारी की जाएगी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 23, 2021, 10:22 IST
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नई दिल्ली. UP JEECUP Round 3 Seat Allotment List: विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश संयुक्त प्रवेश परीक्षा पॉलिटेक्निक की काउंसलिंग (UP JEECUP Counselling 2021) 14 सितंबर, 2021 को शुरू हुई. जिसके लिए तीसरे राउंड की सीट आवंटन की सूची आज यानी 23 सितंबर, 2021 को जारी की जाएगी. हांलाकि लिस्ट जारी होने के समय की घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन ये बात तय है कि लिस्ट आज ही जारी की जाएगी. बता दें कि UP JEECUP Counselling 2021 के उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट- jeecup.nic.in पर लिस्ट देख सकेंगें.

पूरी प्रवेश प्रक्रिया का यह दूसरा चरण है. UP JEECUP Counselling 2021 के तहत सीट आवंटन का पहला और दूसरा राउंड पहले ही जारी किया जा चुका है. जिसके लिए उम्मीदवारों ने अपनी सीट भी कन्फर्म कर ली है. बता दें कि इस वर्ष 1.7 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की है. तीसरे राउंड की सीट आवंटन की सूची जारी होने के बाद उसे कैसे चेक करें, इसकी आसान प्रक्रिया नीचे दी जा रही है.

JEECUP 3rd Allotment list 2021: लिस्ट कैसे चेक करें
-लिस्ट चेक करने के लिए उम्मीदवार उत्तर प्रदेश संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट jeecup.nic.in पर जाएं.
-लिस्ट जारी होने के बाद होमपेज पर उपलब्ध ‘UP JEECUP Round 3 Seat Allotment List’ पर क्लिक करें
-एक नया पेज खुलेगा जहां अपने क्रेडेंशियल दर्ज करें
-अपना रोल नंबर, पासवर्ड दर्ज करें और लॉग इन करें.
-अब स्क्रीन पर तीसरे राउंड की सीट आवंटन सूची आ जाएगी.
-इसे डाउनलोड करें और जांचें.

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Mahant Narendra Giri Suicide: योगी सरकार ने की नरेंद्र गिरि मौत मामले में CBI जांच की सिफारिश

उत्तर प्रदेश सरकार ने अब महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

Mahant Narendra Giri Death: उत्तर प्रदेश के गृह मंत्रालय ने केंद्र सरकार को केंद्रीय जांच एजेंसी से मामले की पड़ताल करने को लेकर की सिफारिश, बुधवार को ही आई थी कि नरेंद्र गिरि की पोस्टमार्टम रिपोर्ट.

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लखनऊ. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्‍थी सुलझाने के लिए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. उत्तर प्रदेश सरकार के गृह विभाग ने मामले की जांच के लिए केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाना चाहती है और निष्पक्ष जांच को देखते हुए सीबीआई जांच की सिफारिश की है.

गौरतलब है कि नरेंद्र गिरी की मौत के मामले में लगातार सवाल उठ रहे थे और कई राजनेताओं से लेकर संत समाज से जुड़े लोग भी इसे आत्महत्या का मामला मानने से इनकार कर रहे थे. साथ ही इस पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग कर रहे थे.

तीन आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार
नरेंद्र गिरि मौत के मामले में पुलिस ने अभी तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. नरेंद्र गिरि के मिले सुसाइड नोट में आनंद गिरि, आद्या तिवारी और उसके बेटे संदीप तिवारी को मौत का जिम्मेदार बताया गया था. सुसाइड नोट में लिखा गया था कि ये तीनों ब्लैकमेल कर रहे हैं और मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं. नरेंद्र गिरि ने तीनों को अपनी मौत का जिम्मेदार सुसाइड लैटर में बताया था जिसके आधार पर यूपी पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था.

नहीं मिले चोट के निशान
वहीं सीजेएम कोर्ट में पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं उनकी मौत दम घुटने के कारण ही हुई है. रिपोर्ट में हैंगिंग की बात भी आई है. उनके गले पर वी शेप का निशान पाया गया है जो फंदा लगाने के कारण ही आता है. ऐसे में पुलिस कुछ हद तक स्पष्ट है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है और उनकी मौत फंदे से लटकने के कारण ही हुई है.

समय भी चला पता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि की मौत दोपहर में 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई है. इससे स्पष्ट है कि खाना खाने के बाद आराम करने गए नरेंद्र गिरि ने पहले वीडियो बनाया और उसके बाद सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली. काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उनके शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो गिरि पंखे में रस्सी डालकर फंदे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया. लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

Mahant Narendra Suicide: मरने से पहले महंत गिरि ने बनाया था Video, लिया था आनंद, आद्या और संदीप का नाम

महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में पुलिस अब तक तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है.

Mahahnt Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरी ने फंदा लगाने से पहले अपने मोबाइल में एक वीडियो भी बनाया था. इस वीडियो में उन्होंने आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी का नाम लिया था. उन्होंने कहा कि इन्होंने मुझे आत्महत्या करने पर मजबूर कर दिया.

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प्रयागराज. महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में बुधवार को बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में महंत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ ही उनके मोबाइल में मिले एक वीडियो के बारे में भी जानकारी दी. पुलिस ने बताया कि नरेंद्र गिरि ने मरने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था और इस वीडियो में उन्होंने तीनों आरोपियों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी का नाम लिया था. उन्होंने वीडियो में कहा था कि इन लोगों ने मुझे आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया.
पुलिस सूत्रों के अनुसार अब उस मोबाइल को सील कर दिया गया है और वीडियो पुलिस के पास सुरक्षित है क्योंकि वो एक अहम सबूत है.

नहीं मिले चोट के निशान
वहीं सीजेएम कोर्ट में पेश की गई पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं उनकी मौत दम घुटने के कारण ही हुई है. रिपोर्ट में हैंगिंग की बात भी आई है. उनके गले पर वी शेप का निशान पाया गया है जो फंदा लगाने के कारण ही आता है. ऐसे में पुलिस कुछ हद तक स्पष्ट है कि नरेंद्र गिरि ने आत्महत्या की है और उनकी मौत फंदे से लटकने के कारण ही हुई है.

समय भी चला पता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नरेंद्र गिरि की मौत दोपहर में 3 से साढ़े तीन बजे के बीच हुई है. इससे स्पष्ट है कि खाना खाने के बाद आराम करने गए नरेंद्र गिरि ने पहले वीडियो बनाया और उसके बाद सुसाइड नोट लिख कर आत्महत्या कर ली. काफी देर तक जब वे बाहर नहीं आए तो उनके शिष्यों ने दरवाजा तोड़कर देखा तो गिरि पंखे में रस्सी डालकर फंदे से लटके हुए थे. इसके बाद पुलिस को सूचित किया गया. लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.

संदीप तिवारी गिरफ्तार
वहीं बुधवार को ही यूपी पुलिस ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने मामले के तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गिरफ्तार कर लिया है. संदीप लेटे हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी का बेटा है. गौरतलब है कि पुलिस ने मामले में आनंद गिरि और आद्या तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी आनंद गिरी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. उत्तर प्रदेश पुलिस ने आनंद गिरि को कोर्ट में पेश किया था जिसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया.

शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात: क्या अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच खत्म होंगी दूरियां ?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिये जोड़तोड़ की कोशिशों के बीच AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के लिये दुविधा के हालात हो गये हैं.

ओवैसी ने मंगलवार रात शिवपाल यादव के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और करीब एक घंटे तक दोनो नेताओ के बीच बातचीत हुयी. इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव ने फरवरी के महीने में आजमगढ़ के विवाह समारोह में मुलाकात की थी. ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी ने भी लखनऊ के एक होटल में डेढ़ घंटे तक मुलाकात कर चुके हैं

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उत्तर प्रदेश में सियासी जोड-तोड के बीच प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल यादव और एआईआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Owaisi) के बीच मुलाकात के कई मायने हैं. क्या सब वैसा ही है जैसा दिख रहा है, या किसी बडे प्लान के तहत ये दोनो नेता साथ बैठे थे. क्योंकिी  ओवैसी की शिवपाल (Shivpal Yadav) से मुलाकात सूबे के चुनाव पूर्व कई समीकरणो को गडबड कर सकती है. वजह साफ है, पहली बार यूपी मे इस बडे स्तर पर चुनाव लड रहे ओवैसी भले ही बीजेपी से लिये नुकसानदेय साबित ना हो, लेकिन उनकी मौजूदगी विपक्ष के लिये कई विधानसभा सीटो पर मुश्किल खडी कर सकती है. हांलाकि इससे पहले भी ओवैसी की पार्टी यूपी मे साल 2017 में चुनाव लड चुकी है.

हालांकि मंगलवार रात हुयी इस मुलाकात के बारे मे  शिवपाल यादव ने साफ किया कि ये बस शिष्टाचार की मुलाकात थी, लेकिन सब जानते है कि चंद दिनो बाद चुनाव देखने जा रहे इस सूबे के लिये किसी भी नेता से से किसी भी बडे नेता की मुलाकात बेमकसद नही है.

क्या हैं ओवैसी और शिवपाल की शिष्टाचार मुलाकात के मायने

ओवैसी ने मंगलवार रात शिवपाल यादव के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और करीब एक घंटे तक दोनो नेताओ के बीच बातचीत हुयी. इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव ने फरवरी के महीने में आजमगढ़ के विवाह समारोह में मुलाकात की थी. ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी ने भी लखनऊ के एक होटल में डेढ़ घंटे तक मुलाकात कर चुके हैं

सोहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पहले ही भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाने की बात कह चुके हैं जिसमे शिवपाल यादव के भी शामिल होने की बात कही जा रही है. अगर इसे अमली जामा पहनाया जा सका तो ये मोर्चा हर राजनीतिक पार्टी के लिये नुकसानदेय होगा, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर समाजवादी पार्टी पर पडेगा क्योंकि इस मोर्चे के घटक दल समाजवादी पार्टी के पारंम्परिक वोटो पर सबसे ज्यादा सेंध लगायेगे. नतीजा ये होगा कि कई जगहो पर सपा ना सिर्फ छोटे मार्जिन से जीतने से चूकेगी बल्कि कई पिछडा और मुस्लिम बहुल इलाकों की कई सीटे ऐसी भी होंगी जहां पर आसान लगते हुये भी जीत पक्की करना मुश्किल होगा.

उलझन मे हैं शिवपाल, निगाहें अभी टिकी हैं अखिलेश यादव पर

बहरहाल शिवपाल यादव के इस मोर्चे मे शामिल होने और असदुद्दीन ओवैसी के साथ जाने में अभी  संशय है, क्योंकि मुलाकातों औऱ बैठकों से इतर माना यह भी जा रहा है कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ दूरियां मिटाकर साथ में मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. इस मामले में शिवपाल यादव की तरफ से हर तरह की कोशिश भी की जा रही है. बांलाकि इसके भी अभी तक कोई सार्थक परिणाम नही आये हैं. ऐसे में चुनाव से पहले शिवपाल यादव अन्य छोटे दलों के साथ हाथ मिलाकर भागीदारी मोर्चे को बडा करने की तैयारी मे दिखते हैं. मंगलवार को शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात इसी कोशिश की तरफ बढा हुआ एक कदम हो सकती है,पर इन दिखती हुयी कोशिशों के बीच सूच्र बताते हैं कि शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी के बीच में भी अभी समझौते की पूरी गुंजाइश है.

समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के समझौते के सियासी नतीजे

जानकारी के मुताबिक शिवपाल यादव को अगर समाजवादी पार्टी की तरफ से मौका मिलता है तो दोनो पार्टियां मिलकर चुनाव लड सकती हैं. माना ये भी जा रहा है कि अगर अखिलेश की तरफ से मजबूत वायदा मिलता है तो शिवपाल यादव अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय भी कर सकते हैं, पर इसकी उम्मीद कम दिखती है. क्योंकि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि समाजवादी पार्टी का विलय के लिये आगे बढना और प्रसपा के पदाधिकारियों को उचित स्थान दे पाना संभव नही होगा. ऐसे में अगर दोनों पार्टियों के बीच में सीटों पर समझौता होना ही आखिरी विकल्प है. ऐसे में समाजवादी पार्टी शिवपाल यादव को उनकी मजबूत जगहों पर कुछ सीटे दे सकती है, और शिवपाल यादव के चुने हुए कैंडिडेट समाजवादी पार्टी के साइकिल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो इसके कई फायदे हो सकते हैं. सबसे बड़ा फायदा तो ये कि जिन जगहों पर समाजवादी पार्टी थोड़ी कमजोर है और शिवपाल यादव का वर्चस्व ज्यादा है वहां पर सीटें जीतने की संभावना बढ़ जाएगी. दूसरा फायदा ये कि आपस मे मिल जाने की वजह से शिवपाल यादव की तरफ से समाजवादी पार्टी को होने वाला संभावित नुकसान भी टल जाएगा और इसके अलावा समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की वजह से भविष्य में किसी भी तरीके का विश्वासघात होने की भी संभावना खत्म हो जाएगी.

भागीदारी मोर्चे की रणनीति

बहरहाल अभी दोनों नेताओं के बीच में सिर्फ शुरुआती स्तर की बात भी सिर्फ फोन पर ही हुई है जिसका जिक्र अखिलेश यादव कर चुके हैं. हांलकि शिवपाल यादव कई बार कह चुके है कि अखिलेश उन्हे मिलने का वक्त नही दे रहे है. शिवपाल यादव का मानना यह है कि इस मामले में जब तक अखिलेश यादव आमने-सामने बैठकर साफ तौर पर बातचीत नहीं करेंगे तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है. अब जबकि सितंबर का महीना भी खत्म होने वाला है और अभी तक दोनों नेताओं में कोई औपचारिक या अनौपचारिक मुलाकात तक नहीं हुई हैं, इसे भांपते हुये छोटे दलों की तरफ से शिवपाल यादव को लगातार संपर्क किया जा रहा है, जिससे उनके सामने भी आखिरी फैसला लेने की समस्या है. असदुद्दीन ओवैसी की शिवपाल से मुलाकात भी इसी का नतीजा है. इसके अलावा चंद्रशेखर रावण की अगुवाई वाली भीम आर्मी पार्टी भी सुभाषपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात कर चुकी है और उसने साफ किया है कि वह भागीदारी संकल्प मोर्चे का हिस्सा होंगी. दोनों नेताओं की बातचीत में साथ आने पर सहमति भी बन गई है और आने वाले 27 अक्टूबर से मऊ जिले से मोर्चे की साझा बैठके और कार्यक्रम भी शुरू होंगे. 27 अक्टूबर को मऊ में एक बड़ा सम्मेलन करने का प्लान किया जा रहा है जिसमें मोर्चे के सभी घटक दल शामिल होंगे. उससे पहले जितने भी लोग इस मोर्चे में शामिल होना चाह रहे हैं उन सब के बीच बातचीत का दौर जारी है. ऐसे में शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात इस मायने से भी खास है कि अगर शिवपाल और ओवैसी एक साथ आते हैं तो उनकी अखिलेश यादव से समझौते की संभावना खत्म हो जाएगी.

क्या हो सकता है समझौते का फ़ॉर्मूला
ऐसा माने जाने की वजह भी साफ है. एक तो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी यह नहीं चाहती कि किसी भी मोर्चे को अपनी पार्टी में शामिल किया जाए औऱ ये भी है कि पार्टी किसी भी ऐसे दल से समझौता नही करना चाहती जो उनके ही वोटों मे सेंध लगा दे, बल्कि समाजवादी पार्टी का इरादा है कि वह छोटे-छोटे दलों के साथ समझौता करके उनकी ताकत के हिसाब से उनको कुछ सीटें दें, जिससे कि जहां पर सपा का पलडा कमजोर है वहां पर छोटी पार्टी के नेता अपनी सीट जिता सकें. इस कड़ी में वह शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा को भी गिनते हैं. पर मुद्दा ये भी है कि शिवपाल यादव और ओवैसी के साथ जाने की अटकले अगर सही निकली तो समाजवादी पार्टी के लिए ओवैसी और प्रसपा दोनो कई जगहों से वोट काटने वाले दल की तरह ही होंगे.

बात ये भी है कि सामने से दिखनेवाली राजनीति से इतर एक कारगर रास्ता ये ही हो सकता है कि पारिवारिक मतभेद भुलाकर अखिलेश यादव, शिवपाल यादव के साथ मिलकर चुनाव लडें और उनकी क्षमता के हिसाब से उन्हे सीटे देकर अपने पास ज्यादा सीटे लाने के रास्ते को मजबूत करें. इसके अलावा बाकी मोर्टे के लोगो को अपने तरीके से संगठित होकर चुनाव लडनें दे, जिससे कि अपने क्षेत्र, जाति और व्यक्तिगत समीकरण के लिहाज से कुछ सीटे ला सके. ताकि चुनाव बाद के नतीजे अगर किसी उम्मीद को पूरा करते हुये दिखे तो बाकी लोगों से मदद ली जा सके.

सपा नेता सुनील सजन का बड़ा आरोप- आतंकी है विकास दुबे, बीजेपी नेताओं के घर में ही है छिपा

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है.

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है.

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लखनऊ. कानपुर (Kanpur) के विकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों के शहादत मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने सोमवार को योगी सरकार (Yogi Government) पर बड़ा हमला बोला. समाजवादी पार्टी ने सरकार पर फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikas Dubey) को संरक्षण देने का आरोप लगाया. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि विकास दुबे बीजेपी नेताओं के घर में ही छिपा है. पुलिस बीजेपी नेताओं के घर की तलाशी ले.

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है. उसके असली अक सरकार में ही हैं. सरकार विकास दुबे का कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड सार्वजानिक करे. सब कुछ साफ हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि जिले के टॉप अपराधियों की लिस्ट में विकास दुबे का नाम ही न हो. ऐसा सिर्फ सरकार में बैठे उनके आकाओं की शह पर ही हो सकता है. असली बादशाह तो सरकार में है, जिसका संरक्षण विकास दुबे को था. सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे बीजेपी नेताओं के घर में ही छिपा है. पुलिस सभी की तलाशी ले.

पत्नी ऋचा भी बेटे संग फरार

गौरतलब है कि 72 घंटे से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी विकास दुबे का पता पुलिस नहीं लगा सकी है. विकास दुबे के साथ ही उसकी पत्नी ऋचा भी दो जुलाई की रात से छोटे बेटे के साथ फरार है. उधर पुलिस ने विकास दुबे पर इनाम की राशि बढ़ाकर ढाई लाख कर दिया है. 40 थानों की पुलिस फाॅर्स के साथ ही क्राइम ब्रांच व एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी है.

(इनपुट: अलाउद्दीन)

UPPSC Admit Card : स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, इन पांच शहरों में होगी परीक्षा

UPPSC Admit Card : स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा 31 अक्टूबर को होनी है.

UPPSC Admit Card : यूपीपीएससी स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा प्रदेश के पांच शहरों में होगी. इस भर्ती के लिए आवेदन 16 जुलाई से तीन सितंबर तक हुआ था.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:39 IST
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नई दिल्ली. UPPSC Staff nurse Exam : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने स्टाफ नर्स/सिस्टर ग्रेड-2 परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. स्टाफ नर्स भर्ती के लिए परीक्षा तीन अक्टूबर 2021 को होनी है. स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थी यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in से अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि एंटर करके लॉग इन करना होगा.

यूपीपीएससी स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा 31 अक्टूबर को प्रदेश के पांच शहरों में आयोजित की जाएगी. ये शहर हैं- गाजियाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ और मेरठ. परीक्षा का समय सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे का है. परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थियों को अपने साथ एडमिट कार्ड के साथ ओरिजिनल आईडी प्रूफ और उसकी फोटो कॉपी लेकर जाना है.

ऐसे डाउनलोड करें स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड

– सबसे पहले यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं
– इसके बाद होम पेज पर ‘Admit Card :- CLICK HERE TO DOWNLOAD ADMIT CARD FOR ADVT. NO. A-4/E-1/2021, STAFF NURSE /SISTER GRADE-2 (MALE/FEMALE) EXAM-2021’ मिलेगा
– इस लिंक पर क्लिक करें
– यहां नए पेज पर अपने लॉग इन क्रेडेंशियल एंटर करें
– अब एडमिट कार्ड डाउनलोड करके प्रिंट कर लें

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भारत का सबसे बड़ा अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट चला रहा था मौलाना कलीम सिद्दीकी: ADG

UP: अवैध धर्मांतरण मामले में मेरठ से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना कलीम सिद्दीकी गिरफ्तार

UP News: यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट के खाते में एकमुश्त 1.5 करोड़ रूपये बहरीन देश से भेजे गये हैं. कुल 3 करोड़ रूपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं.

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लखनऊ. बीते दिनों उत्तर प्रदेश में एक बड़े स्तर पर अवैध धर्मांतरण (Illegal Religious Conversion) कराने वाले गिरोह के सरगना के साथ 10 लोगों को गिरफ्तार कर एक बडे़ सिंडिकेट का खुलासा किया था. इसी क्रम में मंगलवार रात मेरठ से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना कलीम सिद्दीकी (Maulana Kaleem Siddiqui) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. यूपी एटीएस के अनुसार मौलाना कलीम विदेशों से मिल रही फंडिंग के आधार पर पूरे देश में संगठित ढंग से गैर मुस्लिमों को गुमराह कर रहा था. उन्हें डराकर भारत का सबसे बड़ा अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट चला रहा था. राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने इसकी जानकारी दी है.

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार के मुताबिक बीते 20 जून को यूपी एटीएस ने धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड उमर गौतम समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था. उमर गौतम और उसके साथियों को ब्रिटेन के ट्रस्ट से करीब 57 करोड़ रूपये की फंडिंग की गई थी. खर्च का ब्यौरा इन आरोपियों द्वारा नहीं दिया जा सका है. इस दौरान इस मामले में दिल्ली में रहने वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी का भी नाम आया था. जोकि मूलत: यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के फुलत के रहने वाले हैं.

एडीजी ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी भी देश में एक बडे़ स्तर पर अवैध धर्मांतरण के कार्य में संलिप्त है. विदेशों से मिल रही फडिंग के आधार पर पूरे देश में एक संगठित ढंग से गैर मुस्लिमों को गुमराह कर और डराकर भारत के सबसे बड़े अवैध धर्मांतरण का सिंडिकेट चला रहे हैं. यूपी एटीएस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी को भी मेरठ से गिरफ्तार किया और उन्हें कोर्ट में पेश कर उनकी रिमांड के लिये कोर्ट में अर्जी भी दाखिल कर दी गई है.

एडीजी, कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने आगे बताया, “मौलाना कलीम सिद्दीकी जामिया इमाम वलीउल्ला नाम का एक ट्रस्ट चलाता है. जिसके जरिये सामाजिक सौहार्द के कार्यक्रमों की आड़ में विभिन्न प्रकार का लालच देकर अवैध धर्मांतरण का सिडिंकेट चला रहा है. मौलाना कलीम के ट्रस्ट में हवाला और विदेशों से होने वाली फंडिग के जरिये तमाम मदरसों को भी फंडिग की जाती है.”

उन्होंने आगे कहा कि फिर इन मदरसों में मौलाना कलीम पैगामे इंसानियत के संदेश देने के बहाने जन्नत और जहन्नुम जैसी बातों का लालच और भय दिखाकर इस्लाम स्वीकार करने के लिये प्रेरित करता है. जिसके बाद इन लोगो को प्रशिक्षित कर अन्य लोगों को धर्मांतरण के लिये प्रेरित करता है. मौलाना कलीम इस दौरान खुद के लिखे हुए साहित्य और दावा (धर्मांतरण के आमंत्रण) निशुल्क मुहैय्या कराता है.

इस दौरान मौलाना कलीम लोगों के बीच में इस बात का दावा करता है कि सिर्फ शरियत के अनुसार बनी व्यवस्था ही न्याय दे सकती है इसलिये तीन तलाक जैसे मामले भी शरियत के कानून के तहत ही निपटाये जाने चाहिए.

प्रशांत कुमार ने बताया कि यूपी एटीएस द्वारा बीते जून में धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार किये गये उमर गौतम से जुडे़ अल-हसन एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट में जिन संगठनों ने फडिंग की थी. उन्हीं के जरिये मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट जामिया ईमाम वलीउल्ला को भी अनियमित रूप से भारी मात्रा में फंडिंग की गई है. अभी तक की जांच में मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट के खाते में एकमुश्त 1.5 करोड़ रूपये बहरीन देश से भेजे गये हैं. अब तक कुल 3 करोड़ रूपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं.

इतना ही नहीं इस दौरान उमर गौतम ने जिनका धर्मांतरण कराया है, उनके तार मौलाना कलीम सिद्दीकी से भी जुडे़ पाये गये हैं.

उन्होंने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी ने मेरठ कालेज से बीएससी की है. पीएमटी की भी परीक्षा पास की थी. लेकिन इस बीच इस्लामी साहित्यकारों और संस्थान से जुडे़ लोगों से प्रभावित होकर MBBS करने के बजाय दारूल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ से शिक्षा हासिल की है.

UP Assembly Election 2022: मिले ओवैसी और शिवपाल, किसका होगा बेड़ा पार

यूपी की सियासत में अहम है ओवैसी और शिवपाल की मुलाकात. फाइल फोटो

Uttar Pradesh Politics: असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव के बीच एक बार फिर मुलाकात हुई है. ये मुलाकात उत्तर प्रदेश की सियासत में खास अहमियत रखती है. दोनों के बीच गठबंधन की अटकलें चल रही हैं. हालांकि शिवपाल इस पर चुप हैं तो वहीं ओवैसी शिवपाल यादव को बड़ा नेता बता रहे हैं.

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लखनऊ. इन दिनों होने वाली हर सियासी मुलाकातों के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं. हो भी क्यों न. विधानसभा के अहम चुनाव जो होने जा रहे हैं. ऐसी ही एक मुलाकात फिर से असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) के बीच हुई. इसके बाद दोनों के बीच गठबंधन की अटकलें शुरू हो गईं, हालांकि मुलाकात के बाद शिवपाल ने तो कुछ नहीं बोला लेकिन, ओवैसी ने कहा कि शिवपाल यादव बड़े नेता हैं. ये उनकी कोई पहली मुलाकात नहीं थी. अब समझना ये है कि क्या दोनों के बीच गठबंधन हो पाएगा. सवाल ये भी है कि यदि गठबंधन होता है तो किसे फायदा होगा और किसे नुकसान और गठबंधन नहीं होता है तो क्या स्थिति बनेगी.

इसे समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि ओवैसी और शिवपाल की यूपी चुनाव में क्या ताकत है. इसे पिछले इलेक्शन के आंकड़ों से समझा जा सकता है. ओवैसी की पार्टी 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है. ज्यादातर लोग ये जानते हैं कि 38 में से 37 सीटों पर उसके उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन कई सीटों पर AIMIM ने तगड़ी ताकत दिखायी थी. कांठ में 23 हजार, ठाकुरद्वारा में 9 हजार, कुंदरकी में 7 हजार, संभल में 59 हजार, फिरोजाबाद में 11 हजार और मेहंदावल में 19 हजार वोट AIMIM कैण़्डिडेट को मिले थे. नई पार्टी के लिए ये उत्साहजनक नतीजे थे. इसीलिए ओवैसी इस बार पूरी ताकत लगा रहे हैं.

अब शिवपाल की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की बात कर लें. 2019 में पार्टी ने पहला चुनाव लड़ा. 2017 में AIMIM की ही तरह PSPL को 2019 में एक भी सीट नहीं मिली लेकिन, शिवपाल यादव की ताकत का पता जरूर चला. फिरोजाबाद, मोहनलालगंज, फर्रूखाबाद, सुल्तानपुर और इटावा में पार्टी को लगभग 10000 वोट मिले. फिरोजाबाद में तो शिवपाल ने 91 हजार वोट बटोरे और सपा प्रत्याशी को हरवा दिया. हालांकि फिरोजाबाद सीट के अलावा कोई दूसरी सीट ऐसी नहीं थी, जहां शिवपाल की पार्टी की वजह से सपा-बसपा गठबंधन का प्रत्याशी हारा हो, जैसा कि कहा जाता रहा है.

ये आम समझ है कि ओवैसी और शिवपाल को जो वोट मिले, वो भाजपा के कभी नहीं थे. AIMIM और PSPL को मिलने वाले वोट भाजपा विरोधी खेमे के ही वोट माने जाते हैं. यानि भाजपा विरोधी वोटों में ही दोनों ने सेंधमारी करके अपने लिए वोट जुटाए. अब दोनों साथ चुनाव लड़ेंगे तो इसके क्या नतीजे होंगे.

शिवपाल और ओवैसी के साथ-साथ लड़ने से क्या होगा

इसे काफी आसानी से समझा जा सकता है. शिवपाल को मिलने वाला वोट उन सपाइयों का है जो अखिलेश से नाराज हैं. यही गणित ओवैसी के साथ भी है. यानि सपा विरोधी वोट ही दोनों को मिलेंगे. कुल मिलाकर दोनों पार्टियों के चुनाव लड़ने से सपा का ही घाटा है, लेकिन इसके कुछ पहलू और भी हैं. साथ चुनाव लड़ने से अखिलेश यादव का चाहे जो घाटा या फायदा हो लेकिन, इन दोनों पार्टियों को भी अलग-अलग नुकसान उठाना पड़ सकता है. कैसे, इसे समझना जरूरी है.

यदि दोनों पार्टियां गठबंधन में लड़ती हैं तो कुछ सीटों पर AIMIM लड़ेगी और कुछ सीटों पर PSPL. अब AIMIM के साथ लड़ने के बाद ये जरूरी नहीं कि शिवपाल यादव का वोटर उनके साथ जुड़ा रहे. AIMIM की छवि कट्टर मुस्लिम पार्टी की है. ऐसे में शिवपाल यादव के साथ बड़ा रिस्क खड़ा हो जाएगा. इसकी आशंका प्रबल है कि उनका हिन्दू वोटर ध्रुवीकरण के कारण शिवपाल को छोड़कर भाजपा में चला जाए. भाजपा से भी नाराज हुआ तो किसी और पार्टी में लेकिन, शिवपाल का साथ छोड़ सकता है.

इस गठबंधन से रिस्क ओवैसी को भी है. ओवैसी का वोटर उन्हें तो जिताना चाहता है, लेकिन उनकी गैरहाजिरी में वो अखिलेश यादव की तरफ झुका रहेगा. गठबंधन के चलते जिस सीट पर ओवैसी का प्रत्याशी नहीं उतरेगा उस सीट पर ओवैसी का वोटर शिवपाल की जगह अखिलेश को तवज्जो देगा. मतलब ये है कि AIMIM और PSPL को एक दूसरे के वोट ट्रांसफर होते दिखाई नहीं दे रहे हैं.

अब अखिलेश यादव और भाजपा पर क्या पड़ेगा फर्क

शिवपाल और ओवैसी दोनों अखिलेश के घर में ही सेंधमारी करते रहे हैं या करेंगे. ऐसे में दोनों गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे तो इससे अखिलेश यादव को कुछ फायदा हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि गठबंधन के बावजूद दोनों ज्यादा वोट नहीं खींच पाएंगे. लिहाजा अखिलेश के वोट बंटने से बच जाएंगे. ऐसा होने पर भाजपा को उतना फायदा नहीं होगा जितने की उसे अपेक्षा होगी.

अखिलेश यादव को नुकसान तब हो सकता है जब AIMIM और PSPL अलग-अलग चुनाव लड़े. ओवैसी और शिवपाल दोनों अलग-अलग अखिलेश के परम्परागत वोटरों में सेंधमारी करेंगे. अखिलेश यादव के लिए ये ज्यादा बड़ी चोट होगी. इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा.  इस गणित को शिवपाल यादव बेहतर ढंग से समझ रहे होंगे. इसीलिए ओवैसी के बार-बार मिलने के बावजूद शिवपाल लगातार गठबंधन पर बोलने से परहेज करते रहे हैं.

(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

लखनऊ:छोटी सी उम्र में रिकॉर्ड के फलक पर 11 साल के व्योम ने  लहराया परचम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने वाद्य यंत्र बजाते होनहार व्योम

व्योम लखनऊ के निराला नगर के निवासी है और सी.एम.इस के छात्र है. 11 साल के व्योम ने संगीत, खेल और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में 35 रिकॉर्ड हासिल किए हैं. साथ ही प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021 से भी किया गया है सम्मानित.

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आज के ज्यादातर बच्चें जहां ऑनलाइन की दुनिया में व्यस्त रहते है तो वही लखनऊ के रहने वाले होनहार व्योम आहूजा ने छोटी सी उम्र में वह हासिल कर लिया है जो बड़े-बड़े धुरंधर पूरे जीवन में हासिल नहीं कर पाते. व्योम लखनऊ के निराला नगर के निवासी है और सी.एम.इस के छात्र है. 11 साल के व्योम ने संगीत, खेल और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में 35 रिकॉर्ड हासिल किए हैं. साथ ही प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021 से भी किया गया है सम्मानित.
व्योम 12 तरह के वाद्य यंत्र बजाना भी जानते है. खेल में भी खास रूचि है. व्योम नाट्य काला में भी रूचि रखते है और कई नुक्कड़ नाटक भी कर चुके है साथ ही अलग अलग शहरों में परफॉरमेंस के लिए भी बुलाया जाता है.

ढेरो इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स पर लहराया अपना परचम.
लोकल18 से खास बातचीत में व्योम ने अपनी कहानी बताई है.
व्योम को चेस में भी एशिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स हासिल किया है.अब वह अपना अपना एक बोर्ड गेम भी लॉन्च करने वाले है जो की महाभारत से प्रेरित होगा.

Meerut: अवैध धर्मांतरण के आरोप में ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना Kaleem Siddiqui गिरफ्तार

मेरठ से गिरफ्तार हुए मौलाना कलीम सिद्दीकी

Forceful Conversion in UP: गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब मौलाना कलीम सिद्दीकी मंगलवार शाम सात बजे अन्य मौलानाओं के साथ मेरठ के लिसाड़ीगेट में हूमायुंनगर की मस्जिद माशाउल्लाह के इमाम शारिक के आवास पर एक कार्यक्रम में आए थे.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 14:25 IST
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लखनऊ/मेरठ. अवैध धर्मांतरण (Illegal Religious Conversion) के मामले में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने मेरठ (Meerut) से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष कलीम सिद्दीकी (Kaleem Siddiqui) को गिरफ्तार किया है. कलीम सिद्दीकी उम्र गौतम का करीबी बताया जा रहा है. मौलाना कलीम जमीयत-ए- वलीउल्लाह का अध्यक्ष भी है. जानकारी के मुताबिक मौलाना कलीम को हवाला के जरिए विदेशों से फंडिंग की जाती थी. यूपी एटीएस लंबे समय से उस पर नजर रखे हुए थी

मौलाना कलीम पर आरोप है कि वह लोगों को प्रलोभन देकर शरीयत व्यवस्था लागू करने और जनसंख्या अनुपात बदलने के लिए वृहद स्तर पर धर्मांतरण करवा रहा था. गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब मौलाना कलीम सिद्दीकी मंगलवार शाम सात बजे अन्य मौलानाओं के साथ मेरठ के लिसाड़ीगेट में हूमायुंनगर की मस्जिद माशाउल्लाह के इमाम शारिक के आवास पर एक कार्यक्रम में आए थे. इसके बाद वे अचानक से लापता हो गए. परिजनों ने उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला. देर रात तक हंगामा चलता रहा. बाद जानकारी मिली कि मौलाना को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया है.

ड्राइवर समेत तीन अन्य मौलाना भी गिरफ्त
मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र के फूलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी के साथ उनके ड्राइवर और तीन अन्य मौलानाओं को एटीएस ने गिरफ्तार किया है. मौलाना सिद्दीकी पर आरोप है कि वह दिल्ली में कई शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की आड़ में अवैध धर्मांतरण का काम करता है. वह गैर मुस्लिमों को पैसों और नौकरी का प्रलोभन देकर उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता है, बाद में उन्हें भी इसी काम में लगा देता है.

अभिनेत्री सना खान का पढ़वाया था निकाह
जानकारी के मुताबिक मौलाना कलीम सिद्दीकी ने ही बॉलीवुड अभिनेत्री सना खान का निकाह पढ़वाया था. इतना ही नहीं गत 7 सितंबर को मुंबई में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के द्वारा आयोजित राष्ट्र प्रथम और राष्ट्र सर्वोपरि कार्यक्रम में भी मौलाना कलीम शामिल हुआ था.

Kanpur Shootout: पत्नी ऋचा के संपर्क में है आरोपी विकास दुबे, 2 जुलाई को फोन कर कहा था- भाग जाओ

Kanpur Encounter: सूत्रों के अनुसार विकास दुबे ने 2 जुलाई को रात 2 बजे पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था.

Kanpur Encounter: सूत्रों के अनुसार विकास दुबे ने 2 जुलाई को रात 2 बजे पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था.

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लखनऊ. कानपुर (Kanpur) के विकरू गांव में एक सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार होने वाले मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) की पत्नी ऋचा की तलाश में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है. पुलिस से मिली जानकारी के मुतबिक 2 जुलाई को रात 2 बजे विकास दुबे ने पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था. बताया जा रहा है कि ऋचा बेटे को साथ लेकर फरार हो गई. वहीं, भागते वक्त सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर भी साथ ले गई हैं. सूत्रों के अनुसार, ऋचा पति विकास दुबे के हर गुनाह की राजदार हैं. फिलहाल पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी विकास दुबे और उसकी पत्नी ऋचा की तलाश में छापेमारी कर रही है.

उधर, सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) पर अब इनाम की राशि बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दी गई है. बता दें कि इस बड़े हत्याकांड को अंजाम देकर फरार चल रहे विकास दुबे की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. 40 थानों की फोर्स, एक हजार से अधिक दरोगा, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम उसकी तलाश में जुटी है. बावजूद उसके 72 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी विकास दुबे और उसके गुर्गे पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं.

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फरार चल रहे विकास दुबे की तलाश में पुलिस चप्पे-चप्पे को छान रही है. पुलिस को आशंका है कि वह चंबल के रास्ते बीहड़ों से होते हुए मध्य प्रदेश व राजस्थान भाग सकता है. पुलिस ने चंबल में भी तलाशी अभियान चला रही है. बता दें कि विकास दुबे के पास से पुलिस से लूटी गई एके-47 और अन्य असलहा मौजूद हो सकता है.

Lucknow: चुनाव प्रभारी बनने के बाद धर्मेन्द्र प्रधान का पहला दौरा, चुनावी रोडमैप पर करेंगे मंथन

यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान आज से तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे हैं.

UP Assembly Election: धर्मेन्द्र प्रधान यूपी की चुनावी टीम घोषणा के बाद मुर्हूत की जगह रिजल्ट पर ज्यादा फोकस करते हुए पितृपक्ष में चुनावी अभियान की शुरूआत करने जा रहे है. कई राज्यों का अनुभव समेटे धर्मेन्द्र प्रधान ने यूपी को लेकर होमवर्क तो कर लिया है लेकिन वो सबसे पहले यूपी की टीम से फीडबैक लेंगे.

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लखनऊ. 2022 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2022) में 350 के लक्ष्य को साधने के लिए यूपी बीजेपी (UP BJP) ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना अभी से शुरू कर दिया है. यूपी में बीजेपी के जीत का खाका तैयार करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूपी बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) बुधवार से अपने तीन दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे है. यूपी बीजेपी चुनाव प्रभारी के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का यह पहला दौरा है. प्रधान आज दोपहर 2.30 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचेंगे. इसके बाद शाम 5 बजे बीजेपी दफ्तर पर 2 दौर में बैठकों का दौर चलेगा. इस बैठक में शामिल होने के लिए यूपी के प्रभारी राधा मोहन सिंह आज ही लखनऊ पहुंचे हैं. धर्मेंद्र प्रधान के साथ इस बैठक में सभी सह चुनाव प्रभारी भी शामिल होंगे.

शाम 5 बजे होने वाली बैठक में सभी प्रभारियों के साथ संगठन के पदाधिकारी, संगठन मंत्री सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह शामिल होंगे. इस बैठक में सभी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को भी बुलाया गया है.  कई राज्यों के प्रभारी रहे धर्मेन्द्र प्रधान यूपी की चुनावी टीम घोषणा के बाद मुर्हूत की जगह रिजल्ट पर ज्यादा फोकस करते हुए पितृपक्ष में चुनावी अभियान की शुरूआत करने जा रहे है. कई राज्यों का अनुभव समेटे धर्मेन्द्र प्रधान ने यूपी को लेकर होमवर्क तो कर लिया है लेकिन वो सबसे पहले यूपी की टीम से फीडबैक लेंगे.

इस दौरान वो ये समझने की कोशिश करेंगे कि फिलहाल यूपी का सियासी समीकरण क्या कहता है? 2017 के चुनावी जीत में किन किन फैक्टर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी और इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर प्रधान अपने चुनावी तैयारियों को लेकर आगे बढ़ेंगे, जिसकेलिए आज की बैठक बड़ी भूमिका निभाने वाली है.

महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर कांग्रेस के 10 सवाल: कहा- योगी राज में हो चुकी 21 साधु-संतों की हत्या

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रमोद तिवारी ने महंत नरेंद गिरि की मौत पर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं.

UP Congress Narendra Giri Case: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रमोद तिवारी ने महंत नरेंद गिरि की मौत पर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं. कहा कि 21 साधु-संतों की हत्या योगी राज में हो चुकी है. मामले की सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट की डीविजनल बेंच की निगरानी में CBI जांच कराई जाए.

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लखनऊ. प्रयागराज (Prayagraj) में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध मौत के बाद विपक्षी दल UP पुलिस की भूमिका पर हमलावर हैं. पुलिस पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. इसी को लेकर कांग्रेस ने राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेस की है, जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इस घटना को लेकर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं. इसके साथ इस देश के विभिन्न साधु-संतों की तर्ज पर इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट की डीविजनल बेंच की निगरानी में CBI जांच कराये जाने की मांग की है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ‘महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जिनमें पहला सवाल ये है कि आखिर सरकार और उसकी पुलिस बिना पोस्टमार्टम के ही महंत नरेन्द्र गिरि की मौत को आत्महत्या क्यों बता रही है? दूसरा सवाल ये कि अगर महंत नरेन्द्र गिरि ने आत्महत्या ही की थी, तो उनके शव को पुलिस के आने से पहले क्यों और किसने उतारा? तीसरा सवाल ये है कि जब महंत नरेन्द्र गिरि के शुभचितंक ये बता रहे हैं कि वे कुछ लिख नहीं सकते थे. तो आखिर इतना लंबा सुसाइड लैटर उन्होंने कैसे लिखा?

चौथा सवाल ये कि अगर सुसाइड नोट में तीन लोगों के नाम का जिक्र है तो आखिर अबतक सिर्फ 1 ही व्यक्ति को ही क्यों गिरफ्तार किया गया? पांचवा सवाल ये है कि आखिर इस मामले में जिस सत्ताधारी नेता, अधिकारी और अन्य लोगों के नाम आ रहे हैं, उनसे अबतक पूछताछ क्यों नही जा रही है? सरकार सिर्फ इस मामले को आत्महत्या बताने में जुटी है. इसलिये कांग्रेस इस मामले की सुप्रीम या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच की मांग करती है.’

प्रमोद तिवारी ने लगाए ये आरोप

इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि ‘योगी सरकार में साधु-संतों की हत्या का ये कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है. अब तक UP के अंदर योगी सरकार में 21 साधु-संतों की हत्या हो चुकी है. तो योगी राज में सबसे ज्यादा अगर किसी पर मुसीबत आई है. इस दौरान भी कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं. जिनमें 12 पेज का सुसाइड नोट भी शामिल है. क्रिमिनल हिस्ट्री में अबतक इतना बडा सुसाइड नोट मैने पहले कभी नहीं देखा. अक्सर सुसाइड नोट 4-6 लाइन के साथ अधिकतम 1 पन्ने का होता है. क्योंकि कहा जाता है कि अगर बहुत सोचने-समझने का समय मिला तो सुसाइड के इरादे बदल जाते हैं. आखिर BJP सरकार में उन पर ऐसा कौन सा दबाव था जो वो झेल नहीं पा रहे थे?

उन्होंने कहा कि महंत नरेन्द्र गिरी की मौत उनके शयनकक्ष में नहीं उनके गेस्ट रूम में हुई है. जिसमें एक नहीं बल्कि 2 दरवाजे हैं. तो फिर बाहर का दरवाजा तोड़कर क्यों शव उतारा गया? क्या कारण है कि महंत नरेन्द्र गिरी के पोस्टमार्टम में इतना विलंब किया जा रहा है? ये वो मुख्य सवाल है जो कही न कही पुलिस की थ्योरी पर सवाल खडा कर रहे हैं. इसलिये हम हाथरस कांड की तर्ज पर SC/HC के जज की निगरानी में CBI जांच की मांग कर रहे हैं.’

UP Teacher Recruitment 2021: यूपी में होगी बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती, UPTET के बाद शुरू हो सकती है प्रक्रिया

UPTET 2021 का आयोजन नवंबर 2021 में कराया जा सकता है.

UP Teacher Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही है. ताजा जानकारी के अनुसार सरकार इसी महीने इस सम्बन्ध में घोषणा कर सकती है.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 09:54 IST
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नई दिल्ली. UP Teacher Recruitment 2021: सरकारी नौकरियों की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है. उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही है. ताजा जानकारी के अनुसार सरकार इसी महीने इस सम्बन्ध में घोषणा कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार ने भर्ती आयोजित कराने वाली एजेंसी से इस सम्बन्ध में प्रस्ताव भी मांगा है.

साथ ही ये भी जानकारी सामने आ रही है कि UPTET 2021 का आयोजन नवंबर 2021 में कराया जा सकता है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो UPTET के बाद दिसंबर में शिक्षक भर्ती परीक्षा भी आयोजित कराई जा सकती है.

UP Teacher Recruitment 2021: कमेटी का किया गया है गठन
बता दें कि हाल ही में यूपी सरकार ने प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया था. जिसका मुख्य उद्देश्य था की वह प्रदेश भर के विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को चिन्हित करे. रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में विद्यालयों में शिक्षकों के तकरीबन 70,000 से अधिक पद रिक्त हैं.

UP Teacher Recruitment 2021: हो सकता है प्रमुख भर्ती अभियान
अगर इन सभी पदों पर भर्ती होती है तो यह राज्य का प्रमुख शिक्षक भर्ती अभियान बन सकता है. गौरतलब है की उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में शिक्षकों के कुल 51,112 रिक्त पद होने की जानकारी दी है. इन पदों को मौजूदा रिक्तियों में विलय किया जा सकता है.

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UP Election 2022 : उलेमा परिषद और पीस पार्टी ने मिलाया हाथ, कहा - सभी पार्टियों को देंगे चैलेंज

आरयूसी और पीस पार्टी के बीच गठबंधन हुआ.

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में यह गठबंधन अहम माना जा सकता है क्योंकि आज़मगढ़ और पूर्वी यूपी के समुदायों में दोनों दलों की पकड़ है. कैसे हुआ गठबंधन और कितना अहम है, जानिए.

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  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 08:28 IST
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लखनऊ. डॉ. मोहम्मद अयूब के नेतृत्व वाली पीस पार्टी और मौलाना आमिर रशदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने हाथ मिला लिये हैं. दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 से पहले संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन को ऐलान मंगलवार को किया. डॉ. अयूब और मौलाना रशदी ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘सेक्युलर सियासी पार्टियां मुस्लिमों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. सेक्युलर पार्टियों की राज्य सरकारों ने मुस्लिम समुदाय के विकास और कल्याण के लिए कोई ठोस काम नहीं किया.’ इस गठबंधन ने सेक्युलर और मानवतावादी सरकार देने के दावे के साथ दावा किया कि सभी पार्टियों को चुनौती पेश करने की तैयारी है.

दोनों नेताओं ने संयुक्त तौर पर बयान दिया कि उनका गठबंधन जनता को सही मायने मे सेक्यूलर और भाईचारे की सरकार देगा. आज तक जितने भी राजनीतिक दलों ने सरकार बनाई, किसी ने धर्म के नाम पर भेद किया तो किसी ने वोटों का इस्तेमाल. कांग्रेस, सपा और बीजेपी, सबने एक विशेष वर्ग के लिए काम किया. दलितों और पिछड़े मुस्लिमों के साथ अन्याय ही होता रहा है. ‘ज़रूरी हो गया था कि ऐसा विकल्प तैयार किया जाये जो समाज के सभी तबकों के लिए काम करे इसलिए यूनाइटेड डेमोकेटिक अलाइंस बनाया है. हम मानववादी सरकार बनाएंगे.’

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‘गठबंधन का किसी से कोई द्वेष नहीं’
डॉ. अयूब ने कहा, ‘ये गठबंधन तमाम पार्टियों के लिए चैलेंज होगा, जिन्होंने जन विरोधी कामों के अलावा कुछ नहीं किया. बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है, लॉ एंड आर्डर नहीं है और जो हक की आवाज़ उठाता है, उसे चुप करा दिया जाता है.’ वहीं, मौलाना रशदी ने कहा, ‘मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो रहा है इसलिए बीजेपी जीत रही है. सेक्यूलर दल मिलकर विकल्प बना रहे हैं लेकिन हमारे इस गठबंधन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है.’

सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों से प्राथमिकता के साथ निपटने की घोषणा करते हुए इस गठबंधन ने चुनावी ताल ठोकी. आपको बता दें कि पीस पार्टी पूर्वी यूपी के खास तौर से बुनकर समुदायों के बीच पैठ रखती है, जिसने 2012 के चुनाव में चार विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की थी. वहीं, आरयूसी का आधार आज़मगढ़ के क्षेत्र में बताया जाता है.

UP B.Ed Counselling 2021 : पहले दिन 13225 अभ्यर्थियों ने लॉक की च्वाइस

UP B.Ed Counselling 2021 : काउंसलिंग का दूसरा चरण 25 सितंबर से शुरू होगा.

UP B.Ed Counselling 2021 : यूपी बीएड काउंसलिंग 2021 की प्रक्रिया में मंगलवार से काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ कॉलेजों की च्वाइस लॉक करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई. पहले दिन 13000 से अधिक अभ्यर्थियों ने च्वाइस लॉक किए.

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  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 23:48 IST
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नई दिल्ली. UP B.Ed Counselling 2021 : उत्तर प्रदेश में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2021 की ऑनलाइन काउंसलिंग जारी है. पहले चरण की काउंसलिंग के लिए अभी तक 31800 अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू है. जबकि मंगलवार 21 सितंबर से रजिस्ट्रेशन के साथ च्वाइस फिलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. च्वाइस फिलिंग 24 सितंबर तक होगी. इसके बाद 25 सितंबर को अलॉटमेंट होगा. इसी के साथ दूसरे चरण की काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू होगा.

बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रोफेसर अमिता बाजपेई के अनुसार, पहले दिन 13225 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन च्वाइस लॉक किया. रजिस्ट्रेशन और च्वाइस भरने की, दोनो प्रक्रिया 23 सितंबर तक जारी रहेगी. इसके बाद 25 सितंबर को कॉलेज अलॉटमेंट किया जाएगा.

26 से मिलेगा आवंटन पत्र 

समन्वयक ने बताया कि 26 से 29 सितंबर के बीच अभ्यर्थी शेष शुल्क ऑनलाइन जमा करके अपनी सीट के आवंटन का पत्र प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के अगले चरण में 75,001 से 2,00,000 तक की रैंक वाले अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन होगा.
दो लाख से अधिक सीटों पर होगे एडमिशन

काउंसलिंग के लिए शिक्षण संस्थानों के विवरण और प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.lkouniv.ac.in पर विजिट कर सकते हैं. यूपी बीएड की प्रवेश प्रक्रिया में 16 राज्य विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आने वाले ले 2479 राजकीय, सहायता प्राप्त महाविद्यालय, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शामिल हैं. बीएड की कुल 2,35,310 सीटें हैं. इसमें से 7830 सीटें विश्वविद्यालयों और राजकीय या सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में हैं. जबकि 2,27,480 सीटें स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों में हैं. इसके अलावा प्रत्येक महाविद्यालय में 10 प्रतशित अतिरिक्त सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए होंगी. हालांकि, इडब्लूएस के लिए अतिरिक्त सीटें अल्पसंख्यक संस्थानों में नहीं होंगी.

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