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अयोध्या विवाद: तीन जजों की स्पेशल बेंच 10 जनवरी को तय करेगी रोजाना सुनवाई होगी या नहीं

30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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    रामजन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की भूमि पर मालिकाना हक मामले से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई एक बार फिर टल गई है. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 10 जनवरी तक टाल दिया. अब इस मामले को तीन नए जज की स्पेशल बेंच सुनेगी. तीन जजों की बेंच ही यह तय करेगी कि मामले में रोजाना सुनवाई होगी की नहीं. इस मामले को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई और जस्टिस एस के कौल की पीठ के सामने सूचीबद्ध किया गया था.

    मात्र दो मिनट की सुनवाई में ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई और जस्टिस एस के कौल की पीठ ने तीन जजों की स्पेशल बेंच को गठित करने का निर्देश देते हुए मामले को 10 जनवरी तक टाल दिया. अब 6 से 7 जनवरी तक नए जजों की बेंच गठित हो जाएगी और फिर 10 जनवरी को वही तय करेगी कि इस मामले की सुनवाई कैसे की जानी है.

    करीब सात दशक पुराने बाबरी मस्जिद और रामजन्मभूमि विवाद की अहम सुनवाई शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में होनी थी. 30 सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को सभी तीनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. जिसके बाद से ही यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

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    आज की सुनवाई में मुख्य अपीलों पर सुनवाई की तिथि और पीठ तय होने की उम्मीद थी. आज मामले से जुड़ी एक नई जनहित याचिका भी सुनवाई के लिए लगी थी, जिसमें अयोध्या मामले की अपीलों पर तय समय में सुनवाई की मांग की गई है.

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    गौरतलब है कि सुनवाई के लिए तीन जजों की पीठ का गठन करने की संभावना है. चार दीवानी वादों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 14 अपील दायर हुई हैं. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था कि 2.77 एकड़ भूमि को तीन पक्षों सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला के बीच बराबर बराबर बांटा जाए.

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    शुक्रवार को चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष रामजन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी थी. जिसमें से 13 हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पक्षकारों की वे अपीलें हैं जिन्हें कोर्ट विचारार्थ स्वीकार कर चुका है और अब उनकी मेरिट पर सुनवाई होनी है. एक याचिका शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड की है. जिसने अयोध्या में मंदिर बनवाने के लिए हिन्दुओं का समर्थन किया है. 20वें नंबर पर हरिनाथ राम की एक नई जनहित याचिका लगी थी, जिसमें अयोध्या मसले से संबंधित सभी अपीलों पर तय समय में सुनवाई की मांग की गई है. साथ ही केस के स्थगन और कारण दर्ज करने के बारे में दिशा-निर्देश का भी आग्रह किया गया है.

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