OPINION: माया-अखिलेश एकजुट मगर बीजेपी की उम्‍मीदें अभी भी बरकरार

बीजेपी की नजरें सवर्ण आरक्षण बिल के सहारे सवर्णों पर टिकी हैं. इसके अलावा कांग्रेस और शिवपाल यादव की पार्टी भी वोटों का बंटवारा कर महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है.

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Updated: January 14, 2019, 8:52 PM IST
OPINION: माया-अखिलेश एकजुट मगर बीजेपी की उम्‍मीदें अभी भी बरकरार
अखिलेश यादव और मायावती (फ़ाइल)
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Updated: January 14, 2019, 8:52 PM IST
(मनमोहन राय)

मायावती ने ऐलान किया है कि समाजवादी पार्टी के साथ ये गठबंधन लोकसभा चुनाव के बाद यानी 2022 के विधानसभा चुनाव में भी जारी रहेगा. मायावती और अखिलेश के बीच ये गठबंधन उत्तर प्रदेश और खास कर राष्ट्रीय राजनीति में नए समीकरण बना सकता है.

इतिहास गवाह है कि मायावती हमेशा गठबंधन की एक ऐसी साझेदार रही हैं जो कभी भी कुछ भी कर सकती है. चाहे हो सहयोगी दलों पर गुस्सा दिखाना हो या फिर गठबंधन से हाथ खींचना हो. लेकिन बीजेपी के फिर से सत्ता में आने के डर से वह बदल गई है. शनिवार को अखिलेश यादव के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कुछ ऐसा ही दिखा.



ऐसा लग रहा है कि मायावती और अखिलेश के बीच अच्छे रिश्ते बन गए हैं, ये दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हैं. मायावती ने कहा, ''अखिलेश के खिलाफ सीबीआई के छापे ने हमारे रिश्तों को और मजबूत बना दिया है.'' इसके बाद अखिलेश यादव ने कहा, ''मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि वो बीएसपी के साथ मिलकर काम करे. उन्हें ये अच्छी तरह पता होना चाहिए कि मायावती जी का सम्मान मेरे सम्मान जैसा है.''

ये साफ संकेत है कि दोनों दलों ने पुरानी खटास भुला दी है. अखिलेश अब मायावती की तरफ मुलायम और शिवपाल की नकारात्मक नजरों से नहीं देखते हैं. इन दोनों पर आरोप लगे थे कि गेस्ट हाउस कांड में इन्होंने मायावती पर हमले किए थे.

इस गठबंधन से सपा और बसपा को सिर्फ अनुसूचित जाति/जन जाति+यादव+मुसलमान के वोट ही नहीं मिलेंगे. बल्कि RLD के अजीत सिंह से हाथ मिलाने से जाट के वोट में इनके खेमे में आ सकते हैं. ये समीकरण बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है. बीजेपी को पिछली बार 71+2 (अपना दल) सीटें मिली थी. अगर ओबीसी के वोट भी सपा-बसपा गठबंधन को मिलते हैं तो फिर केंद्र में बीजेपी के लिए सरकार बनाना मुश्किल हो जाएगा.

बीजेपी की नजरें सवर्ण आरक्षण बिल के सहारे सवर्णों पर टिकी हैं. इसके अलावा कांग्रेस और शिवपाल यादव की पार्टी भी वोटों का बंटवारा कर महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सकती है. अखिलेश और मायावती ने पहले ही साफ कर दिया है कि गठबंधन में कांग्रेस की कोई जगह नहीं है. उत्तर प्रदेश में 19 फीसदी मुसलमान वोटर हैं. ये कांग्रेस को वोट दे सकते हैं. अगर शिवपाल ने कांग्रेस से हाथ मिलाया तो फिर बीजेपी के लिए ये अच्छी खबर होगी.
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इसके अलावा ओबीसी के वोटों में भी बंटवारा हो सकता है. बीजेपी की भी इस पर नज़र है. बीजेपी को उम्मीद है कि गैर यादव ओबीसी वोटर उनके खेमे में आ सकते हैं.

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