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OPINION: सभी दलों से मिलकर क्या वही पुरानी सियासी चाल चल रहे हैं ओमप्रकाश राजभर?

UP: सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर अपनी मुलाकातों को लेकर इन दिनों खासे चर्चा में बने हुए हैं.

UP: सुभासपा नेता ओम प्रकाश राजभर अपनी मुलाकातों को लेकर इन दिनों खासे चर्चा में बने हुए हैं.

UP News: विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर की बीजेपी सहित तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं से मुलाकात चर्चा का विषय बनी हुई है.

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लखनऊ. पहले भाजपा के साथ, फिर उसके खिलाफ और अब दोबारा उससे होती नजदीकी. पिछले पांच सालों में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के ओमप्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के कई चेहरे दिखाई दिये हैं. भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह (UP BJP President Swatantra Dev Singh) से मिलने के बाद तो लोग ओमप्रकाश राजभर की विश्वसनीयता तक पर सवाल उठा रहे हैं.

दरअसल, इससे पहले ओमप्रकाश राजभर सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिल चुके हैं. कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू से मिल चुके हैं. बस बीएसपी सुप्रीमो मायावती से उनका मिलना बाकी है. जानकारों का कहना है कि ऐसे में उनकी बातों का कौन एतबार करेगा? क्या ये नहीं समझा जाए कि वे अपने फायदे के लिए कुछ भी कर सकते हैं. ऐसे लीडर का जनता भरोसा नहीं करती. तो क्या सही में ऐसा है? क्या 2022 के चुनाव में उनका वोटबैंक उनके साथ खड़ा नहीं रहेगा?

यह तो चुनाव बाद पता चलेगा, लेकिन यह बात सोलह आने सच है कि ओपी राजभर जो कर रहे हैं, वह कोई नया और अनोखा काम नहीं है. ऐसे ही काम कई छोटी पार्टियां पहले कर चुकी हैं. कौन सी ऐसी पार्टी है, जो यह दावा कर सकती है कि उसने सिर्फ विचारधारा के आधार पर ही गठबंधन किया. यूपी का सियासी इतिहास गवाह है कि सभी ने राजनीतिक फायदे के लिए गठबंधन किए हैं. तो क्या सभी पार्टियों से जनता का भरोसा उठ गया? ऐसे में ओपी राजभर को लेकर आशंका क्यों पैदा हो रही है?

वैसे इन मुलाकाताें को लेकर ओम प्रकाश राजभर खुद व्यक्तिगत भेंट कहते हैं, पर साथ ही अपने अंदाज में कह भी देते हैं कि वह आंक रहे हैं कि दूसरे क्या कर रहे हैं?

आइये जानते हैं कि किस तरह विचारधारा के उलट राजनीतिक गठबंधन होते रहे हैं.

सबसे पहले बात सत्ताधारी भाजपा की
भाजपा ने न सिर्फ यूपी बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसी पार्टियों से गठबंधन किया है, जिनसे उसका लंबा वैचारिक मतभेद रहा है. यूपी की बात करें तो बसपा से भाजपा की कोई वैचारिक समानता नहीं रही है लेकिन, भाजपा ही वो पार्टी है, जिसने पहली बार मायावती को मुख्यमंत्री पद पर बिठाया था. 1995 में जब सपा-बसपा का गठबंधन टूट गया था, तब भाजपा ने ही समर्थन देकर मायावती की सरकार बनवाई थी. इसके अलावा जम्मू कश्मीर में तो भाजपा ने पीडीपी (पीपुल्स डेमोक्रेडिक पार्टी ) से गठबंधन करके सभी को चौंका ही दिया था. दोनों की विचारधाराओं में कोई मेल नहीं था. बंगाल का उदाहरण तो हाल का ही है. बंगाल में जिस ममता सरकार को भाजपा ने उखाड़ फेंकने का बीड़ा उठाया था उसी तृणमूल कांग्रेस के साथ भाजपा केन्द्र में सरकार चला चुकी है. ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं.

समाजवादी पार्टी
मुलायम सिंह यादव को राजनीतिक पहलवान कहा जाता है. उन्होंने ये ताकत यूं ही हासिल नहीं की है बल्कि कई दलों की बैसाखी भी उसमें लगी है. 1993 में सपा और बसपा साथ चुनाव लड़े. फिर जुदा हो गये. एक दूसरे के खिलाफ 15 सालों तक जूझते रहे. फिर 2019 में गलबहियां कर लिये. और तो और हैरत तो तब हुई जब मुलायम सिंह के साथ कल्याण सिंह मंच पर दिखे. आगरा में हुए सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में कल्याण सिंह मुलायम सिंह के साथ मंच पर बैठे थे. तब वे भाजपा में नहीं थे. बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर दोनों की सोच एक दूसरे के बिल्कुल उलट थी लेकिन, राजनीतिक जरूरत ने साथ तो कर ही दिया.

कांग्रेस से भी सपा के रिश्ते समय समय पर मीठे और तल्ख होते रहते हैं. पहले केन्द्र की यूपीए सरकार को समर्थन दिया फिर 2017 में यूपी का चुनाव साथ लड़े. अब कांग्रेस के पास भी फटकते नहीं दिखना चाहते.

बहुजन समाज पार्टी
बहुजन समाज पार्टी का भाजपा, सपा और कांग्रेस तीनों ही दलों से मिलाप हो चुका है. 1993 में सपा के साथ य़ूपी में सरकार बनी. जब ये रिश्ता टूटा तो 1995 में भाजपा के साथ सरकार बनी. जब ये भी रिश्ता टूटा तो कांग्रेस के साथ मिलकर 1996 का चुनाव लड़ा. जब सभी छूट गये तो फिर से 2019 में सपा के साथ चुनाव लड़ा. भाजपा की सहयोगी रही अकाली दल के साथ अब बसपा पंजाब में चुनाव लड़ रही है. जहां वो भाजपा और कांग्रेस दोनों के खिलाफ खड़ी है.

कांग्रेस
वैसे तो 1985 के बाद से ही कांग्रेस यूपी में बेदम है लेकिन, कोई ऐसी पार्टी नहीं बची, जिससे कांग्रेस ने राजनीतिक फायदे के लिए गठजोड़ न किया हो. 1996 में बसपा के साथ चुनाव लड़े तो 2017 में सपा के साथ. यूपी से बाहर निकलिये तो और भी ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे. कांग्रेस केरल में लेफ्ट के खिलाफ लड़ रही है लेकिन, ममता बनर्जी को हराने के लिए बंगाल चुनाव में लेफ्ट के साथ खड़ी थी.

तो ऐसे बेमेल गठबंधन को क्या कहेंगे? क्या ये मौकापरस्ती नहीं है. यदि सुभासपा के ओमप्रकाश राजभर भी इसी रास्ते जा रहे हैं तो उनकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं? असल में चुनाव में राजनीतिक पार्टियों का एक ही धर्म बन जाता है और वह है जीत. इसके लिए जो भी करना होता है, उसे किया जाता रहा है. इसे सही या गलत के तराजू पर तौले भी तो कौन.

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BJP है पिछड़ा वर्ग की दुश्मन, साढ़े 4 साल में केवल हमारे काम का फीता काटा: अखिलेश यादव

UP: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी को पिछड़ा वर्ग का दुश्मन बताया है.  (File pic)

UP News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूछा कि देश में जब 2.5 करोड़ प्रतिदिन वैक्सीन लगाने के क्षमता है तो रोज़ लगती क्यों नहीं? इस दशहरा तक रावण के साथ कोरोना को जलाकर खत्म करने की योजना पर काम करना चाहिए.

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लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने शनिवार को लखनऊ में कहा कि देश में जब 2.5 करोड़ प्रतिदिन वैक्सीन (Vaccine) लगाने के क्षमता है तो रोज़ लगती क्यों नहीं? इस दशहरा (Dussehra) तक रावण के साथ कोरोना (COVID-19) को जलाकर खत्म करने की योजना पर काम करना चाहिए. बीजेपी के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन पर अखिलेश ने कहा कि बीजेपी पिछड़ों की दुश्मन है.

उन्होंने योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा कि आज मेट्रो के प्रोटोटाइप का उद्घाटन किया गया. सरकार केवल हमारे कामों का ही शिलान्यास और उद्घाटन कर रही है. कानपुर मेट्रो को हमारी सरकार में शिलान्यास हुआ था लेकिन हमें काम नहीं करने दिया गया. लखनऊ मेट्रो को भी आगे नहीं बढ़ाया गया. पूर्वांचल एक्सप्रेसवे में दरार आ गई, ये एक्सप्रेसवे कभी भाजपा का नहीं था. साढ़े चार साल की सरकार में केवल हमारे काम का फीता काटा है.

वहीं बीजेपी के पिछड़ा वर्ग सम्मेलन को अखिलेश यादव ने दिखावा बताते हुए पिछड़ों की दुश्मन बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा पिछड़ों की कभी नहीं रही. इससे पहले अखिलेश यादव ने कहा कि पत्रकार जानते हैं कि आने वाले समय मे भविष्य का रास्ता कहां से निकलेगा? लखनऊ नवाबों का शहर है और यहां हर क्षेत्र में नवाब हैं. पत्रकारिता को तथ्यों से जोड़कर आप जिम्मेदारी से काम करते हैं. आज पूरा का पूरा कम्युनिकेशन का दौर बदल गया है. स्मार्ट फोन की वजह से हर व्यक्ति पत्रकार बन गया है. प्रिंट का रेवेन्यू नीचे और डिजिटल का रेवेन्यू ऊपर जा रहा है.

लखनऊ के विकास तो बहुत हुआ लेकिन विकास पर राजनीति नहीं हो रही है. विकास हमें जोड़ता है. अगर इकॉनमी पर बात होगी तो यूपी की जनता के सामने बहुत कठिन समय है. पत्रकारिता मजबूत है तो हमारा लोकतंत्र मजबूत होगा. इस बार यूपी में जनता हमें 400 सीटें भी जिता सकती है.

UP सरकार के साढ़े 4 साल पर ताबड़तोड़ प्रेस कांफ्रेंस, CM योगी लखनऊ और मंत्री जिलों में गिनाएंगे काम

UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को सरकार के साढ़े 4 साल के कामकाज का ब्यौरा प्रस्तुत करेंगे. (File Photo)

UP News: सीएम योगी आदित्यनाथ 19 सितम्बर को खुद लखनऊ में सरकार की उपलब्धियां गिनाएंगे. इस मौके पर योगी सरकार की साढ़े 4 साल के कार्यकाल में किए गए कामकाज पर बुकलेट भी जारी की जाएगी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 18, 2021, 14:34 IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) अपने साढ़े 4 साल का कार्यकाल 19 सितम्बर को पूरा कर रही है. यूपी विधानसभा चुनाव-2022 (UP Assembly Election-2022) की तैयारियों में लगी बीजेपी ने इसे बड़े स्तर पर मनाने की तैयारी की है. दरअसल सरकार की मंशा है कि उसके किए गए काम की जानकारी प्रदेश के हर नागरिक को हो. इसी को देखते हुए बीजेपी सरकार ने अपनी उपलब्धियां बताने के लिए राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी प्रमुख जिलों में प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया है. 19 सितम्बर को सीएम योगी आदित्यनाथ खुद लखनऊ में सरकार की उपलब्धियां गिनाएंगे. इस मौके पर योगी सरकार की साढ़े 4 साल के कार्यकाल में किए गए कामकाज पर बुकलेट भी जारी की जाएगी.

इस बार आजादी के अमृत महोत्सव की तर्ज पर सरकार साढ़े 4 साल का काम काज – विकास की लहर, हर गांव, हर शहर होगा नारा.

लखनऊ के अलावा मंत्री सरकार के साढ़े 4 साल की उपलब्धियों को अपने प्रभार वाले जिलों में बताएंगे. दोपहर 1 बजे प्रदेश के विभिन्न जिलों में मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी.

जानिए कौन माननीय किस जिले में करेगा प्रेस कांफ्रेंस

केंद्रीय राज्य मंत्री पंकज चौधरी- महाराजगंज

केंद्रीय राज्य मंत्री संजीव बालियान- मुजफ्फरनगर

केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल- आगरा

सांसद संगम लाल गुप्ता- प्रतापगढ़

सांसद अरुण सागर- शाहजहांपुर

सांसद अजय कुमार मिश्रा- लखीमपुर

सांसद प्रवीण निषाद- संत कबीर नगर

एमएलसी विद्यासागर सोनकर- रायबरेली

सांसद रामशंकर कठेरिया- इटावा

सांसद वरुण गांधी- पीलीभीत

सांसद उपेंद्र रावत- बाराबंकी

सांसद जयप्रकाश निषाद- अंबेडकरनगर

सांसद महेश शर्मा- गौतम बुद्ध नगर

सांसद संतोष कुमार गंगवार- बरेली

सांसद चंद्र सेन जादौन- फिरोजाबाद

सांसद विजय दुबे- कुशीनगर

राज्यसभा सांसद जफर इस्लाम- मुरादाबाद

सांसद सुब्रत पाठक- कन्नौज

सांसद अक्षयवरलाल गोंड- बहराइच

सांसद अनुराग शर्मा- झांसी

मंत्री गुलाब देवी- अमरोहा

मंत्री उदय भान सिंह- मैनपुरी

मंत्री मनोहर लाल कोरी- बलरामपुर

सांसद सुरेंद्र नागर- आजमगढ़

सांसद विजयपाल तोमर- मेरठ

सांसद साक्षी महाराज- उन्नाव

सांसद सत्यदेव पचौरी- कानपुर

इनपुट: अनामिका सिंह/अजीत सिंह

Lucknow university UGET 2021 Result: लखनऊ विवि की अंडरग्रेजुएट प्रवेश परीक्षा का की मेरिट लिस्ट जारी

Lucknow university Result : लखनऊ विवि की प्रवेश परीक्षा अगस्त में हुई थी.

Lucknow university UGET 2021 Result : लखनऊ विश्वविद्यालय ने अंडरग्रेजुएट एंट्रेंस टेस्ट 2021 का रिजल्ट जारी कर दिया है. भ्यर्थियों को अब कटऑफ के अनुसार काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 18, 2021, 14:30 IST
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नई दिल्ली. Lucknow university UGET 2021 Result : लखनऊ विश्वविद्यालय ने अंडरग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए हुई प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है. यह अब लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है. अभ्यर्थी लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट lkouniv.ac.in पर चेक कर सकते हैं. लखनऊ विवि ने प्रवेश परीक्षा के स्कोर कॉर्ड के साथ कट ऑफ भी जारी कर दिया है. विभिन्न अंडरग्रेजुएट कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा अगस्त में हुई थी. प्रवेश परीक्षा में पास होने वाले अभ्यर्थियों को अब कटऑफ के अनुसार काउंसलिंग और डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा.

लखनऊ विवि के नोटिस के अनुसार, जिन अभ्यर्थियों ने आवेदन के समय 12वीं के मार्क्स दर्ज नहीं किए थे उनको रैंक यूजीईटी 2021 और 10वीं के मार्क्स के आधार पर आवंटित की जाएगी. अभ्यर्थियों के लिए ध्यान देने वाली बात यह भी है कि वेरीफिकेशन के समय डॉक्यूमेंट्स वैलिड नहीं होंगे तो चयन रद्द कर दिया जाएगा.

लखनऊ विवि प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट ऐसे चेक करें
– सबसे पहले लखनऊ विवि की वेबसाइट lkouniv.ac.in पर जाएं
– अब एक विंडो UG Courses 2021 Provisional Merit List’ पॉप अप होगा
– इस विंडो पर क्लिक करें
– अब एक नए पेज पर रिडायरेक्ट कर दिया जाएगा
– यहां अपना कोर्स सेलेक्ट करें
– एक पीडीएफ फाइल ओपन होगी
– इसमें अपना नाम और रोल नंबर सर्च करें
– इसके लिए CTRL+F शॉर्टकट का भी इस्तेमाल कर सकते हैं

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सीएम योगी ने विपक्षियों पर साधा निशाना, कहा- राम मंदिर निर्माण होने से कुछ लोगों का राजनीतिक धंधा हो गया बंद

UP: भारत का डीएनए एक है इसलिए पूरा देश भी एक (File photo)

UP Politics: सीएम योगी ने कहा कि आज देश मे जीवन के सभी क्षेत्रों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है. गोरक्षपीठ शैव परंपरा की पीठ है लेकिन वैष्णव परम्परा के श्रीराम मंदिर निर्माण में भी गोरक्षपीठ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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गोरखपुर. गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित महंत दिग्विजय नाथ और महंत अवैद्यनाथ के श्रद्धांजलि समारोह में बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने विपक्षियों पर निशाना साधा. सीएम योगी ने कहा कि मोदी आए है जिसके कारण अयोध्या में राम मंदिर से संबंधित 500 साल के विवाद का समाधान हो गया. यही तो इनको समस्या थी. विवाद की आड़ में लोगों के खाने-कमाने का जो जरिया बंद हो गया और भारत को अपमानित करने का जो धंधा था वह बंद हो गया इसलिए उन्हें कैसे अच्छा लगेगा. सीएम योगी शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 52वीं व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 7वीं पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का शुभारंभ कर रहे थे.

योगी ने कहा कि हर भारतीय वेद रामायण उपनिषद महाभारत के बारे में जानता है. इनमें वर्णित कथाएं और प्रसंग पढ़ने से हर भारतीय को अपने इतिहास को जानने की आवश्यकता नहीं पड़ती. हमारे वेद इस धरती के प्रति श्रद्धा का भाव बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं. आज़ादी के पहले और बाद में जो बातें पढ़ाई गईं उसमें अंग्रेजों और वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से बताया कि हम आर्य बाहर से आये हैं. वामपंथी इतिहासकारों ने इस तरह के काले अध्याय को डालकर जो कुत्सित प्रयास किया उसका देश ने लंबे समय तक परिणाम भोगा.

राम मंदिर के सहारे सीएम योगी ने विपक्षियों पर साधा निशाना

राम मंदिर के सहारे सीएम योगी ने विपक्षियों पर साधा निशाना

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राममंदिर निर्माण में आ रही समस्या हल होने से कुछ लोगों का राजनीति का धंधा बंद हो गया. एक कालखंड ऐसा था कि अयोध्या में विवाद खड़ा कर दिया गया कि अयोध्या में राम मंदिर है कि विवादित ढांचा. नई डीएनए थ्योरी में पता चला है कि पूरे भारत का डीएनए एक है और इसीलिए भारत एक है. दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में समाप्त हो चुकी हैं पर भारत में फल फूल रही हैं. सीएम योगी ने कहा कि आज देश मे जीवन के सभी क्षेत्रों में परिवर्तन देखने को मिल रहा है. गोरक्षपीठ शैव परंपरा की पीठ है लेकिन वैष्णव परम्परा के श्रीराम मंदिर निर्माण में भी गोरक्षपीठ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. सरकार के भरोसे जो समाज रहता है वो स्वावलम्बी और आत्मनिर्भर नहीं बन सकता.

Explained: यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव और SP को क्यों हैं 'नेताजी' की जरूरत? पढ़ें इनसाइड स्टोरी

UP Election 2022: सपा मुख्यालय में इन दिनों लगातार देखे जा रहे हैं पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव. (फाइल फोटो)

आपके लिए इसका मतलब: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बेटा अखिलेश यादव और भाई शिवपाल सिंह यादव के बीच के मनमुटाव को खत्म कराने में जुटे हैं सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव. पार्टी की चुनावी रणनीति को धार देने और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिशें भी जारी.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 18, 2021, 14:22 IST
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में यहां लंबी कतार में खड़े पार्टी कार्यकर्ताओं के चेहरे खुशी से उस वक्त चमक उठे जब पार्टी संरक्षक मुलायम सिंह यादव अपनी कार से उतरे. लाल समाजवादी टोपी सिर पर धारण किए और पारम्परिक धोती-कुर्ता पहने मुलायम ने इंतजार में खड़े कार्यकर्ताओं का हाथ हिलाकर अभिवादन किया. पूर्व मुख्यमंत्री एवं देश के पूर्व रक्षा मंत्री का नियमित मुख्यालय आना और कार्यकर्ताओं से बात करना यह साबित करने के लिए काफी है कि मुलायम चुनावी समां में बंधने को तैयार उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं. वह न केवल आगामी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं को तैयार कर रहे हैं, बल्कि पुत्र अखिलेश यादव और भाई शिवपाल यादव के बीच बढ़ती खाई को पाटने का प्रयास कर रहे हैं. सपा अगले साल एक बार फिर सत्ता में वापसी कर सके, इसके लिए पार्टी के संरक्षक बुजुर्ग नेता की सक्रियता इन्हीं कारणों से दिखने लगी है.

उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘नेताजी’ के नाम से मशहूर मुलायम काफी समय तक अस्वस्थ रहे, बावजूद इसके वे इन दिनों सपा मुख्यालय में काफी समय दे रहे हैं. खासकर शिवपाल तथा अखिलेश के बीच दूरी मिटाने के प्रयास पर उनका जोर ज्यादा है. इसके अलावा युवाओं, महिला मतदाताओं का रुझान पार्टी की ओर बढ़े, इस पर भी उनका तवज्जो है. उन्होंने कहा है कि यदि आवश्यकता हुई तो वह खराब स्वास्थ्य एवं उम्र संबंधी मसलों के बावजूद पार्टी के लिए यूपी चुनाव प्रचार भी करेंगे. सपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मुलायम इन दिनों जितना सामने सक्रिय नजर आ रहे हैं उतने ही पर्दे के पीछे भी सक्रिय हैं.

शानदार रहा है मुलायम का सफर

पार्टी नेताओं द्वारा ‘धरती पुत्र’ कहे जाने वाले मुलायम सिंह अपनी नौजवानी के दिनों में कुश्ती लड़ा करते थे. बाद में वह शिक्षक बन गए. पहली बार उन्होंने 1967 में जसवंतनगर विधानसभा सीट से चुनकर आए थे, जिसका प्रतिनिधित्व अब उनके भाई शिवपाल कर रहे हैं. इस सीट से मुलायम सिंह ने कई बार चुनावी बाजी जीती है. जनता पार्टी के शासनकाल में वे प्रदेश के सहकारिता मंत्री भी बने थे. पार्टी सूत्रों ने कहा कि जब मुलायम अपने राजनीतिक उठान पर थे, तब कई कांग्रेसी नेता उन्हें ‘कल का छोकरा’ कहा करते थे. लेकिन उनमें से कोई नहीं जानता था कि यही ‘छोकरा’ एक दिन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र वाले देश का रक्षा मंत्री बनेगा.

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UP Politics: अखिलेश और शिवपाल यादव को करीब लाने की कवायद में जुटे हैं मुलायम सिंह यादव. (फाइल)

खतरे को भांप चुके हैं मुलायम

यह मायने नहीं रखता कि पार्टी कार्यकर्ता या नेता क्या कह रहे हैं, लेकिन पर्यवेक्षकों की मानें तो मुलायम ने खतरे को भांप लिया है. इसीलिए वह आगामी चुनाव से पहले अखिलेश यादव और अपने भाई शिवपाल के बीच का वैर समाप्त कराना चाहते हैं. विशेषज्ञों की मानें तो इससे समाजवादी पार्टी क्लिन स्विप नहीं कर पाएगी, लेकिन इसका असर पार्टी के प्रदर्शन पर जरूर दिखेगा. राजनीतिक कमेंटेटर रतन मणि लाल ने कहा, ‘उम्र के इस पड़ाव पर मुलायम की सबसे बड़ी उपलब्धि अपने बेटे अखिलेश और भाई शिवपाल को एक मंच पर एक साथ खड़ा करना होगा.’

कोशिश को अंजाम देने में जुटे मुलायम

उन्होंने कहा कि नेताजी की पाठशाला अब अपने घर की ओर चली है, क्योंकि वह जानते हैं कि शिवपाल यादव भी चुनाव में बेहतर परिणाम हासिल नहीं कर पा रहे हैं और अखिलेश भी वांछित सफलता हासिल करने में फिसड्डी साबित हुए हैं. ऐसे में मुलायम सिंह का जोर दोनों को एक साथ करके सपा में नई जान फूंकने का है. यूपी की सियासत को जाननेवाले इस बात पर खासा ध्यान लगाए बैठे हैं कि मुलायम की यह आजमाइश कितनी कारगर साबित होती है. खासकर बीजेपी के खिलाफ समाजवादी पार्टी को फिर से मुकाबले में लाने और चुनावी जीत दिलाने में उनके योगदान पर देशभर की निगाहें टिकी हैं.

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UP रोडवेज की अंतर्राज्यीय स्कैनिया लग्जरी बस सेवाएं बंद, हजारों यात्री परेशान

UP: यूपी रोडवेज ने स्कैनिया लग्जरी बसों के साथ अनुबंध खत्म कर दिया है. (File Photo)

UP News: लखनऊ में यूपीएसआरटीसी के रीजनल मैनेजर पीके बोस ने बताया कि अभी तक कुल 28 स्कैनिया और वॉल्वो बसों का संचालन किया जा रहा था. इसमें 23 स्कैनिया बसों का संचालन रोक दिया गया है. वहीं 5 वॉल्वो बसें पूर्व की तरह चल रही हैं.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग से बड़ी खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि लगातार घाटे के चलते उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की अनुबंधित अंतरराज्यीय स्कैनिया एसी बसों की सेवाएं बंद कर दी गई हैं. सिर्फ 5 लग्जरी वॉल्वो बस ही चल रही हैं. यूपीएसआरटीसी ने स्कैनिया बस कंपनी से घाटे के चलते अनुबंध खत्म कर दिया है. बताया जा रहा है कि अब नई शर्तों के साथ जल्द अनुबंध की तैयारी है. उधर यूपीएसआरटीसी के अचानक आए इस फैसले से हजारों यात्रियों के आगे बड़ा संकट खड़ा हो गया है. दीपावली को लेकर हर साल पहले ही बसें कम पड़ती थीं, अब लोगों को चिंता है कि और बसें कम होने से वह अपने घर कैसे पहुंच पाएंगे.

उधर इस संबंध में लखनऊ में यूपीएसआरटीसी के रीजनल मैनेजर पीके बोस ने बताया कि अभी तक कुल 28 स्कैनिया और वॉल्वो बसों का संचालन किया जा रहा था. इसमें 23 स्कैनिया बसों का संचालन रोक दिया गया है. वहीं 5 वॉल्वो बसें पूर्व की तरह चल रही हैं. उन्होंने कहा कि दीपावली से पहले हमारी कोशिश है कि बसें फिर से शुरू हों. ऐसे में अगर स्कैनिया बसों के संचालक हमसे संपर्क करेंगे तो नई शर्तों के साथ अनुबंध किया जाएगा. वहीं अगर ऐसा नहीं हुआ तो क्या करेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि तब दीपावली के लिए जनरथ बसों की सेवाएं ली जाएंगी.

बता दें अब स्कैनिया बसों की ऑनलाइन टिकट बुकिंग में नो बस सर्विस दिखने लगा है. जानकारी के अनुसार इन बसों के संचालन से यूपीएसआरटीसी को घाटा हो रहा था. इसी वजह से इन लग्जरी बसों का अनुबंध 31 अगस्त 2021 को खत्म कर दिया गया. अब नई शर्तों के साथ बस सेवाएं बहाल हो पाएंगीं लेकिन इसमें कितन समय लगेगा, इसका उत्तर किसी अफसर के पास नहीं है. फिलहाल यात्रियों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है.

बता दें लखनऊ से सात राज्यों के बीच बसें चलती थीं, इनमें सबसे ज्यादा दिल्ली, फिर राजस्थान, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, बिहार, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा का रूट शामिल था. पीके बोस ने बताया कि लखनऊ से रोजाना 2000 से ज्यादा यात्री गैर राज्यों के बीच बसों से सफर करते थे.

UPPSC Recruitment 2021: UPPSC ने निकाली बंपर भर्तियां, लाखों की सैलरी पाने का मौका

UPPSC Recruitment 2021: आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2021 है

UPPSC Recruitment 2021: भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2021 है. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार पदों पर चयन के लिए उम्मीदवारों को एक लिखित परीक्षा देनी होगी. जो इस परीक्षा में उत्तीर्ण होंगें हैं, वे इंटरव्यू में बैठ सकेंगे.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 18, 2021, 13:09 IST
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नई दिल्ली. UPPSC Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, (UPPSC) ने तकनीकी शिक्षा विभाग में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है. जिसके अनुसार प्रधानाचार्य, लेक्चरर और अन्य के 1370 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं. इच्छुक उम्मीदवार UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर, 2021 है. आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार पदों पर चयन के लिए उम्मीदवारों को एक लिखित परीक्षा देनी होगी. जो इस परीक्षा में उत्तीर्ण होंगें हैं, वे इंटरव्यू में बैठ सकेंगे. जो कि इस भर्ती प्रक्रिया अंतिम राउंड है. महत्वपूर्ण तिथियों, वैकेंसी डिटेल और आवेदन कैसे करें इसकी डिटेल नीचे दी जा रही है.

UPPSC Recruitment 2021: वैकेंसी डिटेल
प्राचार्य- 13 पद
लेक्चरर मैकेनिकल इंजीनियरिंग- 238 पद
लेक्चरर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग- 213 पद
लेक्चरर सिविल इंजीनियरिंग- 125 पद
लेक्चरर इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग- 145 पद
लेक्चरर केमिकल इंजीनियरिंग- 47 पद
लेक्चरर कंप्यूटर- 132 पद
लेक्चरर पेंट टेक्नोलॉजी- 11 पद
लेक्चरर टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी- 36 पद
लेक्चरर टेक्सटाइल डिजाइन- 5 पद
लेक्चरर टेक्सटाइल डिजाइन मुद्रण- 8 पद
लेक्चरर कालीन टेक्नोलॉजी- 12 पद
लेक्चरर लेदर टेक्नोलॉजी- 6 पद
लेक्चरर प्लास्टिक मोल्ड टेक्नोलॉजी- 2 पद
लेक्चरर इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग- 1 पद
लेक्चरर डेयरी इंजीनियरिंग- 7 पद
लेक्चरर आर्किटेक्ट- 1 पद
लेक्चरर ऑटो इंजीनियरिंग- 5 पद
लेक्चरर टेक्सटाइल केमिकल साइंस- 3 पद
लेक्चरर टेक्सटाइल इंजीनियरिंग- 6 पद
लेक्चरर फार्मेसी- 25 पद
लेक्चरर इंस्ट्रुमेंटेशन एंड कॉन्ट्रो- 5 पद
लेक्चरर इंटीरियर डिजाइनिंग- 3 पद
लेक्चरर शूज टेक्नोलॉजी- 2 पद
लेक्चरर केमिकल रबड़ और प्लास्टिक- 1 पद
लेक्चरर (गैर-इंजीनियरिंग) पद- 215 पद
लेबोरेटरी अधीक्षक- 16 पद
लाइब्रेरियन- 87 पद वेतन

UPPSC Recruitment 2021: वेतन
आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार प्रिंसिपल पदों नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को 1,31,400 रुपये वेतन दिया जाएगा. इसके अलावा 9A श्रेणी के पदों पर नियुक्त उम्मीदवारों को 56,100 रुपये और लेवल 10 की श्रेणी में नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को 57,700 रुपये का वेतन प्रतिमाह दिया जाएगा. उम्मीदवार भर्ती के लिए विस्तृत डिटेल अधिसूचना में देख सकते हैं.

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UP चुनाव से पहले योगी सरकार का बड़ा कदम, डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र होगी 70 वर्ष

UP: योगी सरकार डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर बड़ा फैसला करने जा रही है. (File Photo- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ)

UP News: यूपी के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि हमें ज्यादा अनुभव वाले डॉक्टरों की आवश्यकता है. डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद अपना कोई प्राइवेट क्लीनिक खोलें, इससे बेहतर है कि वह अपनी सेवाएं हमें ही दें.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव-2022 (UP Assembly Election 2022) से पहले प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) बड़ा फैसला करने जा रही है. योगी सरकार डाक्टरों की रिटायरमेंट की उम्र (Doctor’s Retirement Age) बढ़ाने जा रही है. दरअसल योगी सरकार ने कोरोना और अन्य बीमारियों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग में एक बड़ा फैसला करने की तैयारी की है. जिसके तहत डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष की जाएगी.

जानकारी के अनुसार इस निर्णय से संबंधित प्रस्ताव पर जल्द ही योगी सरकार की कैबिनेट बैठक में मुहर लगाई जाएगी. उत्तर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने न्यूज 18 से EXCLUSIVE बयान में कहा है कि हमें ज्यादा अनुभव वाले डॉक्टरों की आवश्यकता है. डॉक्टर रिटायरमेंट के बाद अपना कोई प्राइवेट क्लीनिक खोलें, इससे बेहतर है कि वह अपनी सेवाएं हमें ही दें. इसको देखते हुए हमने प्रस्ताव तैयार किया है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस पर अपनी सहमति भी दे दी है. जल्द ही इसे कैबिनेट से मंजूरी दी जाएगी.

विपक्ष के पास आज कोई मुद्दा नहीं: सुरेश खन्ना

वहीं सरकार के कार्यकाल के संबंध में वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में अब तक लोक संकल्प पत्र का हर वादा पूरा किया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हमने वो काम किये हैं, जो सोचना भी सपा और बसपा के लिए मुश्किल था. कोरोना को लेकर अभी राज्यों के हालात बेहद बुरे हैं लेकिन यूपी जैसे बड़े राज्य में आज 35 से ज्यादा ऐसे जिले हैं, जो कोरोना से मुक्त हो चुके हैं. यहां तक कि वैक्सीनेशन के मामले में भी हमने बाकि राज्यों को पीछे छोड़ दिया. आज यूपी में 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी वैक्सीन की पहली डोज ले चुकी है. इस सरकार में जितने मेडिकल कॉलेज खोले गये वो किसी सरकार में नही खोले गये हैं. विपक्ष के पास आज कोई मुद्दा नहीं है.

सुरेश खन्ना ने आगामी चुनाव को लकर कहा कि विपक्ष के पास फिलहाल कोई मुद्दा नहीं है. वो सिर्फ किसानों को भड़काकर अपनी दुकान चलाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी दाल नहीं गलने वाली है. जनता ने हम पर जो भरोसा किया था, हम उनसे खरे उतरे हैं.

Sitapur News: देवर ने भाभी की गर्दन पर चाकू से वार कर उतारा मौत के घाट, सामने आई बड़ी वजह

Sitapur News:  देवर ने की भाभी की हत्या (File photo)

UP Crime News: सीओ सिटी पीयूष कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी देवर को गिरफ्तार कर लिया है. उस पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.

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सीतापुर. उत्तर प्रदेश के सीतापुर (Sitapur) जिले में शुक्रवार रात देवर ने भाभी की निर्मम हत्या (Murder) कर दी. उसने अपनी भाभी की गर्दन पर सब्जी काटने वाले चाकू से वार कर मौत के घात उतार दिया. सनसनीखेज वारदात के बाद गांव में हड़कंप मच गया. आरोपी देवर घटना के बाद मौके से भाग गया. सूचना पाकर सीओ सिटी सहित थाना पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. फिलहाल पुलिस की जांच जारी है.

सीओ सिटी पीयूष कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी देवर को गिरफ्तार कर लिया है. उस पर सख्त कार्रवाई की जा रही है. हत्या की यह सनसनी खेज वारदात रामकोट इलाके के इंदरौली की है. बताते है कि मृतका सुमन का देर रात खाना बनाते समय अपने देवर शंकर से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था. दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ा की शंकर ने अपनी भाभी सुमन पर चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार कर दिए. जिससे सुमन की मौके पर ही मौत हो गई. सुमन को मरा हुआ देख देवर शंकर मौके से भाग गया. हत्या की इस घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.

पति की मौत के बाद देवर संग रहने लगी थी सुमन
दरअसल, सुमन के पति सेवक राम की करीब चार साल पहले मौत हो गई थी. जिसके बाद सुमन अपने देवर के साथ बतौर पत्नी रहने लगी थी. सुमन गांव के बाहर मकान बनाकर रह रही थी. इससे पहले आरोपी शंकर चोरी के एक मामले में जमानत पर जेल से छूटकर वापस आया था. सीओ सिटी पीयूष कुमार सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह घटना खाना बनाने के दौरान हुए विवाद को लेकर ही हुई प्रतीत होती है. बावजूद इसके पुलिस अन्य बिंदुओं की भी पड़ताल कर रही है.

UP Board Exams: 10वीं और 12वीं की इम्‍प्रूवमेंट परीक्षा आज से, कैमरे की निगरानी में हो रहा एग्‍जाम

UP Board Exam :  जो छात्र अपने रिजल्‍ट से संतुष्‍ट नहीं हैं, वह इस परीक्षा में शामिल हो रहे हैं.

UP Board improvement Exams 2021: 10वीं की यूपी बोर्ड इम्प्रूवमेंट परीक्षाएं 4 अक्टूबर तक चलेंगी, वहीं 12वीं की परीक्षाएं 6 अक्टूबर को खत्म होंगी. परीक्षा की अवधि दो घंटे है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 18, 2021, 10:59 IST
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नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) आज से कक्षा 10वीं और 12वीं की इम्‍प्रूमेंट परीक्षा शुरू कर रही. यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा उन छात्रों के लिए है, जो अपने वैकल्पिक मूल्यांकन मानदंड से प्राप्त परिणाम से संतुष्‍ट नहीं हैं और जिन्‍हें लगता है कि उनका रिजल्‍ट और बेहतर हो सकता है.

क्‍लास 10 की यूपी बोर्ड सुधार परीक्षा (Class 10 UP Board improvement exams) 4 अक्टूबर तक चलेगी. जबकि कक्षा 12 की परीक्षा (Class 12 UP Board improvement exams) 6 अक्टूबर को समाप्त होगी. दोनों एग्‍जाम की अवधि दो घंटे है.

बोर्ड परीक्षा का आयोजन कैमरे की निगरानी में हो रहा है. परीक्षा हॉल में छात्रों के बीच दूरी रखी गई है. सोशल डिस्‍टेंसिंग के साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल का पूरा ध्‍यान रखा गया है.

UPMSP ने 31 जुलाई को कक्षा 10वीं और 12वीं के परिणाम घोषित किए हैं. यूपी बोर्ड 10वीं के परिणाम का कुल पास प्रतिशत 99.53 फीसदी रहा, जबकि यूपी इंटर कक्षा 12वीं में यह 97.88% था.

इम्‍प्रूवमेंट परीक्षा देने के बाद जो अंक आएगा, उसे फाइनल माना जाएगा. उत्‍तर प्रदेश बोर्ड (Uttar Pradesh board), कुछ चुने हुए केंद्रों पर परीक्षा (UPMSP improvement exams) आयोजित कर रहा है. हालांकि सरकार की तरफ से जारी आदेश के अनुसार बारिश के कारण राज्‍य के सभी शैक्षणिक संस्‍थान अगले दो दिनों तक बंद ही रहेंगे. लेकिन जिन स्‍कूलों में परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, उन्‍हें खोला जाएगा.

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