अपराधियों पर गोलियां और शिव भक्तों पर फूल बरसाने वाले प्रशांत कुमार पर टिकी पूरी यूपी की निगाहें
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अपराधियों पर गोलियां और शिव भक्तों पर फूल बरसाने वाले प्रशांत कुमार पर टिकी पूरी यूपी की निगाहें
1990 बैच के आईपीएस अफसर प्रशांत कुमार मुलत: यूपी कैडर के नहीं है. उनका चयन तमिलनाडु कैडर के लिए हुआ था. (फाइल फोटो)

प्रशांत कुमार (Prashant Kumar) डिफेंस और स्ट्रेटेजिक स्टडीज में M.Phil हैं. वे नेशनल डिफेंस कॉलेज से ट्रेनिंग कर चुके हैं.

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कानपुर. कानपुर (Kanpur) में 8 पुलिस वालों की जान लेने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikas Dubey) की तलाश तेज है. घटना को अंजाम देकर फरार हुए 24 घंटे से ज्यादा समय बीत गया है लेकिन अभी तक  पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाई है. ऐसे में एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार (ADG Law and Order Prashant Kumar) की ओर पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रशांत कुमार की अपराधियों के खिलाफ जंग की एक लंबी कहानी रही है. जिस जिस जिले में प्रशांत कुमार की पोस्टिंग हुई उस उस जिले में अपराधियों के पैर उखड़ गए. एनकाउंटर की बाढ़ आ गई. प्रशांत पिछले 3 सालों से मेरठ जोन में तैनात थे. यूपी में सबसे ज्यादा एनकाउंटर (Encounter) इसी जोन में हुए. हाल ही में शक्ति नायडू नाम का एक लाख का इनामी बदमाश एनकाउंटर में मारा गया था. प्रशांत कुमार के तेवर का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके मेरठ के तीन साल के कार्यकाल में ये सबकुछ हुआ है. आंकड़ों के मुताबिक, उनके तीन साल के कार्यकाल में 2273 एनकाउंटर, 65 दुर्दांत बदमाश ढेर, 1332 गोली लगने से घायल और 2310 अपराधियों ने सरेंडर किया है.

1990 बैच के आईपीएस अफसर प्रशांत कुमार मुलत: यूपी कैडर के नहीं है. उनका चयन तमिलनाडु कैडर के लिए हुआ था. तमिलनाडु में 4 साल की नौकरी के बाद 1994 में होली के दिन यूपी कैडर में वापसी हुई. बिहार के सीवान के रहने वाले  प्रशांत कुमार की शादी यूपी कैडर की आईएएस डिम्पल वर्मा से हुई और इसी ग्राउंड पर उनका कैडर चेंज हुआ. भदोही एसएसपी के तौर पर प्रशांत कुमार का यूपी में सफर शुरू हुआ. इसके बाद सोनभद्र, जौनपुर, फैजाबाद, गाजियाबाद और सहारनपुर में भी एसएसपी रहे. गाजियाबाद में अपनी तैनाती के समय प्रशांत कुमार का अपराधियों के खिलाफ असली एक्शन खुलकर सामने आया था. वे सहारनपुर और मेरठ रेंज के डीआईजी भी रहे. IG में प्रोमोट होने के बाद भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले गए. योगी सरकार के बनने के बाद फिर से यूपी में वापसी हुई.

खुशखबरी तब मिली जब वे मानसरोवर की यात्रा पर थे
कुछ दिनों तक ट्रैफिक, सिक्योरिटी और पीएसी में भी तैनाती रही लेकिन 3 साल पहले योगी सरकार ने मेरठ में प्रशांत कुमार को एडीजी के तौर पर भेजा. ट्रैफिक, पीएसी और सिक्योरिटी में तैनाती के दौरान थोड़े अनमने से रहे प्रशांत कुमार को मेरठ जोन का एडीजी बनने की खुशखबरी तब मिली जब वे मानसरोवर की यात्रा पर थे. आर्डर जारी होने के 14 दिन बाद मानसरोवर यात्रा से लौट कर उन्होंने मेरठ जॉइन किया.
कांवरियों पर हेलीकॉप्टर से फूल बरसा कर आए थे चर्चा में


प्रशांत कुमार की शिव भक्ति के बारे में उनके नजदीकी लोगों से ज्यादा और किसी को पता नहीं था. लेकिन उनकी शिव भक्ति सार्वजनिक तौर पर 2 साल पहले सामने आई. मेरठ में अपनी तैनाती के दौरान प्रशांत कुमार ने कावड़ियों के जत्थे पर हेलीकॉप्टर से से फूल बरसाए थे. तब पूरे देश में उनकी शिव भक्ति भक्ति की चर्चा हुई थी. अपने कैरियर में तमाम चुनौतियों से गुजर चुके प्रशांत कुमार के सामने एक और बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है. विकास दुबे की गिरफ्तारी.

शांत कुमार डिफेंस और स्ट्रेटेजिक स्टडीज में M.Phil हैं
यह चुनौती अब तक की दूसरी चुनौतियों से बहुत अलग इसलिए भी है क्योंकि अब से पहले इतना बड़ा घाव पुलिस को किसी ने नहीं दिया था. प्रशांत कुमार ने कहा कि प्रोफेशनल लाइफ में बहुत तरह का चैलेंज आता है. जैसे आप जिले में है तो जिले में ही घटना हो जाती है. जैसे कानपुर के एसएसपी के लिए ये लाइफ लांग का है. तो चैलेंजेज आते रहते हैं . पुलिस ओवरकम भी की है. ऐसे बहुत सारे दृष्टांत हैं. प्रशांत कुमार डिफेंस और स्ट्रेटेजिक स्टडीज में M.Phil हैं. नेशनल डिफेंस कॉलेज से ट्रेनिंग कर चुके हैं. आपदा प्रबंधन में MBA हैं और एप्लाइड जियोलॉजी से MSc. देखना होगा कि विकास दुबे के मामले में उनका ये अनुभव कितना काम आ पाता है.

 
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