लखनऊ: धनतेरस पर एक दिन में 150 करोड़ का कारोबार, डायमंड ज्वेलरी की जमकर हुई खरीदारी

धनतेरस पर लखनऊ के लोगों ने हीरे के गहने की जमकर खरीदारी की.
धनतेरस पर लखनऊ के लोगों ने हीरे के गहने की जमकर खरीदारी की.

लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन के वरिष्ठ महामंत्री प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि धनतेरस पर इस साल डायमंड ज्वेलरी (Diamond Jewelry) की मांग काफी है. कुल बिक्री का लगभग 30 से 40 फीसदी डायमंड के गहने लोगों ने खरीदे हैं.

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लखनऊ. गहने के कारोबारियों को आशंका थी कि इस साल कोरोना काल में गहनों का बाजार एकदम ठंडा रहेगा. हालात ये थे कि एक महीने पहले से शुरू होने वाली तैयारी इस साल काफी देर से शुरू हुई, लेकिन धनतेरस (Dhanteras) के दिन हुई खरीदारी से व्यापारियों की पौ बारह हो गयी है. लखनऊ में इस साल धनतेरस के दिन लगभग 150 करोड़ का गहने का व्यापार हुआ है. सबसे खास बात तो यह है कि इस साल सोने और चांदी के साथ-साथ लोगों ने जमकर डायमंड ज्वेलरी (Diamond Jewelry) की खरीदारी भी की.

अग्रवाल ज्वेलर्स के मालिक और लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन के वरिष्ठ महामंत्री प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि डायमंड ज्वेलरी की इस साल सबसे ज्यादा खरीद हुई. कुल बिक्री का लगभग 30 से 40 फीसदी डायमंड के गहने की खरीद हुई है.

अग्रवाल ने बताया कि इसके पीछे बड़ी वजह सुरक्षित निवेश माना जा सकता है. सोने के गहने की तरह हीरे के गहने चोरों के लिए कीमती नहीं होते. इन्हें आसानी से बाजार में बेचा नहीं जा सकता. चोरी छुपे यदि इसे बेचा भी जाये तो इस बात की जांच कौन करेगा कि असली है या नकली. ऐसे में चोरों के लिए ये गहने बेचना आसान नहीं होता. सोने के गहनों को तो गलाकर बिस्किट बना दिया जाता है, लेकिन हीरे के गहनों में इसकी संभावना नहीं रहती. इसलिए लोगों ने इसे सुरक्षित निवेश मानकर इस साल ऐसे ही गहने खरीदे हैं.



धनतेरस पर डायमंड के हार हों या फिर बाजूबंद या डायमंड लगी चूड़ियां हों, सभी की बिक्री जमकर हुई है. अहमदाबाद और सूरत से आने वाली डायमंड ज्वेलरी न्‍यूनतम 10 हजार से शुरू हो जाती है. अंगूठी 8-10 हजार में मिल जाती है. हार लेना हो तो फिर उसके लिए कम से कम 5-7 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं. लखनऊ में लगभग 5 हजार दुकानें हैं. इनमें से 1000 बड़ी दुकानें हैं.
ज्वेलर्स को उम्मीद है कि दो दिन धनतेरस होने से उनका अच्छा व्यापार होगा. प्रदीप अग्रवाल ने बताया कि जितने की उम्मीद की जा रही थी उतना व्यापार हुआ है. हालांकि, पिछले साल के मुकाबले ये थोड़ा कम जरूर रहा है.
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