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सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटे जा रहे घटिया जूते-मोजे, मैनपुरी में खुलासे के बाद हड़कंप

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 28, 2019, 5:38 PM IST
सरकारी स्कूलों के बच्चों को बांटे जा रहे घटिया जूते-मोजे, मैनपुरी में खुलासे के बाद हड़कंप
मैनपुरी में सरकारी स्कूल के बच्चों को जूते मोजे की सप्लाई में घपला पकड़ा गया है. (सांकेतिक तस्वीर)

बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 200 करोड़ के जूते-मोजे (Shoes and socks) के टेंडर में बड़ा खेल सामने आया है. विभाग ने जिस फर्म को सबसे ज्यादा सप्लाई का टेंडर दिया, उसने सैंपल से हल्की क्वालिटी के जूते सप्लाई कर दिए.

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लखनऊ. योगी सरकार (Yogi Government) प्रदेश के सरकारी स्कूल (Government Schools) में पढ़ने वाले नौनिहालों को कान्वेंट स्कूल के बच्चों जैसी तालीम देने की कोशिश कर रही है. योगी सरकार ने 2017 में ही नौनिहालों को निशुल्क जूते-मोज़े और स्वेटर देने की योजना शुरू की. लेकिन कुछ अधिकारियों के लिए ये योजना भ्रष्टाचार करने का नया माध्यम बन गई है. इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग के करीब 200 करोड़ के जूते-मोजे (Shoes and socks) के टेंडर में बड़ा खेल सामने आया है. विभाग ने जिस फर्म को सबसे ज्यादा सप्लाई का टेंडर दिया, उसने सैंपल से हल्की क्वालिटी के जूते सप्लाई कर दिए. मैनपुरी से मामला खुलने के बाद अब विभाग ने संबंधित फर्म पर FIR दर्ज कराते हुए फर्म को ब्लैकलिस्ट करने का आदेश दिया है. वहीं मामला खुलने के लगभग 47 दिन बाद हुई इस कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं.

मैनपुरी से इस खेल के खुलने के बाद मंत्री सतीश द्विवेदी व उनके आलाधिकारी जूते-मोजे की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट हो गए हैं. मामले में विभागीय मंत्री की ओर से कार्रवाई के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं.
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार इस सत्र में कक्षा 1 से 8 तक के छात्र छात्राओं को जूते-मोजे बांटने के लिए 200 करोड़ का टेंडर किया था. जब जिलाधिकारी मैनपुरी द्वारा इसकी गुणवत्ता परखी गयी तो पता चला कि जो सैंपल दिखाया गया था, उसमें और सप्लाई की क्वालिटी में काफी अंतर है. इसे लेकर मैनपुरी के डीएम ने शासन को लिखित शिकायत 8 अगस्त को करते हुए कार्रवाई की संस्तुति कर दी थी.

डीएम की शिकायत पर अपर मुख्य सचिव ने दिया था कार्रवाई का आदेश

डीएम की संस्तुति पर अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा रेणुका कुमार ने निर्देश दिए कि गड़बड़ी करने वाली फर्म पर FIR कराने के साथ ही उसे ब्लैक लिस्ट करना सुनिश्चित किया जाये. मामला यहीं तक सीमित नहीं है. इसी फर्म के एटा और कासगंज में सप्लाई किये गए जूते में भी खेल करने का मामला सामने आ रहा है. इन जिलों में भी हल्की क्वालिटी के जूते की सप्लाई की पोल खुली है. एटा में तो मामला सामने आने के बाद बीएसए ने सभी जूते वापस करवाकर सैंपल की क्वालिटी के जूते देने के निर्देश दिए हैं. इसकी वजह से अब तक वहां बहुत से छात्र छात्राओं को जूते बंट ही नहीं पाये.

26 जिलों में सप्लाई का ठेका है कंपनी के पास
जूते मोजे के 200 करोड़ के टेंडर में करीब 148 करोड़ का टेंडर जूते का है और करीब 52 करोड़ का मोजे का है. हरियाणा की फर्म मंजीत प्लास्टिक को सबसे अधिक 25 फीसदी सप्लाई का जिम्मा मिला. फर्म को सूबे के 26 जिलों में सप्लाई का काम दिया गया है, जिसकी कीमत करीब 37 करोड़ है.
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बता दें पूर्व में भी जूते मोजे का टेंडर विवादों में रहा था, जिसमें सरकार को भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से काफी किरकिरी का सामना करना पड़ा था. पहले साल भी इनकी क्वालिटी को लेकर सवाल उठे थे. चंद महीनों में ही छात्र छात्राओं को दिए गए जूते फटने लगे थे. मामला सुर्ख़ियों में आया तो हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए विभागीय अधिकारियों को तलब कर लिया था. एक बार फिर से इस साल जूते मोज़े की क्वालिटी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शासन ने इस मामले में विभागीय अधिकारी से भी स्पष्टीकरण मांगा है.

फर्म के साथ अफसरों की मिलीभगत की भी होगी जांच: मंत्री

इस मामले में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी ने कहा कि सरकार किसी भी सूरत में भ्रष्टाचार बरदाश्त नहीं करेगी. मैनपुरी की शिकायत पर कार्रवाई की गई है. आवश्यकता पड़ी तो विभागीय अधिकारियों की फर्म के साथ संलिप्तता की भी जांच कराई जाएगी.

रिपोर्ट: प्रशांत पांडेय

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First published: September 28, 2019, 5:38 PM IST
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