Lucknow news

लखनऊ

अपना जिला चुनें

दिल्ली में हिंसा के बाद हाई अलर्ट पर यूपी पुलिस, कानून हाथ में लेने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी

डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी

डीजीपी के मुताबिक अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश के साथ ही सीनियर अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि अफवाह का अपने स्तर से तुरंत खंडन कर अफवाह फैलाने वालों पर सख़्त कार्रवाई की जाए.

SHARE THIS:
लखनऊ. सीएए (CAA) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली (New Delhi) के कई इलाकों में हिंसा (Violence) के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश (West UP) के कई जिलों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. यूपी के डीजीपी एचसी अवस्थी (DGP HC Awasthi) ने बताया कि नई दिल्ली की सीमा से जुड़े शहरों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं. सीनियर पुलिस अफसरों को फील्ड में गश्त करने, संदिग्ध वाहनों और लोगों की चेकिंग के निर्देश दिए गए हैं.

डीजीपी के मुताबिक अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश के साथ ही सीनियर अफसरों को निर्देश दिए गए हैं कि अफवाह का अपने स्तर से तुरंत खंडन कर अफवाह फैलाने वालों पर सख़्त कार्रवाई की जाए. डीजीपी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के साथ ही एलआईयू और खुफिया एजेंसियों को सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं.

डीजीपी के मुताबिक संवेदनशील जिलों को पर्याप्त पुलिस, पीएसी और केंद्रीय बल मुहैया कराया जाएगा. कानून हाथ में लेने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. आपको बताते चलें कि अलीगढ़ में भी रविवार को तोड़फोड़, आगजनी की घटनाएं हुई थी जिसके बाद पुलिस ने 350 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

लखनऊ के घंटाघर पर भी पुलिस की नजर

उधर लखनऊ के घंटाघर पर नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के ऊपर भी पुलिस की नजर है. दिल्ली में सोमवार को भड़की हिंसा के बाद पुलिस धरना स्थल पर ख़ास सतर्कता बरत रही है. पुलिस की टीम ने घंटाघर के आस-पास गश्त बढ़ा दी है. आने जाने वालों पर पैनी नजर रखी जा रही है.

ये भी पढ़ें:

उन्नाव रेप केस में उम्रकैद की सजा काट रहे कुलदीप सेंगर की विधायकी खत्‍म

अपराध खुली जगह पर हो तो ही SC/ST एक्ट की धारा लागू: इलाहाबाद हाईकोर्ट

पढ़ें Hindi News ऑनलाइन और देखें Live TV News18 हिंदी की वेबसाइट पर. जानिए देश-विदेश और अपने प्रदेश, बॉलीवुड, खेल जगत, बिज़नेस से जुड़ी News in Hindi.

सपा नेता सुनील सजन का बड़ा आरोप- आतंकी है विकास दुबे, बीजेपी नेताओं के घर में ही है छिपा

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है.

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है.

SHARE THIS:

लखनऊ. कानपुर (Kanpur) के विकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों के शहादत मामले पर राजनीति भी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) ने सोमवार को योगी सरकार (Yogi Government) पर बड़ा हमला बोला. समाजवादी पार्टी ने सरकार पर फरार चल रहे हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे (Vikas Dubey) को संरक्षण देने का आरोप लगाया. समाजवादी पार्टी का आरोप है कि विकास दुबे बीजेपी नेताओं के घर में ही छिपा है. पुलिस बीजेपी नेताओं के घर की तलाशी ले.

समाजवादी पार्टी के एमएलसी सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे आतंकी है. उसे सरकार का संरक्षण प्राप्त है. उसके असली अक सरकार में ही हैं. सरकार विकास दुबे का कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड सार्वजानिक करे. सब कुछ साफ हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ये कैसे हो सकता है कि जिले के टॉप अपराधियों की लिस्ट में विकास दुबे का नाम ही न हो. ऐसा सिर्फ सरकार में बैठे उनके आकाओं की शह पर ही हो सकता है. असली बादशाह तो सरकार में है, जिसका संरक्षण विकास दुबे को था. सुनील सिंह साजन ने कहा कि विकास दुबे बीजेपी नेताओं के घर में ही छिपा है. पुलिस सभी की तलाशी ले.

पत्नी ऋचा भी बेटे संग फरार

गौरतलब है कि 72 घंटे से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी विकास दुबे का पता पुलिस नहीं लगा सकी है. विकास दुबे के साथ ही उसकी पत्नी ऋचा भी दो जुलाई की रात से छोटे बेटे के साथ फरार है. उधर पुलिस ने विकास दुबे पर इनाम की राशि बढ़ाकर ढाई लाख कर दिया है. 40 थानों की पुलिस फाॅर्स के साथ ही क्राइम ब्रांच व एसटीएफ भी उसकी तलाश में जुटी है.

(इनपुट: अलाउद्दीन)

UPPSC Admit Card : स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड जारी, इन पांच शहरों में होगी परीक्षा

UPPSC Admit Card : स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा 31 अक्टूबर को होनी है.

UPPSC Admit Card : यूपीपीएससी स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा प्रदेश के पांच शहरों में होगी. इस भर्ती के लिए आवेदन 16 जुलाई से तीन सितंबर तक हुआ था.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 18:39 IST
SHARE THIS:

नई दिल्ली. UPPSC Staff nurse Exam : उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने स्टाफ नर्स/सिस्टर ग्रेड-2 परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जारी कर दिया है. स्टाफ नर्स भर्ती के लिए परीक्षा तीन अक्टूबर 2021 को होनी है. स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थी यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in से अपने एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं. एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि एंटर करके लॉग इन करना होगा.

यूपीपीएससी स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा 31 अक्टूबर को प्रदेश के पांच शहरों में आयोजित की जाएगी. ये शहर हैं- गाजियाबाद, गोरखपुर, प्रयागराज, लखनऊ और मेरठ. परीक्षा का समय सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे का है. परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थियों को अपने साथ एडमिट कार्ड के साथ ओरिजिनल आईडी प्रूफ और उसकी फोटो कॉपी लेकर जाना है.

ऐसे डाउनलोड करें स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा का एडमिट कार्ड

– सबसे पहले यूपीपीएससी की वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं
– इसके बाद होम पेज पर ‘Admit Card :- CLICK HERE TO DOWNLOAD ADMIT CARD FOR ADVT. NO. A-4/E-1/2021, STAFF NURSE /SISTER GRADE-2 (MALE/FEMALE) EXAM-2021’ मिलेगा
– इस लिंक पर क्लिक करें
– यहां नए पेज पर अपने लॉग इन क्रेडेंशियल एंटर करें
– अब एडमिट कार्ड डाउनलोड करके प्रिंट कर लें

ये भी पढ़ें

JPSC Exam 2021: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की JPSC परीक्षा में उम्र सीमा छूट की मांग, झारखंड हाई कोर्ट का फैसला बरकरार

NEET SS 2021: जारी हुआ एप्‍ल‍िकेशन फॉर्म, इस डायरेक्‍ट लिंक पर चेक करें

शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात: क्या अखिलेश यादव और शिवपाल के बीच खत्म होंगी दूरियां ?

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों के लिये जोड़तोड़ की कोशिशों के बीच AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के लिये दुविधा के हालात हो गये हैं.

ओवैसी ने मंगलवार रात शिवपाल यादव के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और करीब एक घंटे तक दोनो नेताओ के बीच बातचीत हुयी. इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव ने फरवरी के महीने में आजमगढ़ के विवाह समारोह में मुलाकात की थी. ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी ने भी लखनऊ के एक होटल में डेढ़ घंटे तक मुलाकात कर चुके हैं

SHARE THIS:

उत्तर प्रदेश में सियासी जोड-तोड के बीच प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल यादव और एआईआईएम (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Owaisi) के बीच मुलाकात के कई मायने हैं. क्या सब वैसा ही है जैसा दिख रहा है, या किसी बडे प्लान के तहत ये दोनो नेता साथ बैठे थे. क्योंकि ओवैसी की शिवपाल (Shivpal Yadav) से मुलाकात सूबे के चुनाव पूर्व कई समीकरणो को गडबड कर सकती है. वजह साफ है, पहली बार यूपी मे चुनाव लड रहे ओवैसी भले ही बीजेपी से लिये नुकसानदेय साबित ना हो, लेकिन उनकी मौजूदगी विपक्ष के लिये कई विधानसभा सीटो पर मुश्किल खडी कर सकती है.

हालांकि मंगलवार रात हुयी इस मुलाकात के बारे मे  शिवपाल यादव ने साफ किया कि ये बस शिष्टाचार की मुलाकात थी, लेकिन सब जानते है कि चंद दिनो बाद चुनाव देखने जा रहे इस सूबे के लिये किसी भी नेता से से किसी भी बडे नेता की मुलाकात बेमकसद नही है.

क्या हैं ओवैसी और शिवपाल की शिष्टाचार मुलाकात के मायने

ओवैसी ने मंगलवार रात शिवपाल यादव के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और करीब एक घंटे तक दोनो नेताओ के बीच बातचीत हुयी. इससे पहले भी असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव ने फरवरी के महीने में आजमगढ़ के विवाह समारोह में मुलाकात की थी. ओमप्रकाश राजभर और ओवैसी ने भी लखनऊ के एक होटल में डेढ़ घंटे तक मुलाकात कर चुके हैं

सोहेलदेव पार्टी के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर पहले ही भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाने की बात कह चुके हैं जिसमे शिवपाल यादव के भी शामिल होने की बात कही जा रही है. अगर इसे अमली जामा पहनाया जा सका तो ये मोर्चा हर राजनीतिक पार्टी के लिये नुकसानदेय होगा, लेकिन इसका सबसे ज्यादा असर समाजवादी पार्टी पर पडेगा क्योंकि इस मोर्चे के घटक दल समाजवादी पार्टी के पारंम्परिक वोटो पर सबसे ज्यादा सेंध लगायेगे. नतीजा ये होगा कि कई जगहो पर सपा ना सिर्फ छोटे मार्जिन से जीतने से चूकेगी बल्कि कई पिछडा और मुस्लिम बहुल इलाकों की कई सीटे ऐसी भी होंगी जहां पर आसान लगते हुये भी जीत पक्की करना मुश्किल होगा.

उलझन मे हैं शिवपाल, निगाहें अभी टिकी हैं अखिलेश यादव पर

बहरहाल शिवपाल यादव के इस मोर्चे मे शामिल होने और असदुद्दीन ओवैसी के साथ जाने में अभी  संशय है, क्योंकि मुलाकातों औऱ बैठकों से इतर माना यह भी जा रहा है कि शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीयअध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ दूरियां मिटाकर साथ में मिलकर चुनाव लड़ना चाहते हैं. इस मामले में शिवपाल यादव की तरफ से हर तरह की कोशिश भी की जा रही है. बांलाकि इसके भी अभी तक कोई सार्थक परिणाम नही आये हैं. ऐसे में चुनाव से पहले शिवपाल यादव अन्य छोटे दलों के साथ हाथ मिलाकर भागीदारी मोर्चे को बडा करने की तैयारी मे दिखते हैं. मंगलवार को शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात इसी कोशिश की तरफ बढा हुआ एक कदम हो सकती है,पर इन दिखती हुयी कोशिशों के बीच सूच्र बताते हैं कि शिवपाल यादव और समाजवादी पार्टी के बीच में भी अभी समझौते की पूरी गुंजाइश है.

समाजवादी पार्टी और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के समझौते के सियासी नतीजे

जानकारी के मुताबिक शिवपाल यादव को अगर समाजवादी पार्टी की तरफ से मौका मिलता है तो दोनो पार्टियां मिलकर चुनाव लड सकती हैं. माना ये भी जा रहा है कि अगर अखिलेश की तरफ से मजबूत वायदा मिलता है तो शिवपाल यादव अपनी पार्टी का समाजवादी पार्टी में विलय भी कर सकते हैं, पर इसकी उम्मीद कम दिखती है. क्योंकि प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का आकार इतना बड़ा हो चुका है कि समाजवादी पार्टी का विलय के लिये आगे बढना और प्रसपा के पदाधिकारियों को उचित स्थान दे पाना संभव नही होगा. ऐसे में अगर दोनों पार्टियों के बीच में सीटों पर समझौता होना ही आखिरी विकल्प है. ऐसे में समाजवादी पार्टी शिवपाल यादव को उनकी मजबूत जगहों पर कुछ सीटे दे सकती है, और शिवपाल यादव के चुने हुए कैंडिडेट समाजवादी पार्टी के साइकिल चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड सकते हैं. अगर ऐसा होता है तो इसके कई फायदे हो सकते हैं. सबसे बड़ा फायदा तो ये कि जिन जगहों पर समाजवादी पार्टी थोड़ी कमजोर है और शिवपाल यादव का वर्चस्व ज्यादा है वहां पर सीटें जीतने की संभावना बढ़ जाएगी. दूसरा फायदा ये कि आपस मे मिल जाने की वजह से शिवपाल यादव की तरफ से समाजवादी पार्टी को होने वाला संभावित नुकसान भी टल जाएगा और इसके अलावा समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह पर लड़ने की वजह से भविष्य में किसी भी तरीके का विश्वासघात होने की भी संभावना खत्म हो जाएगी.

भागीदारी मोर्चे की रणनीति

बहरहाल अभी दोनों नेताओं के बीच में सिर्फ शुरुआती स्तर की बात भी सिर्फ फोन पर ही हुई है जिसका जिक्र अखिलेश यादव कर चुके हैं. हांलकि शिवपाल यादव कई बार कह चुके है कि अखिलेश उन्हे मिलने का वक्त नही दे रहे है. शिवपाल यादव का मानना यह है कि इस मामले में जब तक अखिलेश यादव आमने-सामने बैठकर साफ तौर पर बातचीत नहीं करेंगे तब तक कुछ भी कहना संभव नहीं है. अब जबकि सितंबर का महीना भी खत्म होने वाला है और अभी तक दोनों नेताओं में कोई औपचारिक या अनौपचारिक मुलाकात तक नहीं हुई हैं, इसे भांपते हुये छोटे दलों की तरफ से शिवपाल यादव को लगातार संपर्क किया जा रहा है, जिससे उनके सामने भी आखिरी फैसला लेने की समस्या है. असदुद्दीन ओवैसी की शिवपाल से मुलाकात भी इसी का नतीजा है. इसके अलावा चंद्रशेखर रावण की अगुवाई वाली भीम आर्मी पार्टी भी सुभाषपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर से मुलाकात कर चुकी है और उसने साफ किया है कि वह भागीदारी संकल्प मोर्चे का हिस्सा होंगी. दोनों नेताओं की बातचीत में साथ आने पर सहमति भी बन गई है और आने वाले 27 अक्टूबर से मऊ जिले से मोर्चे की साझा बैठके और कार्यक्रम भी शुरू होंगे. 27 अक्टूबर को मऊ में एक बड़ा सम्मेलन करने का प्लान किया जा रहा है जिसमें मोर्चे के सभी घटक दल शामिल होंगे. उससे पहले जितने भी लोग इस मोर्चे में शामिल होना चाह रहे हैं उन सब के बीच बातचीत का दौर जारी है. ऐसे में शिवपाल यादव और असदुद्दीन ओवैसी की मुलाकात इस मायने से भी खास है कि अगर शिवपाल और ओवैसी एक साथ आते हैं तो उनकी अखिलेश यादव से समझौते की संभावना खत्म हो जाएगी.

क्या हो सकता है समझौते का फ़ॉर्मूला
ऐसा माने जाने की वजह भी साफ है. एक तो अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी यह नहीं चाहती कि किसी भी मोर्चे को अपनी पार्टी में शामिल किया जाए औऱ ये भी है कि पार्टी किसी भी ऐसे दल से समझौता नही करना चाहती जो उनके ही वोटों मे सेंध लगा दे, बल्कि समाजवादी पार्टी का इरादा है कि वह छोटे-छोटे दलों के साथ समझौता करके उनकी ताकत के हिसाब से उनको कुछ सीटें दें, जिससे कि जहां पर सपा का पलडा कमजोर है वहां पर छोटी पार्टी के नेता अपनी सीट जिता सकें. इस कड़ी में वह शिवपाल यादव की पार्टी प्रसपा को भी गिनते हैं. पर मुद्दा ये भी है कि शिवपाल यादव और ओवैसी के साथ जाने की अटकले अगर सही निकली तो समाजवादी पार्टी के लिए ओवैसी और प्रसपा दोनो कई जगहों से वोट काटने वाले दल की तरह ही होंगे.

बात ये भी है कि सामने से दिखनेवाली राजनीति से इतर एक कारगर रास्ता ये ही हो सकता है कि पारिवारिक मतभेद भुलाकर अखिलेश यादव, शिवपाल यादव के साथ मिलकर चुनाव लडें और उनकी क्षमता के हिसाब से उन्हे सीटे देकर अपने पास ज्यादा सीटे लाने के रास्ते को मजबूत करें. इसके अलावा बाकी मोर्टे के लोगो को अपने तरीके से संगठित होकर चुनाव लडनें दे, जिससे कि अपने क्षेत्र, जाति और व्यक्तिगत समीकरण के लिहाज से कुछ सीटे ला सके. ताकि चुनाव बाद के नतीजे अगर किसी उम्मीद को पूरा करते हुये दिखे तो बाकी लोगों से मदद ली जा सके.

भारत का सबसे बड़ा अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट चला रहा था मौलाना कलीम सिद्दीकी: ADG

UP: अवैध धर्मांतरण मामले में मेरठ से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना कलीम सिद्दीकी गिरफ्तार

UP News: यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने बताया कि अभी तक की जांच में मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट के खाते में एकमुश्त 1.5 करोड़ रूपये बहरीन देश से भेजे गये हैं. कुल 3 करोड़ रूपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं.

SHARE THIS:

लखनऊ. बीते दिनों उत्तर प्रदेश में एक बड़े स्तर पर अवैध धर्मांतरण (Illegal Religious Conversion) कराने वाले गिरोह के सरगना के साथ 10 लोगों को गिरफ्तार कर एक बडे़ सिंडिकेट का खुलासा किया था. इसी क्रम में मंगलवार रात मेरठ से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना कलीम सिद्दीकी (Maulana Kaleem Siddiqui) को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. यूपी एटीएस के अनुसार मौलाना कलीम विदेशों से मिल रही फंडिंग के आधार पर पूरे देश में संगठित ढंग से गैर मुस्लिमों को गुमराह कर रहा था. उन्हें डराकर भारत का सबसे बड़ा अवैध धर्मांतरण सिंडिकेट चला रहा था. राजधानी लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने इसकी जानकारी दी है.

एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार के मुताबिक बीते 20 जून को यूपी एटीएस ने धर्मांतरण कराने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड उमर गौतम समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया था. उमर गौतम और उसके साथियों को ब्रिटेन के ट्रस्ट से करीब 57 करोड़ रूपये की फंडिंग की गई थी. खर्च का ब्यौरा इन आरोपियों द्वारा नहीं दिया जा सका है. इस दौरान इस मामले में दिल्ली में रहने वाले मौलाना कलीम सिद्दीकी का भी नाम आया था. जोकि मूलत: यूपी के मुजफ्फरनगर जिले के फुलत के रहने वाले हैं.

एडीजी ने बताया कि जांच में इस बात की पुष्टि हुई है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी भी देश में एक बडे़ स्तर पर अवैध धर्मांतरण के कार्य में संलिप्त है. विदेशों से मिल रही फडिंग के आधार पर पूरे देश में एक संगठित ढंग से गैर मुस्लिमों को गुमराह कर और डराकर भारत के सबसे बड़े अवैध धर्मांतरण का सिंडिकेट चला रहे हैं. यूपी एटीएस ने मौलाना कलीम सिद्दीकी को भी मेरठ से गिरफ्तार किया और उन्हें कोर्ट में पेश कर उनकी रिमांड के लिये कोर्ट में अर्जी भी दाखिल कर दी गई है.

एडीजी, कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने आगे बताया, “मौलाना कलीम सिद्दीकी जामिया इमाम वलीउल्ला नाम का एक ट्रस्ट चलाता है. जिसके जरिये सामाजिक सौहार्द के कार्यक्रमों की आड़ में विभिन्न प्रकार का लालच देकर अवैध धर्मांतरण का सिडिंकेट चला रहा है. मौलाना कलीम के ट्रस्ट में हवाला और विदेशों से होने वाली फंडिग के जरिये तमाम मदरसों को भी फंडिग की जाती है.”

उन्होंने आगे कहा कि फिर इन मदरसों में मौलाना कलीम पैगामे इंसानियत के संदेश देने के बहाने जन्नत और जहन्नुम जैसी बातों का लालच और भय दिखाकर इस्लाम स्वीकार करने के लिये प्रेरित करता है. जिसके बाद इन लोगो को प्रशिक्षित कर अन्य लोगों को धर्मांतरण के लिये प्रेरित करता है. मौलाना कलीम इस दौरान खुद के लिखे हुए साहित्य और दावा (धर्मांतरण के आमंत्रण) निशुल्क मुहैय्या कराता है.

इस दौरान मौलाना कलीम लोगों के बीच में इस बात का दावा करता है कि सिर्फ शरियत के अनुसार बनी व्यवस्था ही न्याय दे सकती है इसलिये तीन तलाक जैसे मामले भी शरियत के कानून के तहत ही निपटाये जाने चाहिए.

प्रशांत कुमार ने बताया कि यूपी एटीएस द्वारा बीते जून में धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार किये गये उमर गौतम से जुडे़ अल-हसन एजुकेशन एंड वेलफेयर ट्रस्ट में जिन संगठनों ने फडिंग की थी. उन्हीं के जरिये मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट जामिया ईमाम वलीउल्ला को भी अनियमित रूप से भारी मात्रा में फंडिंग की गई है. अभी तक की जांच में मौलाना कलीम सिद्दीकी के ट्रस्ट के खाते में एकमुश्त 1.5 करोड़ रूपये बहरीन देश से भेजे गये हैं. अब तक कुल 3 करोड़ रूपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं.

इतना ही नहीं इस दौरान उमर गौतम ने जिनका धर्मांतरण कराया है, उनके तार मौलाना कलीम सिद्दीकी से भी जुडे़ पाये गये हैं.

उन्होंने बताया कि मौलाना कलीम सिद्दीकी ने मेरठ कालेज से बीएससी की है. पीएमटी की भी परीक्षा पास की थी. लेकिन इस बीच इस्लामी साहित्यकारों और संस्थान से जुडे़ लोगों से प्रभावित होकर MBBS करने के बजाय दारूल उलूम नदवतुल उलमा, लखनऊ से शिक्षा हासिल की है.

UP Assembly Election 2022: मिले ओवैसी और शिवपाल, किसका होगा बेड़ा पार

यूपी की सियासत में अहम है ओवैसी और शिवपाल की मुलाकात. फाइल फोटो

Uttar Pradesh Politics: असदुद्दीन ओवैसी और शिवपाल यादव के बीच एक बार फिर मुलाकात हुई है. ये मुलाकात उत्तर प्रदेश की सियासत में खास अहमियत रखती है. दोनों के बीच गठबंधन की अटकलें चल रही हैं. हालांकि शिवपाल इस पर चुप हैं तो वहीं ओवैसी शिवपाल यादव को बड़ा नेता बता रहे हैं.

SHARE THIS:

लखनऊ. इन दिनों होने वाली हर सियासी मुलाकातों के बड़े मायने निकाले जा रहे हैं. हो भी क्यों न. विधानसभा के अहम चुनाव जो होने जा रहे हैं. ऐसी ही एक मुलाकात फिर से असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) और शिवपाल यादव (Shivpal Yadav) के बीच हुई. इसके बाद दोनों के बीच गठबंधन की अटकलें शुरू हो गईं, हालांकि मुलाकात के बाद शिवपाल ने तो कुछ नहीं बोला लेकिन, ओवैसी ने कहा कि शिवपाल यादव बड़े नेता हैं. ये उनकी कोई पहली मुलाकात नहीं थी. अब समझना ये है कि क्या दोनों के बीच गठबंधन हो पाएगा. सवाल ये भी है कि यदि गठबंधन होता है तो किसे फायदा होगा और किसे नुकसान और गठबंधन नहीं होता है तो क्या स्थिति बनेगी.

इसे समझने के लिए ये जानना जरूरी है कि ओवैसी और शिवपाल की यूपी चुनाव में क्या ताकत है. इसे पिछले इलेक्शन के आंकड़ों से समझा जा सकता है. ओवैसी की पार्टी 2017 का विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है. ज्यादातर लोग ये जानते हैं कि 38 में से 37 सीटों पर उसके उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई थी, लेकिन कई सीटों पर AIMIM ने तगड़ी ताकत दिखायी थी. कांठ में 23 हजार, ठाकुरद्वारा में 9 हजार, कुंदरकी में 7 हजार, संभल में 59 हजार, फिरोजाबाद में 11 हजार और मेहंदावल में 19 हजार वोट AIMIM कैण़्डिडेट को मिले थे. नई पार्टी के लिए ये उत्साहजनक नतीजे थे. इसीलिए ओवैसी इस बार पूरी ताकत लगा रहे हैं.

अब शिवपाल की पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया की बात कर लें. 2019 में पार्टी ने पहला चुनाव लड़ा. 2017 में AIMIM की ही तरह PSPL को 2019 में एक भी सीट नहीं मिली लेकिन, शिवपाल यादव की ताकत का पता जरूर चला. फिरोजाबाद, मोहनलालगंज, फर्रूखाबाद, सुल्तानपुर और इटावा में पार्टी को लगभग 10000 वोट मिले. फिरोजाबाद में तो शिवपाल ने 91 हजार वोट बटोरे और सपा प्रत्याशी को हरवा दिया. हालांकि फिरोजाबाद सीट के अलावा कोई दूसरी सीट ऐसी नहीं थी, जहां शिवपाल की पार्टी की वजह से सपा-बसपा गठबंधन का प्रत्याशी हारा हो, जैसा कि कहा जाता रहा है.

ये आम समझ है कि ओवैसी और शिवपाल को जो वोट मिले, वो भाजपा के कभी नहीं थे. AIMIM और PSPL को मिलने वाले वोट भाजपा विरोधी खेमे के ही वोट माने जाते हैं. यानि भाजपा विरोधी वोटों में ही दोनों ने सेंधमारी करके अपने लिए वोट जुटाए. अब दोनों साथ चुनाव लड़ेंगे तो इसके क्या नतीजे होंगे.

शिवपाल और ओवैसी के साथ-साथ लड़ने से क्या होगा

इसे काफी आसानी से समझा जा सकता है. शिवपाल को मिलने वाला वोट उन सपाइयों का है जो अखिलेश से नाराज हैं. यही गणित ओवैसी के साथ भी है. यानि सपा विरोधी वोट ही दोनों को मिलेंगे. कुल मिलाकर दोनों पार्टियों के चुनाव लड़ने से सपा का ही घाटा है, लेकिन इसके कुछ पहलू और भी हैं. साथ चुनाव लड़ने से अखिलेश यादव का चाहे जो घाटा या फायदा हो लेकिन, इन दोनों पार्टियों को भी अलग-अलग नुकसान उठाना पड़ सकता है. कैसे, इसे समझना जरूरी है.

यदि दोनों पार्टियां गठबंधन में लड़ती हैं तो कुछ सीटों पर AIMIM लड़ेगी और कुछ सीटों पर PSPL. अब AIMIM के साथ लड़ने के बाद ये जरूरी नहीं कि शिवपाल यादव का वोटर उनके साथ जुड़ा रहे. AIMIM की छवि कट्टर मुस्लिम पार्टी की है. ऐसे में शिवपाल यादव के साथ बड़ा रिस्क खड़ा हो जाएगा. इसकी आशंका प्रबल है कि उनका हिन्दू वोटर ध्रुवीकरण के कारण शिवपाल को छोड़कर भाजपा में चला जाए. भाजपा से भी नाराज हुआ तो किसी और पार्टी में लेकिन, शिवपाल का साथ छोड़ सकता है.

इस गठबंधन से रिस्क ओवैसी को भी है. ओवैसी का वोटर उन्हें तो जिताना चाहता है, लेकिन उनकी गैरहाजिरी में वो अखिलेश यादव की तरफ झुका रहेगा. गठबंधन के चलते जिस सीट पर ओवैसी का प्रत्याशी नहीं उतरेगा उस सीट पर ओवैसी का वोटर शिवपाल की जगह अखिलेश को तवज्जो देगा. मतलब ये है कि AIMIM और PSPL को एक दूसरे के वोट ट्रांसफर होते दिखाई नहीं दे रहे हैं.

अब अखिलेश यादव और भाजपा पर क्या पड़ेगा फर्क

शिवपाल और ओवैसी दोनों अखिलेश के घर में ही सेंधमारी करते रहे हैं या करेंगे. ऐसे में दोनों गठबंधन में चुनाव लड़ेंगे तो इससे अखिलेश यादव को कुछ फायदा हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि गठबंधन के बावजूद दोनों ज्यादा वोट नहीं खींच पाएंगे. लिहाजा अखिलेश के वोट बंटने से बच जाएंगे. ऐसा होने पर भाजपा को उतना फायदा नहीं होगा जितने की उसे अपेक्षा होगी.

अखिलेश यादव को नुकसान तब हो सकता है जब AIMIM और PSPL अलग-अलग चुनाव लड़े. ओवैसी और शिवपाल दोनों अलग-अलग अखिलेश के परम्परागत वोटरों में सेंधमारी करेंगे. अखिलेश यादव के लिए ये ज्यादा बड़ी चोट होगी. इसका सीधा फायदा भाजपा को मिलेगा.  इस गणित को शिवपाल यादव बेहतर ढंग से समझ रहे होंगे. इसीलिए ओवैसी के बार-बार मिलने के बावजूद शिवपाल लगातार गठबंधन पर बोलने से परहेज करते रहे हैं.

(डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi किसी भी तरह से उत्तरदायी नहीं है)

लखनऊ:छोटी सी उम्र में रिकॉर्ड के फलक पर 11 साल के व्योम ने  लहराया परचम

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने वाद्य यंत्र बजाते होनहार व्योम

व्योम लखनऊ के निराला नगर के निवासी है और सी.एम.इस के छात्र है. 11 साल के व्योम ने संगीत, खेल और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में 35 रिकॉर्ड हासिल किए हैं. साथ ही प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021 से भी किया गया है सम्मानित.

SHARE THIS:

आज के ज्यादातर बच्चें जहां ऑनलाइन की दुनिया में व्यस्त रहते है तो वही लखनऊ के रहने वाले होनहार व्योम आहूजा ने छोटी सी उम्र में वह हासिल कर लिया है जो बड़े-बड़े धुरंधर पूरे जीवन में हासिल नहीं कर पाते. व्योम लखनऊ के निराला नगर के निवासी है और सी.एम.इस के छात्र है. 11 साल के व्योम ने संगीत, खेल और ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में 35 रिकॉर्ड हासिल किए हैं. साथ ही प्रधानमंत्री बाल पुरस्कार 2021 से भी किया गया है सम्मानित.
व्योम 12 तरह के वाद्य यंत्र बजाना भी जानते है. खेल में भी खास रूचि है. व्योम नाट्य काला में भी रूचि रखते है और कई नुक्कड़ नाटक भी कर चुके है साथ ही अलग अलग शहरों में परफॉरमेंस के लिए भी बुलाया जाता है.

ढेरो इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स, एशिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स पर लहराया अपना परचम.
लोकल18 से खास बातचीत में व्योम ने अपनी कहानी बताई है.
व्योम को चेस में भी एशिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स हासिल किया है.अब वह अपना अपना एक बोर्ड गेम भी लॉन्च करने वाले है जो की महाभारत से प्रेरित होगा.

Meerut: अवैध धर्मांतरण के आरोप में ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष मौलाना Kaleem Siddiqui गिरफ्तार

मेरठ से गिरफ्तार हुए मौलाना कलीम सिद्दीकी

Forceful Conversion in UP: गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब मौलाना कलीम सिद्दीकी मंगलवार शाम सात बजे अन्य मौलानाओं के साथ मेरठ के लिसाड़ीगेट में हूमायुंनगर की मस्जिद माशाउल्लाह के इमाम शारिक के आवास पर एक कार्यक्रम में आए थे.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 14:25 IST
SHARE THIS:

लखनऊ/मेरठ. अवैध धर्मांतरण (Illegal Religious Conversion) के मामले में उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (UP ATS) ने मेरठ (Meerut) से ग्लोबल पीस सेंटर के अध्यक्ष कलीम सिद्दीकी (Kaleem Siddiqui) को गिरफ्तार किया है. कलीम सिद्दीकी उम्र गौतम का करीबी बताया जा रहा है. मौलाना कलीम जमीयत-ए- वलीउल्लाह का अध्यक्ष भी है. जानकारी के मुताबिक मौलाना कलीम को हवाला के जरिए विदेशों से फंडिंग की जाती थी. यूपी एटीएस लंबे समय से उस पर नजर रखे हुए थी

मौलाना कलीम पर आरोप है कि वह लोगों को प्रलोभन देकर शरीयत व्यवस्था लागू करने और जनसंख्या अनुपात बदलने के लिए वृहद स्तर पर धर्मांतरण करवा रहा था. गिरफ्तारी उस वक्त हुई जब मौलाना कलीम सिद्दीकी मंगलवार शाम सात बजे अन्य मौलानाओं के साथ मेरठ के लिसाड़ीगेट में हूमायुंनगर की मस्जिद माशाउल्लाह के इमाम शारिक के आवास पर एक कार्यक्रम में आए थे. इसके बाद वे अचानक से लापता हो गए. परिजनों ने उनके मोबाइल पर सम्पर्क किया, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ मिला. देर रात तक हंगामा चलता रहा. बाद जानकारी मिली कि मौलाना को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया है.

ड्राइवर समेत तीन अन्य मौलाना भी गिरफ्त
मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र के फूलत निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी के साथ उनके ड्राइवर और तीन अन्य मौलानाओं को एटीएस ने गिरफ्तार किया है. मौलाना सिद्दीकी पर आरोप है कि वह दिल्ली में कई शैक्षणिक, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं की आड़ में अवैध धर्मांतरण का काम करता है. वह गैर मुस्लिमों को पैसों और नौकरी का प्रलोभन देकर उन्हें धर्मांतरण के लिए प्रेरित करता है, बाद में उन्हें भी इसी काम में लगा देता है.

अभिनेत्री सना खान का पढ़वाया था निकाह
जानकारी के मुताबिक मौलाना कलीम सिद्दीकी ने ही बॉलीवुड अभिनेत्री सना खान का निकाह पढ़वाया था. इतना ही नहीं गत 7 सितंबर को मुंबई में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के द्वारा आयोजित राष्ट्र प्रथम और राष्ट्र सर्वोपरि कार्यक्रम में भी मौलाना कलीम शामिल हुआ था.

Kanpur Shootout: पत्नी ऋचा के संपर्क में है आरोपी विकास दुबे, 2 जुलाई को फोन कर कहा था- भाग जाओ

Kanpur Encounter: सूत्रों के अनुसार विकास दुबे ने 2 जुलाई को रात 2 बजे पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था.

Kanpur Encounter: सूत्रों के अनुसार विकास दुबे ने 2 जुलाई को रात 2 बजे पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था.

SHARE THIS:

लखनऊ. कानपुर (Kanpur) के विकरू गांव में एक सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार होने वाले मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) की पत्नी ऋचा की तलाश में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है. पुलिस से मिली जानकारी के मुतबिक 2 जुलाई को रात 2 बजे विकास दुबे ने पत्नी ऋचा को फोन करके भाग जाने को कहा था. बताया जा रहा है कि ऋचा बेटे को साथ लेकर फरार हो गई. वहीं, भागते वक्त सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर भी साथ ले गई हैं. सूत्रों के अनुसार, ऋचा पति विकास दुबे के हर गुनाह की राजदार हैं. फिलहाल पुलिस की कई टीमें फरार आरोपी विकास दुबे और उसकी पत्नी ऋचा की तलाश में छापेमारी कर रही है.

उधर, सीओ समेत 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार चल रहे मुख्य आरोपी विकास दुबे (Vikas Dubey) पर अब इनाम की राशि बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दी गई है. बता दें कि इस बड़े हत्याकांड को अंजाम देकर फरार चल रहे विकास दुबे की गिरफ्तारी पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. 40 थानों की फोर्स, एक हजार से अधिक दरोगा, क्राइम ब्रांच और एसटीएफ की टीम उसकी तलाश में जुटी है. बावजूद उसके 72 घंटे से ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी विकास दुबे और उसके गुर्गे पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं.

कानपुर: CO देवेंद्र मिश्रा के परिजनों से मिले AAP सांसद संजय सिंह, शहीद का लेटर किया ट्वीट

फरार चल रहे विकास दुबे की तलाश में पुलिस चप्पे-चप्पे को छान रही है. पुलिस को आशंका है कि वह चंबल के रास्ते बीहड़ों से होते हुए मध्य प्रदेश व राजस्थान भाग सकता है. पुलिस ने चंबल में भी तलाशी अभियान चला रही है. बता दें कि विकास दुबे के पास से पुलिस से लूटी गई एके-47 और अन्य असलहा मौजूद हो सकता है.

Lucknow: चुनाव प्रभारी बनने के बाद धर्मेन्द्र प्रधान का पहला दौरा, चुनावी रोडमैप पर करेंगे मंथन

यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान आज से तीन दिवसीय दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे हैं.

UP Assembly Election: धर्मेन्द्र प्रधान यूपी की चुनावी टीम घोषणा के बाद मुर्हूत की जगह रिजल्ट पर ज्यादा फोकस करते हुए पितृपक्ष में चुनावी अभियान की शुरूआत करने जा रहे है. कई राज्यों का अनुभव समेटे धर्मेन्द्र प्रधान ने यूपी को लेकर होमवर्क तो कर लिया है लेकिन वो सबसे पहले यूपी की टीम से फीडबैक लेंगे.

SHARE THIS:

लखनऊ. 2022 के विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2022) में 350 के लक्ष्य को साधने के लिए यूपी बीजेपी (UP BJP) ने अपनी चुनावी तैयारियों को धार देना अभी से शुरू कर दिया है. यूपी में बीजेपी के जीत का खाका तैयार करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री और यूपी बीजेपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) बुधवार से अपने तीन दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंच रहे है. यूपी बीजेपी चुनाव प्रभारी के रूप में धर्मेंद्र प्रधान का यह पहला दौरा है. प्रधान आज दोपहर 2.30 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचेंगे. इसके बाद शाम 5 बजे बीजेपी दफ्तर पर 2 दौर में बैठकों का दौर चलेगा. इस बैठक में शामिल होने के लिए यूपी के प्रभारी राधा मोहन सिंह आज ही लखनऊ पहुंचे हैं. धर्मेंद्र प्रधान के साथ इस बैठक में सभी सह चुनाव प्रभारी भी शामिल होंगे.

शाम 5 बजे होने वाली बैठक में सभी प्रभारियों के साथ संगठन के पदाधिकारी, संगठन मंत्री सुनील बंसल, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह शामिल होंगे. इस बैठक में सभी मंत्रिपरिषद के सदस्यों को भी बुलाया गया है.  कई राज्यों के प्रभारी रहे धर्मेन्द्र प्रधान यूपी की चुनावी टीम घोषणा के बाद मुर्हूत की जगह रिजल्ट पर ज्यादा फोकस करते हुए पितृपक्ष में चुनावी अभियान की शुरूआत करने जा रहे है. कई राज्यों का अनुभव समेटे धर्मेन्द्र प्रधान ने यूपी को लेकर होमवर्क तो कर लिया है लेकिन वो सबसे पहले यूपी की टीम से फीडबैक लेंगे.

इस दौरान वो ये समझने की कोशिश करेंगे कि फिलहाल यूपी का सियासी समीकरण क्या कहता है? 2017 के चुनावी जीत में किन किन फैक्टर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी और इन्हीं बिंदुओं को ध्यान में रखकर प्रधान अपने चुनावी तैयारियों को लेकर आगे बढ़ेंगे, जिसकेलिए आज की बैठक बड़ी भूमिका निभाने वाली है.

महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर कांग्रेस के 10 सवाल: कहा- योगी राज में हो चुकी 21 साधु-संतों की हत्या

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रमोद तिवारी ने महंत नरेंद गिरि की मौत पर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं.

UP Congress Narendra Giri Case: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और प्रमोद तिवारी ने महंत नरेंद गिरि की मौत पर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं. कहा कि 21 साधु-संतों की हत्या योगी राज में हो चुकी है. मामले की सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट की डीविजनल बेंच की निगरानी में CBI जांच कराई जाए.

SHARE THIS:

लखनऊ. प्रयागराज (Prayagraj) में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की संदिग्ध मौत के बाद विपक्षी दल UP पुलिस की भूमिका पर हमलावर हैं. पुलिस पर कई गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं. इसी को लेकर कांग्रेस ने राजधानी लखनऊ स्थित कांग्रेस मुख्यालय पर प्रेस कांफ्रेस की है, जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इस घटना को लेकर 10 गंभीर सवाल उठाये हैं. इसके साथ इस देश के विभिन्न साधु-संतों की तर्ज पर इस पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट या फिर हाईकोर्ट की डीविजनल बेंच की निगरानी में CBI जांच कराये जाने की मांग की है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि ‘महंत नरेन्द्र गिरि की मौत के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. जिनमें पहला सवाल ये है कि आखिर सरकार और उसकी पुलिस बिना पोस्टमार्टम के ही महंत नरेन्द्र गिरि की मौत को आत्महत्या क्यों बता रही है? दूसरा सवाल ये कि अगर महंत नरेन्द्र गिरि ने आत्महत्या ही की थी, तो उनके शव को पुलिस के आने से पहले क्यों और किसने उतारा? तीसरा सवाल ये है कि जब महंत नरेन्द्र गिरि के शुभचितंक ये बता रहे हैं कि वे कुछ लिख नहीं सकते थे. तो आखिर इतना लंबा सुसाइड लैटर उन्होंने कैसे लिखा?

चौथा सवाल ये कि अगर सुसाइड नोट में तीन लोगों के नाम का जिक्र है तो आखिर अबतक सिर्फ 1 ही व्यक्ति को ही क्यों गिरफ्तार किया गया? पांचवा सवाल ये है कि आखिर इस मामले में जिस सत्ताधारी नेता, अधिकारी और अन्य लोगों के नाम आ रहे हैं, उनसे अबतक पूछताछ क्यों नही जा रही है? सरकार सिर्फ इस मामले को आत्महत्या बताने में जुटी है. इसलिये कांग्रेस इस मामले की सुप्रीम या हाई कोर्ट के जज की निगरानी में CBI जांच की मांग करती है.’

प्रमोद तिवारी ने लगाए ये आरोप

इस दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि ‘योगी सरकार में साधु-संतों की हत्या का ये कोई पहला या दूसरा मामला नहीं है. अब तक UP के अंदर योगी सरकार में 21 साधु-संतों की हत्या हो चुकी है. तो योगी राज में सबसे ज्यादा अगर किसी पर मुसीबत आई है. इस दौरान भी कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं. जिनमें 12 पेज का सुसाइड नोट भी शामिल है. क्रिमिनल हिस्ट्री में अबतक इतना बडा सुसाइड नोट मैने पहले कभी नहीं देखा. अक्सर सुसाइड नोट 4-6 लाइन के साथ अधिकतम 1 पन्ने का होता है. क्योंकि कहा जाता है कि अगर बहुत सोचने-समझने का समय मिला तो सुसाइड के इरादे बदल जाते हैं. आखिर BJP सरकार में उन पर ऐसा कौन सा दबाव था जो वो झेल नहीं पा रहे थे?

उन्होंने कहा कि महंत नरेन्द्र गिरी की मौत उनके शयनकक्ष में नहीं उनके गेस्ट रूम में हुई है. जिसमें एक नहीं बल्कि 2 दरवाजे हैं. तो फिर बाहर का दरवाजा तोड़कर क्यों शव उतारा गया? क्या कारण है कि महंत नरेन्द्र गिरी के पोस्टमार्टम में इतना विलंब किया जा रहा है? ये वो मुख्य सवाल है जो कही न कही पुलिस की थ्योरी पर सवाल खडा कर रहे हैं. इसलिये हम हाथरस कांड की तर्ज पर SC/HC के जज की निगरानी में CBI जांच की मांग कर रहे हैं.’

UP Teacher Recruitment 2021: यूपी में होगी बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती, UPTET के बाद शुरू हो सकती है प्रक्रिया

UPTET 2021 का आयोजन नवंबर 2021 में कराया जा सकता है.

UP Teacher Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही है. ताजा जानकारी के अनुसार सरकार इसी महीने इस सम्बन्ध में घोषणा कर सकती है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 09:54 IST
SHARE THIS:

नई दिल्ली. UP Teacher Recruitment 2021: सरकारी नौकरियों की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए बड़ी खुशखबरी है. उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में शिक्षकों की बड़े पैमाने पर भर्ती की योजना बना रही है. ताजा जानकारी के अनुसार सरकार इसी महीने इस सम्बन्ध में घोषणा कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सरकार ने भर्ती आयोजित कराने वाली एजेंसी से इस सम्बन्ध में प्रस्ताव भी मांगा है.

साथ ही ये भी जानकारी सामने आ रही है कि UPTET 2021 का आयोजन नवंबर 2021 में कराया जा सकता है. अगर सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो UPTET के बाद दिसंबर में शिक्षक भर्ती परीक्षा भी आयोजित कराई जा सकती है.

UP Teacher Recruitment 2021: कमेटी का किया गया है गठन
बता दें कि हाल ही में यूपी सरकार ने प्रदेश में शिक्षकों की भर्ती के लिए 3 सदस्यीय कमेटी का भी गठन किया था. जिसका मुख्य उद्देश्य था की वह प्रदेश भर के विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को चिन्हित करे. रिपोर्ट्स के अनुसार वर्तमान में विद्यालयों में शिक्षकों के तकरीबन 70,000 से अधिक पद रिक्त हैं.

UP Teacher Recruitment 2021: हो सकता है प्रमुख भर्ती अभियान
अगर इन सभी पदों पर भर्ती होती है तो यह राज्य का प्रमुख शिक्षक भर्ती अभियान बन सकता है. गौरतलब है की उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में शिक्षकों के कुल 51,112 रिक्त पद होने की जानकारी दी है. इन पदों को मौजूदा रिक्तियों में विलय किया जा सकता है.

ये भी पढ़ें-
Teacher Jobs : प्राइमरी टीचर्स की 9300 से अधिक नौकरियां, देखें डिटेल
10वीं से लेकर ग्रेजुएशन पास तक के लिए निकली है नौकरियां, जानें डिटेल

UP Election 2022 : उलेमा परिषद और पीस पार्टी ने मिलाया हाथ, कहा - सभी पार्टियों को देंगे चैलेंज

आरयूसी और पीस पार्टी के बीच गठबंधन हुआ.

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरणों में यह गठबंधन अहम माना जा सकता है क्योंकि आज़मगढ़ और पूर्वी यूपी के समुदायों में दोनों दलों की पकड़ है. कैसे हुआ गठबंधन और कितना अहम है, जानिए.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 22, 2021, 08:28 IST
SHARE THIS:

लखनऊ. डॉ. मोहम्मद अयूब के नेतृत्व वाली पीस पार्टी और मौलाना आमिर रशदी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल ने हाथ मिला लिये हैं. दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश चुनाव 2022 से पहले संयुक्त लोकतांत्रिक गठबंधन को ऐलान मंगलवार को किया. डॉ. अयूब और मौलाना रशदी ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, ‘सेक्युलर सियासी पार्टियां मुस्लिमों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही हैं. सेक्युलर पार्टियों की राज्य सरकारों ने मुस्लिम समुदाय के विकास और कल्याण के लिए कोई ठोस काम नहीं किया.’ इस गठबंधन ने सेक्युलर और मानवतावादी सरकार देने के दावे के साथ दावा किया कि सभी पार्टियों को चुनौती पेश करने की तैयारी है.

दोनों नेताओं ने संयुक्त तौर पर बयान दिया कि उनका गठबंधन जनता को सही मायने मे सेक्यूलर और भाईचारे की सरकार देगा. आज तक जितने भी राजनीतिक दलों ने सरकार बनाई, किसी ने धर्म के नाम पर भेद किया तो किसी ने वोटों का इस्तेमाल. कांग्रेस, सपा और बीजेपी, सबने एक विशेष वर्ग के लिए काम किया. दलितों और पिछड़े मुस्लिमों के साथ अन्याय ही होता रहा है. ‘ज़रूरी हो गया था कि ऐसा विकल्प तैयार किया जाये जो समाज के सभी तबकों के लिए काम करे इसलिए यूनाइटेड डेमोकेटिक अलाइंस बनाया है. हम मानववादी सरकार बनाएंगे.’

ये भी पढ़ें : पूर्व सांसद का दावा, ‘हमारे विधायकों पर दावा कर रहे नेता खुद BJP में आने को बेताब’, सपा, बसपा पर साधा निशाना

‘गठबंधन का किसी से कोई द्वेष नहीं’
डॉ. अयूब ने कहा, ‘ये गठबंधन तमाम पार्टियों के लिए चैलेंज होगा, जिन्होंने जन विरोधी कामों के अलावा कुछ नहीं किया. बेरोज़गारी बढ़ती जा रही है, लॉ एंड आर्डर नहीं है और जो हक की आवाज़ उठाता है, उसे चुप करा दिया जाता है.’ वहीं, मौलाना रशदी ने कहा, ‘मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो रहा है इसलिए बीजेपी जीत रही है. सेक्यूलर दल मिलकर विकल्प बना रहे हैं लेकिन हमारे इस गठबंधन में किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं है.’

सांप्रदायिकता, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों से प्राथमिकता के साथ निपटने की घोषणा करते हुए इस गठबंधन ने चुनावी ताल ठोकी. आपको बता दें कि पीस पार्टी पूर्वी यूपी के खास तौर से बुनकर समुदायों के बीच पैठ रखती है, जिसने 2012 के चुनाव में चार विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की थी. वहीं, आरयूसी का आधार आज़मगढ़ के क्षेत्र में बताया जाता है.

UP B.Ed Counselling 2021 : पहले दिन 13225 अभ्यर्थियों ने लॉक की च्वाइस

UP B.Ed Counselling 2021 : काउंसलिंग का दूसरा चरण 25 सितंबर से शुरू होगा.

UP B.Ed Counselling 2021 : यूपी बीएड काउंसलिंग 2021 की प्रक्रिया में मंगलवार से काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन के साथ कॉलेजों की च्वाइस लॉक करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई. पहले दिन 13000 से अधिक अभ्यर्थियों ने च्वाइस लॉक किए.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 23:48 IST
SHARE THIS:

नई दिल्ली. UP B.Ed Counselling 2021 : उत्तर प्रदेश में संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2021 की ऑनलाइन काउंसलिंग जारी है. पहले चरण की काउंसलिंग के लिए अभी तक 31800 अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 17 सितंबर से शुरू है. जबकि मंगलवार 21 सितंबर से रजिस्ट्रेशन के साथ च्वाइस फिलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है. च्वाइस फिलिंग 24 सितंबर तक होगी. इसके बाद 25 सितंबर को अलॉटमेंट होगा. इसी के साथ दूसरे चरण की काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू होगा.

बीएड प्रवेश परीक्षा समन्वयक प्रोफेसर अमिता बाजपेई के अनुसार, पहले दिन 13225 अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन च्वाइस लॉक किया. रजिस्ट्रेशन और च्वाइस भरने की, दोनो प्रक्रिया 23 सितंबर तक जारी रहेगी. इसके बाद 25 सितंबर को कॉलेज अलॉटमेंट किया जाएगा.

26 से मिलेगा आवंटन पत्र 

समन्वयक ने बताया कि 26 से 29 सितंबर के बीच अभ्यर्थी शेष शुल्क ऑनलाइन जमा करके अपनी सीट के आवंटन का पत्र प्राप्त कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि काउंसलिंग के अगले चरण में 75,001 से 2,00,000 तक की रैंक वाले अभ्यर्थियों का रजिस्ट्रेशन होगा.
दो लाख से अधिक सीटों पर होगे एडमिशन

काउंसलिंग के लिए शिक्षण संस्थानों के विवरण और प्रवेश प्रक्रिया की पूरी जानकारी के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.lkouniv.ac.in पर विजिट कर सकते हैं. यूपी बीएड की प्रवेश प्रक्रिया में 16 राज्य विश्वविद्यालयों के अंतर्गत आने वाले ले 2479 राजकीय, सहायता प्राप्त महाविद्यालय, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय शामिल हैं. बीएड की कुल 2,35,310 सीटें हैं. इसमें से 7830 सीटें विश्वविद्यालयों और राजकीय या सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में हैं. जबकि 2,27,480 सीटें स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों में हैं. इसके अलावा प्रत्येक महाविद्यालय में 10 प्रतशित अतिरिक्त सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए होंगी. हालांकि, इडब्लूएस के लिए अतिरिक्त सीटें अल्पसंख्यक संस्थानों में नहीं होंगी.

ये भी पढ़ें

RPSC RAS-RTS Exam : अब एक ही दिन होगी RAS की प्रारंभिक परीक्षा, आयोग ने बदला कार्यक्रम

Sarkari Naukri 2021: छत्तीसगढ़ में डिप्लोमा पास के लिए निकली है नौकरियां, जानें डिटे

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि की मौत की जांच के लिए SIT गठित

Mahant Narendra Giri death: महंत नरेंद्र गिरी मामले में आधा दर्जन से ज्यादा लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया.

Prayagraj News: डीआईजी, प्रयागराज ने विशेष जांच दल का गठन कर टीम का नेतृत्व डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान को सौंपा है. मामले के विवेचक इंस्पेक्टर महेश भी एसआईटी में शामिल किए गए हैं.

SHARE THIS:

प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) मामले की जांच के लिए डीआईजी, प्रयागराज ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है. डिप्टी एसपी अजीत सिंह चौहान के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है. मामले के विवेचक इंस्पेक्टर महेश भी एसआईटी में शामिल किए गए हैं.

जानकारी के अनुसार डीआईजी सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी द्वारा जार्जटाउन थाने में दर्ज एफआईआर की जांच के लिए जो एसआईटी गठित की गई है, उसकी अध्यक्षता सीओ अजीत सिंह चौहान करेंगे. इसमें दो सीओ समेत इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के 18 जांच अधिकारी शामिल किए गए हैं. सीओ आस्था जायसवाल और विवेचक महेश सिंह भी एसआईटी में शामिल हैं,

बता दें मामले से जुड़े 2 वीडियो की जांच में पुलिस जुटी हुई है. एक वीडियो के आधार पर नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल करने की चर्चा है. वहीं सुसाइड नोट में भी नरेंद्र गिरि ने इस बात का जिक्र किया है. दूसरा वीडियो महंत नरेंद्र गिरि ने खुद बनाया था, जिसमें अपने खिलाफ हो रही साजिश के बारे में बताया है. दूसरा वीडियो महंत नरेंद्र गिरि के मोबाइल से मिला है. इन दोनो वीडियो की जांच से बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है. इन वीडियो के आधार पर बड़ी साजिश होने की आशंका जताई जा रही है. जांच के बाद हो सकता है मामले में बड़ा खुलासा हो.

बता दें महंत नरेंद्र गिरि आत्महत्या मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में दर्ज की गई है. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अमर गिरि पवन महाराज की तरफ से दर्ज करवाई गई. एफआईआर में सिर्फ उनके शिष्य आनंद गिरि को नामजद आरोपी बनाया गया है. आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है.

एसआईटी में हैं 18 सदस्य

sit, Prayagraj News, Mahant Narendra Giri Death Case, UP News,

UP: प्रयागराज में महंत नरेंद्र गिरी मौत मामले की जांच में गठित एसआईटी के सदस्य

पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है और उसे प्रयागराज ले आई है. पुलिस लाइन में आनंद गिरि से पूछताछ चल रही है. वहीं बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

एफआईआर के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि सोमवार दोपहर लगभग 12:30 बजे बाघम्बरी गद्दी के कक्ष में भोजन के बाद रोज की तरह विश्राम के लिए गए थे. रोज 3 बजे दोपहर में उनके चाय का समय होता था, लेकिन चाय के लिए उन्होंने पहले मना किया था और यह कहा था जब पीना होगा तो वह स्वयं सूचित करेंगे. शाम करीब 5 बजे तक कोई सूचना न मिलने पर उन्हें फोन किया गया. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि का फोन बंद था. इसके बाद दरवाजा खटखटाया गया तो कोई आहट नहीं मिली. जिसके बाद सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी, धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला. तब नरेन्द्र गिरि पंखे में रस्सी से लटकते हुए पाए गए.

FIR में आगे लिखा हुआ है कि जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर नरेंद्र गिरि को नीचे उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. एफआईआर में जिक्र है कि महाराज पिछले कुछ महीने से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे. यह बात कभी-कभी वह स्वयं भी कहते थे कि आनंद गिरि हमें बहुत परेशान करता रहता है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: चेले ही नहीं ये SP नेता भी थे संपत्ति विवाद के घेरे में

पुलिस के लिए पहेली बनी है महंत नरेंद्र गिरि की मौत (File photo)

Mahant Narendra Giri death: अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. इस मामले में सुसाइड नोट में महंत ने मौत की वजह साफ तो कर दी है, लेकिन अब संपत्ति विवाद में सपा विधायक का नाम भी सामने आ गया है.

SHARE THIS:

लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (All India Akhara Parishad) के अध्यक्ष और बाघंबरी मठ (Baghmbri Math) के प्रमुख महंत नरेंद्र गि​रि की मौत यूपी पुलिस के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है. यह घटना सूबे में सुर्खियां बनी है. सुसाइड नोट सामने आने के बाद महंत का चेला गिरफ्तार हो गया है, लेकिन कई और ऐसे राजदार हैं जो पूरे मामले को संदिग्ध बना रहे हैं. पुलिस एक एक कड़ी को जोड़कर आगे बढ़ रही है, हालांकि महंत नरेंद्र गिरि की मौत की असली वजह क्या है इस रहस्य से जांच के बाद ही पर्दा उठेगा. इतना तो तय है कि मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर की संपत्ति को लेकर जो विवाद शुरू हुआ था, उसने महंत नरेंद्र गिरि की जान ले ली.

दरअसल, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि का हंड़िया के सपा विधायक से जमीन को लेकर विवाद हुआ था. यह विवाद 2012 में सपा नेता और हंडिया से विधायक रहे महेश नारायण सिंह से जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर हुआ था. फरवरी 2012 में महंत ने सपा नेता महेश नारायण सिंह, शैलेंद्र सिंह, हरिनारायण सिंह व 50 अज्ञात के खिलाफ जार्ज टाउन में मुकदमा दर्ज कराया गया था. इस मामले में दूसरे पक्ष ने भी नरेंद्र गिरि, आनंद गिरि व दो अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी.

मठ की जमीन का कुछ हिस्सा महंत नरेंद्र गिरि ने बेच दिया था, ताकि जीर्ण शीर्ण हो चुके मठ का जीर्णोद्धार किया जा सके. बताया जा रहा है कि सपा विधायक महेश नारायण दबंगई के बल पर बगैर पूरा पैसा दिए जमीन लिखवाना चाह रहे थे. इसके लिए वह लगातार महंत नरेंद्र गिरि पर दबाव बना रहे थे. महंत नरेंद्र गिरी इस दबाव के आगे झुके नहीं और जमीन की रजिस्ट्री के लिए तैयार नहीं हुए.

जिसके बाद मठ में सपा विधायक असलहों के साथ पहुंचे थे काफी हो हंगामा भी हुआ था. बाद में पैसे देने के बाद ही महंत नरेंद्र ​गिरि ने जमीन की रजिस्ट्री की थी. मौजूदा समय में 7 बीघे जमीन की कीमत 40 करोड़ रुपये बताई जा रही हैं. इस जमीन बिक्री को लेकर भी समय समय पर महंत नरेंद्र गिरी पर आरोप लगते रहे हैं.

करोड़ों में है मठ की संपत्ति

मठ बाघम्बरी गद्दी और बड़े हनुमान मंदिर दोनों पंचायती अखाड़ा निरंजनी के तहत नहीं आते हैं, बल्कि सम्पत्ति मठ बाघंबरी गद्दी के अधीन आती है. मौजूदा समय में मठ की गद्दी में जहां महंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय संचालित हो रहा है, वहीं पर एक गौशाला के साथ ही कुंभ के दौरान यहां पर तीन मंजिला एक बड़ा भव्य गेस्ट हाउस भी बनाया गया है. कुल मिलाकर इस मठ और संस्कृत महाविद्यालय की संपत्ति करोड़ों में है, जिसको लेकर महंत नरेंद्र ​गिरि और स्वामी आनंद ​गिरि के बीच विवाद शुरू हो गया था.

महंत नरेंद्र गिरि केस की जांच के लिए DIG प्रयागराज ने SIT का गठन किया गया है. यूपी सरकार ने इस मामले की जांच के निर्देश दिए हैं.

UPTET Exam 2021: UPTET को लेकर सामने आई महत्वपूर्ण जानकारी, देखें डिटेल

UPTET 2021 : उम्मीदवार काफी समय से परीक्षा के तारीखों का इंतजार कर रहे हैं.

UPTET Exam 2021: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में परीक्षा की तारीखों को लेकर काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थी. लेकिन हालिया अपडेट से तस्वीर साफ़ होती नजर आ रही है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 17:38 IST
SHARE THIS:

नई दिल्ली. UPTET 2021: उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET 2021) को लेकर बड़ी जानकारी सामने आ रही है. दरअसल विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में परीक्षा की तारीखों को लेकर काफी समय से अटकलें लगाई जा रही थी. लेकिन हालिया अपडेट से तस्वीर साफ़ होती नजर आ रही है. गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड (UPBEB) द्वारा साल में एक बार UPTET परीक्षा का आयोजन किया जाता है. हांलाकि UPTET 2021 को लेकर अभी तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है. इच्छुक उम्मीदवार काफी समय से परीक्षा के तारीखों का इंतजार कर रहे हैं. आयोजन में इतना विलम्ब होने से अभ्यर्थी परेशान भी हैं.

लेकिन अब ऐसा लगता है की उनका इंतजार जल्द ही ख़त्म हो सकता है. परीक्षा के तारीख को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट नीचे दिया जा रहा है.

UPTET Exam 2021: विभाग ने भेजा है प्रस्ताव
इस परीक्षा को लेकर अभी तक यह जानकारी सामने आ रही थी कि, UPBEB द्वारा दिसंबर माह में परीक्षा आयोजित कराने का प्रस्ताव दिया गया है, लेकिन शिक्षा मंत्री इसे और जल्दी आयोजित कराने के पक्ष में हैं. हालांकि अब ताजा जानकारी के अनुसार विभाग द्वारा 28 नवंबर 2021 को परीक्षा आयोजित कराने का प्रस्ताव दिया गया है. अगर आम सहमित बनती है तो जल्द ही UPTET 2021 के लिए अधिसूचना जारी कर दी जाएगी.

ये भी पढ़ें-
Railway Naukri : रेलवे में 10वीं पास के लिए 3000 से अधिक जॉब्स, आवेदन शुरू
10वीं से लेकर ग्रेजुएशन पास तक के लिए निकली है नौकरियां, जानें डिटेल

UP Home Guard Recruitment 2021: जानें कौन कर सकता है यूपी होमगार्ड भर्ती के लिए आवेदन

UP Home Guard Recruitment 2021: करीब 19,000 से 30,000 होमगार्ड पदों पर भर्ती आयोजित की जाएगी.

UP Home Guard Recruitment 2021: आधिकारिक अधिसूचना जारी ना होने के कारण फ़िलहाल भर्ती को लेकर उम्मीदवारों के मन में कई प्रकार की दुविधा देखने को मिल रही है. उनमें से एक दुविधा ये भी है कि भर्ती के लिए 10वीं पास अप्लाई कर सकेंगें या 12वीं पास.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 17:28 IST
SHARE THIS:

नई दिल्ली. UP Home Guard Recruitment 2021: उत्तर प्रदेश में होमगार्ड पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जल्द ही जारी की जा सकती है. वर्तमान में यूपी होमगार्ड विभाग में हजारों की संख्या में पद खाली हैं. ताजा जानकारी के अनुसार सरकार जल्द ही इन पदों पर नियुक्ति के लिए भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत कर सकती है. बता दें कि प्रदेश के होमगार्ड विभाग में कुल स्वीकृत पदों की संख्या 1,18,348 है. लेकिन फ़िलहाल तकरीबन 86,000 पदों पर ही कर्मचारियों की नियुक्ति है. ऐसे में लगभग 30,000 पद वर्तमान में रिक्त पड़े.

कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये बताया गया है कि इसके लिए अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी. इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे भर्ती सम्बन्धी अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करते रहें.

UP Home Guard Recruitment 2021: किन्हें मिल सकता है आवेदन का मौका
आधिकारिक अधिसूचना जारी ना होने के कारण फ़िलहाल भर्ती को लेकर उम्मीदवारों के मन में कई प्रकार की दुविधा देखने को मिल रही है. उनमें से एक दुविधा ये भी है कि भर्ती के लिए 10वीं पास अप्लाई कर सकेंगें या 12वीं पास. तो बता दें कि अभी तक की होमगार्ड भर्तियों में 10वीं पास उम्मीदवार भी शामिल होते आए हैं. लेकिन बीते दिनों उत्तर प्रदेश के तत्कालीन नागरिक सुरक्षा, प्रांतीय रक्षक दल व सैनिक कल्याण मंत्री चेतन चौहान ने बताया था कि अब से प्रदेश में 12वीं पास उम्मीदवारों को होमगार्ड पदों पर नियुक्त किया जाएगा.

UP Home Guard Recruitment 2021: अधिसूचना का इंतजार करें
ऐसे में फ़िलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि आगामी होमगार्ड भर्ती के लिए 10वीं पास अप्लाई कर सकेंगें या 12वीं पास. एक बार अधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही ये स्पष्ट हो प[एगा. इसलिए उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अधिसूचना संबंधी अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करते रहें.

ये भी पढ़ें-
Railway Naukri : रेलवे में 10वीं पास के लिए 3000 से अधिक जॉब्स, आवेदन शुरू
10वीं से लेकर ग्रेजुएशन पास तक के लिए निकली है नौकरियां, जानें डिटेल

Mahant Narendra Giri Suicide: सपा प्रमुख अखिलेश यादव बोले- सरकार हाईकोर्ट के जजों से कराए महंत नरेंद्र गिरि के मौत की जांच

UP: सपा प्रमुख अखिलेश यादव बोले- जजों की निगरानी में हो जांच

Prayagraj News: प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी व लेटे हनुमानजी के महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव कल उनके आश्रम के कमरे में मिला था. बाघंबरी मठ में उनकी लाश फांसी के फंदे से लटकती मिली थी.

SHARE THIS:

लखनऊ. अखिल अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri Death) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है. उनका शव फंदे से लटका मिला है जिसे प्रयागराज स्थित गेस्ट हाउस से बरामद किया गया. इसी कड़ी में मंगलवार को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने ट्वीट कर न्यायिक जांच कराए जाने की मांग की है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लिखा, अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष, धर्म कर्म, अध्यात्म के प्रति जीवन समर्पित करने वाले महान संत नरेंद्र गिरी जी का संदिग्ध परिस्थितियों में निधन, ह्रदय विदारक. हाई कोर्ट के सिटिंग जजों की निगरानी में पूरे घटनाक्रम की जांच करा सत्य सामने लाए सरकार.’

इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की कमिश्नर, एडीजी, आईजी, डीआईजी द्वारा जांच किये जाने की बात कही. महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध स्थिति में मौत के मामले में आज प्रयागराज पुलिस ने कई राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों के साथ-साथ आधा दर्जन से ज्यादा व्यक्तियों को हिरासत में ले लिया है. सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक इन सभी लोगों से पूछताछ की जा रही है. पुलिस के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि के गनर से भी पूछताछ की जाएगी. महंत को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किया ट्वीट

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने किया ट्वीट

प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी व लेटे हनुमानजी के महंत आचार्य नरेंद्र गिरि का शव कल उनके आश्रम के कमरे में मिला था. बाघंबरी मठ में उनकी लाश फांसी के फंदे से लटकती मिली थी. संदिग्ध हालत में महंत की मौत के बाद पुलिस को 8 पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसके बाद कल देर रात ही उनके शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से हिरासत में लिया गया था. पुलिस के मुताबिक, महंत नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में आनंद गिरि के ऊपर प्रताड़ना का आरोप लगाया था.

सिफारिश: UP में संपत्ति बंटवारे में 5000 का स्टांप शुल्क और 2000 लें रजिस्ट्रेशन फीस

UP: राज्य विधि आयोग ने प्रॉपर्टी बंटवारे से संबंधित स्टांप और रजिस्ट्रेशन शुल्क में अहम कमी का प्रस्ताव सरकार को सौंपा है. (सांकेतिक तस्वीर)

UP News: राज्य विधि आयोग द्वारा सरकार से की गई सिफारिश के अनुसार परिवार का मुखिया अचल संपत्ति का बंटवारा, हस्तांतरण यदि परिवार के सदस्यों के बीच करना चाहता है तो अधिकतम 5000 रुपये स्टांप शुल्क और ज्यादा से ज्यादा रजिस्ट्रेशन शुल्क किया जाए.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 21, 2021, 16:20 IST
SHARE THIS:

लखनऊ. परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए राज्य विधि आयोग (State Law Commission) ने अहम कदम उठाया है. आयोग ने यूपी सरकार (UP Government) से सिफारिश की है कि बंटवारें में लगने वाले स्टांप शुल्क और रजिस्ट्रेशन फीस को कम कर दिया जाए. स्टांप शुल्क सिर्फ 5000 रुपये लिया जाए और रजिस्ट्रेशन फीस 2000 रुपये रखी जाए. आयोग का तर्क है कि ऐसा करने से यूपी में संपत्ति बंटवारे, हस्तातंरण और वसीयत आदि से जुड़े मामलों में मुकदमेबाजी कम होगी. यही नहीं सरकार को राजस्व में भी कमी नहीं आएगी.

जानकारी के अनुसार आयोग की ओर से 20वां प्रत्यावेदन राज्य सरकार को सौंप दिया गया है. बता दें वर्तमान में संपत्ति के कुल मूल्य का 7 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है, वहीं रजिस्ट्रेशन शुल्क कुल मूल्य का एक प्रतिशत होता है.

वहीं महिलाओं के मामले में 10 लाख की संपत्ति पर एक फीसदी छूट के साथ 6 फीसदी स्टांप शुल्क लगता है. वहीं ग्रामीण इलाकों में दो फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है.

आयोग का मानना है कि परिवार का मुखिया सदस्यों के बीच संपत्ति का बंटवारा करता है तो स्टांप शुल्क देना पड़ता है. धन के अभाव में ऐसा न कर पाने की स्थिति होती तो परिवारों में विवाद सामने आ जाता और मामला कोर्ट पहुंच जाता है. ऐसे में अगर स्टांप शुल्क में कमी की जाती है तो बेवजह के मुकदमों से बचा जा सकता है.

आयोग द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार परिवार का मुखिया अचल संपत्ति का बंटवारा, हस्तांतरण यदि परिवार के सदस्यों के बीच करना चाहता है तो उसे अधिकतम 5000 रुपये स्टांप शुल्क कर दिया जाए, साथ ही रजिस्ट्रेशन शुल्क भी ज्यादा से ज्यादा 2000 रुपये किया जाए.

Narendra Giri Death: FIR से समझें कैसे हुई महंत नरेंद्र गिरि की मौत, आरोपी के कॉलम में सिर्फ आनंद गिरि का नाम

RIP Mahant Narendra Giri: आचार्य नरेंद्र गिरी की शव का आज कराया जाएगा पोस्टमॉर्टम.

Narendra Giri Suicide Case: आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. महंत नरेन्द्र गिरि के शव के पोस्टमॉर्टम से ही पता चलेगा कि उनकी मौत आत्महत्या है या हत्या.

SHARE THIS:

प्रयागराज/लखनऊ. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) आत्महत्या मामले में पहली एफआईआर प्रयागराज के जॉर्ज टाउन थाने में दर्ज की गई है. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य अमर गिरि पवन महाराज की तरफ से दर्ज करवाई गई. एफआईआर में सिर्फ उनके शिष्य आनंद गिरि को नामजद आरोपी बनाया गया है. आनंद गिरि के खिलाफ आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है. पुलिस ने आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार कर लिया है और अब उन्हें सड़क मार्ग से प्रयागराज लाया जा रहा है. उधर बड़े हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है.

एफआईआर के मुताबिक महंत नरेंद्र गिरि सोमवार दोपहर लगभग 12:30 बजे बाघम्बरी गद्दी के कक्ष में भोजन के बाद रोज की तरह विश्राम के लिए गए थे. रोज 3 बजे दोपहर में उनके चाय का समय होता था, लेकिन चाय के लिए उन्होंने पहले मना किया था और यह कहा था जब पीना होगा तो वह स्वयं सूचित करेंगे. शाम करीब 5 बजे तक कोई सूचना न मिलने पर उन्हें फोन किया गया. लेकिन महंत नरेंद्र गिरि का फोन बंद था. इसके बाद दरवाजा खटखटाया गया तो कोई आहट नहीं मिली. जिसके बाद सुमित तिवारी, सर्वेश कुमार द्विवेदी, धनंजय आदि ने धक्का देकर दरवाजा खोला. तब नरेन्द्र गिरि पंखे में रस्सी से लटकते हुए पाए गए.

mahant narendra giri death, mahant narendra giri suicide case, fir in mahant narendra giri death case, fir copy of mahant narendra giri death case

महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामले में दर्ज हुई पहली FIR

FIR में आनंद गिरि पर परेशान करने का जिक्र

FIR में आगे लिखा हुआ है कि जीवन की संभावना को देखते हुए शिष्यों ने रस्सी काटकर नरेेन्द्र गिरि को नीचे उतारा, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थती. एफआईआर में जिक्र है कि महाराज पिछले कुछ महीने से आनंद गिरि को लेकर परेशान रहा करते थे. यह बात कभी-कभी वह स्वयं भी कहते थे कि आनंद गिरि हमें बहुत परेशान करता रहता है.

आज होगा पोस्टमॉर्टम

महंत नरेंद्र गिरी की मौत मामले में यह पहला कानूनी कदम है, जिसमें आनंद गिरि को आरोपी बनाया गया है. अब उनकी मौत हत्या थी या आत्महत्या, इसका पता पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा. फिलहाल डॉक्टरों के पैनल द्वारा उनका पोस्टमॉर्टम कराने की तैयारी की गई है. उसके बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए बाघंबरी पीठ मठ में रखा जाएगा. जानकारी के मुताबिक मठ में ही नरेंद्र गिरि को भू-समाधि दी जाएगी.

Load More News

More from Other District