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UPPCL में PF घोटाला: बिजली कर्मचारियों ने रखी CBI जांच की मांग, ऊर्जा मंत्री बोले- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 2, 2019, 3:56 PM IST
UPPCL में PF घोटाला: बिजली कर्मचारियों ने रखी CBI जांच की मांग, ऊर्जा मंत्री बोले- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा है कि भविष्य निधि मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

मामले में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा (Shrikant Sharma) ने ट्वीट (Tweet) किया है कि डीएचएफएल (DHFL) में कर्मचारियों की भविष्य निधि के निवेश का मामला गंभीर है. इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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लखनऊ. विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) से मांग की है कि उत्तर प्रदेश पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईस ट्रस्ट में 2631 रुपये के घोटाले की सीबीआई (CBI) से जांच कराई जाये. साथ ही घोटाले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए पॉवर कार्पोरेशन (Power Corporation) प्रबंधन के आला अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही की जाए. डीएचएफएल (DHFL) के इक़बाल मिर्ची (Iqbal Mirchi) और दाऊद इब्राहीम (Dawood Ibrahim) से संबंधों के समाचार पर गंभीर चिंता प्रकट करते हुए संघर्ष समिति ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला बताते हुए सीएम से मांग की है कि सीबीआई जांच बहुत जरूरी हो गई है. संघर्ष समिति ने यह भी मांग की है कि पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईस ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाये और उसमे पूर्व की तरह कर्मचारियों के प्रतिनिधि को भी सम्मिलित किया जाए.

उधर मामले में ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने ट्वीट किया है कि डीएचएफएल में कर्मचारियों की भविष्य निधि के निवेश का मामला गंभीर है. इसमें जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यूपीपीसीएल के सभी कार्मिक मेरे परिवार के सदस्य हैं, किसी का कोई अहित न हो सरकार यह सुनिश्चित करेगी.

Shrikant Sharma tweet
यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा का ट्वीट


आरोप: आज तक पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईस ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई

विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के प्रमुख पदाधिकारियों शैलेन्द्र दुबे, राजीव सिंह ने बयान जारी कर मांग की है कि पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन ट्रस्ट में जमा धनराशि और उसके निवेश पर तत्काल एक श्वेतपत्र जारी करे. ताकि यह पता चल सके कि कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई की धनराशि कहां-कहां निवेश की गई है? उन्होंने कहा कि मार्च 2017 से दिसंबर 2018 के बीच डीएचएफएल में 2631 करोड़ रुपये जमा किये गए. मार्च 2017 से आज तक पॉवर सेक्टर इम्प्लॉईस ट्रस्ट की एक भी बैठक नहीं हुई. यह बहुत सुनियोजित और गंभीर घोटाला है.

कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई वापस लाए सरकार 

यूपीपीसीएल के चेयरमैन को लिखे पत्र में अभियंता संघ ने कर्मचारियों के सामान्य भविष निधि (जीपीएफ) और अंशदायी भविष्य निधि (सीपीएफ) से संबंधित पैसे को निवेश करने के निर्णय पर सवाल उठाया है. पत्र में कहा गया है कि यूपी सरकार को अब यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एक विवादास्पद कंपनी में जमा की गई हजारों कर्मचारियों की गाढ़ी कमाई वापस लाई जाए.
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संघर्ष समिति का कहना है कि अभी भी 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि डीएचएफएल में फंसी हुई है. सरकार यह पैसा वापस लाए. हम सरकार से एक आश्वासन भी चाहते हैं कि जीपीएफ या सीपीएफ ट्रस्ट में मौजूद पैसों को भविष्य में इस तरह की कंपनियों में निवेश नहीं किया जाएगा.

हाईकोर्ट ने डीएचएफएल के भुगतान पर लगाई रोक

पत्र में कहा गया है कि (यूपी स्टेट पॉवर सेक्टर इंप्लाई ट्रस्ट) के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी ने सरप्लस कर्मचारी निधि को डीएचएफएल की सावधि जमा योजना में मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक जमा कर दिया. इस बीच बंबई उच्च न्यायालय ने कई संदिग्ध कंपनियों और सौदों से उसके जुड़े होने की सूचना के मद्देनजर डीएचएफएल के भुगतान पर रोक लगा दी.

अभी भी फंसे हैं 1600 करोड़ रुपये

पत्र में आगे कहा गया है कि ट्रस्ट के सचिव ने फिलहाल स्वीकार किया है कि 1,600 करोड़ रुपये अभी भी डीएचएफएल में फंसा हुआ है. संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि कर्मचारी निधि को किसी निजी कंपनी के खाते में हस्तांतरित किया जाना, उन नियमों का सरासर उल्लंघन लगता है जो कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद के लिए इस निधि को सुरक्षित करते हैं.

पिछले साल हुआ घोटाले का खुलासा

बता दें बिजली कर्मियों के करीब 2631 करोड़ रुपये के प्राविडेंट फंड (PF) को निजी कंपनी डीएचएफसीएल (DHFCL) में जमा कर दिया गया. अखिलेश सरकार के दौरान बिजली कर्मियों के पीएफ को निजी कंपनी में लगाने का ये फैसला 2014 में लिया गया था. इसी साल मामले में खुलासा हुआ और पता चला कि मार्च 2017 से दिसंबर 2018 तक 2631.20 करोड़ का पीएफ़ निजी कंपनी (DHFCL) में हुआ. इस खुलासे के बाद ऊर्जा विभाग ने कार्रवाई करते हुए 10 अक्टूबर को तत्कालीन जीएम वित्त एवं लेखा पीके गुप्ता को निलंबित कर दिया था.

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First published: November 2, 2019, 3:56 PM IST
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