हड़ताल का दूसरा दिन: UP के कई जिलों में बिजली गुल, पानी का भी संकट गहराया

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
(प्रतीकात्मक तस्वीर)

बिजली कर्मचारियों की हड़ताल (Strike): सोमवार को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के कई जिलों में 6 से 8 घंटे बिजली नहीं आई. अब मंगलवार को भी यही स्थिति है. सुबह से लखनऊ के कई वीआईपी इलाकों में बिजली व्यवस्था प्रभावित है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 6, 2020, 11:41 AM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में निजीकरण (Privatization) के खिलाफ बिजली इंजीनियरों और कर्मचारियों (Power Engineers and Employee) का कार्य बहिष्कार मंगलवार दूसरे दिन भी जारी है. दरअसल सोमवार को ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा और बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति के साथ हुए समझौते के बावजूद उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन (UPPCL) के चेयरमैन ने समझौते पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया. यूपीपीसीएल चेयरमैन के इस रुख के बाद कर्मचारियों ने साफ कर दिया कि समझौता अभी नहीं हुआ है और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा. कर्मचारियों के आंदोलन के चलते यूपी के कई जिलों में बिजली और पानी का संकट खड़ा हो गया है.

सोमवार को ही कई जिलों में 6 से 8 घंटे बिजली नहीं आई. स्थिति ये रही कि ब्रेकडाउन से सोमवार को ऊर्जा मंत्री के घर भी करीब डेढ़ घंटे बिजली गुल रही. अब मंगलवार को भी यही स्थिति है. सुबह से लखनऊ के कई वीआईपी इलाकों में बिजली व्यवस्था प्रभावित है.

लाखों लोगों ने अंधेरे में काटी रात



बिजली कर्मियों के कार्य बहिष्कार का असर भी देखने को मिला. अधिकतर जिलों में बिजली कटौती से हाहाकार मच गया. सोमवार को यूपी में अधिकांश हिस्सों में बिजली की सप्लाई नहीं हो सकी. इसके चलते लाखों लोगों को अंधेरे में रहना पड़ा. जानकारी के मुताबिक, राजधानी लखनऊ में उप मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री समेत कुल 36 मंत्रियों के आवास में बिजली की सप्लाई नहीं हो पाई.  सभी मंत्रियों के घर में अंधेरा छाया रहा. इसके अलावा हजारों घरों में भी पावर सप्लाई नहीं हो सकी.
स्थिति ये है कि निजीकरण के विरोध में बिजलीकर्मी ब्रेकडाउन की शिकायतें नहीं ले रहे हैं. लखनऊ के  पॉश इलाके में कल से हुए ब्रेक डाउन को भी अटेंड नहीं किया गया है. 33 केवी की लाइन में खराबी के चलते सोमवार को 11.30 से ब्रेकडाउन हुआ है. फिलहाल मार्टिनपुरवा से वीवीआईपी क्षेत्र में बिजली सप्लाई हो रही है. वीवीआईपी उपकेंद्र कूपर रोड 22 घंटे से मार्टिंनपुरवा से संचालित है. मार्टिनपुरवा सोर्स में व्यवधान आने पर पूरे इलाके में बिजली गुल होने का संकट खड़ा हो सकता है. मार्टिनपुरवा से ही सीएम और डिप्टी सीएम सहित मंत्री आवासों को सप्लाई होती है. यहां से फिलहाल कालिदास, विक्रमादित्य मार्ग, राजभवन, गुलिस्तां, गौतमपल्ली, एमजी मार्ग पर भी सप्लाई हो रही है.

UPPCL चेयरमैन के इनकार से फंसा समझौते पर पेंच

दरअसल ऊर्जा मंत्री और संघर्ष समिति के बीच सोमवार को जिस समझौते पर सहमति बनी थी, उसके तहत घाटे को कम करने के लिए कर्मचारियों को सुधार के लिए मौका दिया गया था. मंत्री ने सुधार के लिए बिजलीकर्मियों को 31 मार्च तक का समय दिया था. जिसके बाद मार्च तक पूर्वांचल विधुत वितरण निगम के निजीकरण को टालने पर सहमति बनी थी. इसके बाद बिजली कर्मचारी संघर्ष समिति ने आंदोलन वापस लेने का ऐलान कर दिया था. लेकिन यूपीपीसीएल चेयरमैन इसके लिए तैयार नहीं हुए और बात बिगड़ गई.

घाटे में हैँ PVVNL

बता दें पूर्वांचल विद्युत् वितरण निगम लिमिटेड अरबों के घाटे में है. जिसके बाद सरकार ने कर्मचारियों को चेताया था. बावजूद इसके कोई सुधार नहीं हुआ. बिजली चोरी, कटिया कनेक्शन और बिजली बिल की वसूली करने में लापरवाही देखने को मिली, जिसके बाद सरकार ने इसे निजी हाथों में सौंपने का फैसला किया. जिसके विरोध में 5 अक्टूबर से बिजलीकर्मी अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार कर रहे हैं.

इनपुट: मोहम्मद शबाब/राजीव पी सिंह
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