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ANALYSIS: कभी इफ्तार पार्टी देने को लेकर लगती थी होड़, इस बार बदली-बदली सी दिखीं फिजाएं
Lucknow News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: June 7, 2019, 5:29 PM IST
ANALYSIS: कभी इफ्तार पार्टी देने को लेकर लगती थी होड़, इस बार बदली-बदली सी दिखीं फिजाएं
रमजान के महीने में आमतौर पर प्रमुख राजनीतिक पार्टियां इफ्तार पार्टी की मेजबानी करती हैं, लेकिन उत्‍तर प्रदेश में इस बार ऐसा देखने को नहीं मिला. (प्रतीकात्‍मक फोटो)

हेमवती नंदन बहुगुणा ने वर्ष 1974 में उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के तौर पर इफ्तार पार्टी की मेजबानी की थी. उसके बाद से इस राजनीतिक परंपरा का पालन किया जा रहा था. हालांकि, योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद इस परंपरा को बंद कर दिया गया.

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वीरेंद्रनाथ भट

लोकसभा चुनाव 2019 सात चरणों में संपन्‍न हुआ. इस दौरान रमजान का पवित्र महीना भी था. दिलचस्‍प है कि चुनावी मौसम होने के बावजूद उत्‍तर प्रदेश में इस बार लखनऊ समेत प्रदेश के तमाम बड़े शहरों में किसी भी प्रमुख पार्टी ने इफ्तार का आयोजन नहीं किया. सिर्फ राज्‍यपाल राम नाइक ने तीन जून को राजभवन में इफ्तार का आयोजन किया था. बता दें कि पिछले पांच दशकों से लगातार इस परंपरा का पालन किया जा रहा है.

हेमवती नंदन बहुगुणा ने उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री के तौर पर रमजान के महीने में वर्ष 1974 से इफ्तार पार्टी देने की परंपरा शुरू की थी. यह पहला मौका था जब प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में इफ्तार को शुरू किया गया था. इसके बाद से राज्‍य के साथ ही केंद्र स्‍तर के नेताओं ने इफ्तार पार्टी का आयोजन करना शुरू कर दिया था. उत्‍तर प्रदेश के तमाम मुख्‍यमंत्रियों ने इस परंपरा को निभाया. इसमें राजनाथ सिंह, कल्‍याण सिंह, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव जैसे सीएम शामिल हैं. मालूम हो कि मौजूदा समय में राजनाथ सिंह केंद्रीय मंत्री तो कल्‍याण सिंह राज्‍यपाल हैं. पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इफ्तार पार्टी की मेजबानी करनी शुरू कर दी थी. बीएसपी प्रमुख और उत्‍तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने तो लखनऊ के पांच सितारा होटल में इसका आयोजन किया था. हालांकि, दिवंगत राम प्रकाश गुप्‍ता इसमें जरूर एक अपवाद रहे.



मोदी-योगी ने बदली परंपरा



वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ उत्‍तर प्रदेश की सत्‍ता में आई. योगी आदित्‍यनाथ ने मुख्‍यमंत्री के तौर पर शपथ ली. सीएम योगी ने नवरात्र में 'कन्‍या पूजन' तो किया, लेकिन इफ्तार की मेजबानी से किनारा कर लिया. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इफ्तार पार्टी के आयोजन से दूरी बना ली. बीजेपी के मंत्री भी इफ्तार पार्टी से दूर ही रहने लगे. हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी इफ्तार पार्टी की मेजबानी किया करते थे.

पीएम मोदी की नई नीति से आया बदलाव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्‍ट्रीय राजनीति में आगमन के बाद इफ्तार पार्टी के आयोजन की 'राजनीतिक संस्‍कृति' में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हुई. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान के दौरान पीएम मोदी ने 'सबका साथ, सबका विकास' का नारा दिया. इस बार उन्‍होंने इसमें 'सबका विश्‍वास' भी जोड़ दिया. नरेंद्र मोदी ने यह स्‍पष्‍ट कर दिया कि कल्‍याणकारी योजनाओं जैसे एलपीजी कनेक्‍शन, बिजली कनेक्‍शन, शौचालय, घर आदि का लाभ सभी को बिना किसी भेद-भाव के मिलेगा. इसे धार्मिक या जातीय तौर पर बांटा नहीं जाएगा. पीएम मोदी की नीतियों ने राजनीतिक परिदृश्‍य को ही बदल दिया. बता दें कि अन्‍य राजनीतिक दल कभी यह तय ही नहीं कर सके कि मुसलमानों को लेकर उनकी स्‍वाभाविक चिंताएं आखिर क्‍या हैं? वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव के नतीजे मोदी के उस गवर्नेंस की सफलता को दर्शाता है, जिसके तहत विभिन्‍न योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाया गया.

(लेखक वरिष्‍ठ प्रत्रकार हैं और यह उनके निजी विचार हैं.)

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First published: June 7, 2019, 3:51 PM IST
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