प्रियंका गांधी का हमला, यूपी सरकार की व्यवस्था- गलत Answer Key, पेपर लीक और फर्जी मूल्याकंन
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प्रियंका गांधी का हमला, यूपी सरकार की व्यवस्था- गलत Answer Key, पेपर लीक और फर्जी मूल्याकंन
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. (फाइल फोटो)

कांग्रेस (Congress) महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने कहा, पेपर लीक, कटआफ विवाद, फर्जी मूल्याकंन और गलत उत्तर कुंजी, यूपी सरकार की व्यवस्था की इन सारी कमियों के चलते 69000 शिक्षक भर्ती का मामला अटका हुआ है.

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लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश में 69 हजार सहायक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पर बुधवार को अंतरिम रोक लगा दी. कांग्रेस (Congress) महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (Priyanka Gandhi Vadra) ने ट्वीट कर राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया है. यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर की पीठ ने सैकड़ों अभ्यर्थियों की ओर से अलग-अलग दाखिल 30 से अधिक याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया. अदालत ने एक जून को अपना आदेश सुरक्षित किया था जिसे बुधवार को सुनाया. मामले में अगली सुनवाई 12 जुलाई को होगी.

युवाओं पर पड़ रही है सरकार की लापरवाही की मार
प्रियंका गांधी ने कहा, ‘69000 शिक्षक भर्ती मामला, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश के युवाओं के सपनों पर ग्रहण लग गया. यूपी की सरकार की अव्यवस्था के चलते तमाम भर्तिया कोर्ट में अटकी हैं. पेपर लीक, कटआफ विवाद, फर्जी मूल्याकंन और गलत उत्तर कुंजी, यूपी सरकार की व्यवस्था की इन सारी कमियों के चलते 69000 शिक्षक भर्ती का मामला अटका हुआ है. सरकार की लापरवाही की सबसे ज्यादा मार युवाओं पर पड़ रही है.'



उत्तर कुंजी में दिए गए कुछ उत्तर गलत हैं: कोर्ट
अदालत ने यह आदेश प्रश्न पत्र में दिए गए विकल्पों में गड़बड़ी एवं उत्तर में प्रथम दृष्टया मतभेद दिखने के बाद पारित किया. पीठ ने मामले की विस्तृत सुनवाई और आपत्तियां परखने के पश्चात पारित अपने अंतरिम आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया यह अदालत पाती है कि ‘उत्तर कुंजी’ में दिए गए कुछ उत्तर स्पष्ट तौर पर गलत हैं. कुछ ऐसे भी प्रश्न हैं जिनके उत्तर पूर्व की विभिन्न परीक्षाओं में वर्तमान उत्तर कुंजी से अलग बताए गए हैं.

प्रश्न पत्र का मूल्यांकन करने में हुई है त्रुटि
अदालत ने आगे कहा, ‘हमारे विचार से प्रश्न पत्र का मूल्यांकन करने में त्रुटि हुई है, जिसका खामियाजा बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ेगा.’ अदालत ने कहा कि स्वयं राज्य सरकार ने अपने जवाबी हलफनामे में स्वीकार किया है कि कुछ प्रश्न हैं जो विवादपूर्ण हैं और जिनके एक से अधिक उत्तर सही हो सकते हैं. पीठ ने सरकार की ओर से महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह और मुख्य स्थाई अधिवक्ता रणविजय सिंह की इस दलील को ठुकरा दिया कि भले ही कुछ प्रश्न और उत्तर विवादपूर्ण है किंतु अदालत को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.

1, 2 या 3 अंकों से मेरिट में आने से रह गए थे कुछ याची
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एल पी मिश्रा, एच जी एस परिहार और सुदीप सेठ ने प्रश्न पत्र के प्रश्नों को संदर्भित करते हुए कहा कि ये प्रश्न या तो भ्रमित करने वाले हैं या तो उनके एक से अधिक उत्तर हैं. उनका तर्क था कि यदि इन प्रश्नों के अंक याचियों को दे दिए जाएं तो वे मेरिट में स्थान पाकर चयन की अग्रिम प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं. गौरतलब है कि परीक्षा में सामान्य और ओबीसी के लिए 65 प्रतिशत और एससी, एसटी के लिए 60 प्रतिशत की कटआफ रखी गई थी. याचियों में कुछ 1, 2 या 3 अंकों से मेरिट में आने से रह गए थे.

नियुक्ति प्रक्रिया स्पष्ट करे यूपी सरकार: सुप्रीम कोर्ट
गौरतलब है कि इससे कुछ दिन पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर यूपी सरकार का जवाब मांगा था. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में इन पदों पर नियुक्तियों के लिए ऊंची कट आफ रखने के राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा था. याचियों ने घोषित परीक्षा परिणाम में कुछ प्रश्नों की सत्यता पर प्रश्न उठाया था. सुप्रीम कोर्ट ने 21 मई को राज्य सरकार से कहा था कि वह रिक्त स्थानों का विवरण और नियुक्तियों के लिए अपनाई गयी प्रक्रिया को सिलसिलेवार तरीके से एक चार्ट के माध्यम से स्पष्ट करे.

शीर्ष अदालत की न्यायमूर्ति उदय यू ललित, न्यायमूर्ति एम एम शांतानागौदर और न्यायमूर्ति विनीत सरन की पीठ हालांकि शुरू में हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहती थी, लेकिन बाद में उसने अपने आदेश में सुधार करके उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख छह जुलाई निर्धारित की.

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