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अंसारी परिवार को टिकट से बसपा में बगावत

अंसारी परिवार को टिकट से बसपा में बगावत

उत्तर प्रदेश के बाहुबली अंसारी बंधुओं को औपचारिक तौर पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल कर लिए जाने पर मोहम्मदाबाद से टिकट पाए विनोद राय बागी हो गए हैं. इस बीच अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी कार्यो में लिप्त होने के आरोप में विनोद राय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के बाहुबली अंसारी बंधुओं को औपचारिक तौर पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल कर लिए जाने पर मोहम्मदाबाद से टिकट पाए विनोद राय बागी हो गए हैं. इस बीच अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी कार्यो में लिप्त होने के आरोप में विनोद राय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

उत्तर प्रदेश के बाहुबली अंसारी बंधुओं को औपचारिक तौर पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल कर लिए जाने पर मोहम्मदाबाद से टिकट पाए विनोद राय बागी हो गए हैं. इस बीच अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी कार्यो में लिप्त होने के आरोप में विनोद राय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

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उत्तर प्रदेश के बाहुबली अंसारी बंधुओं को औपचारिक तौर पर बहुजन समाज पार्टी में शामिल कर लिए जाने पर मोहम्मदाबाद से टिकट पाए विनोद राय बागी हो गए हैं. इस बीच अनुशासनहीनता एवं पार्टी विरोधी कार्यो में लिप्त होने के आरोप में विनोद राय को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है.

बता दें मायावती ने अंसारी परिवार के तीन लोगों को बसपा का टिकट भी दे दिया है. मऊ से मुख्तार अंसारी को, घोसी से मुख्तार के बेटे अब्बास को तो मोहम्मदाबाद से मुख्तार के भाई सिबकतुल्ला अंसारी को टिकट मिला है. मऊ से पहले मनोज राय को टिकट दिया गया था. विनोद राय से भी टिकट वापस ले लिया गया है.

विनोद राय ने बताया, "मायावती ने हमको बुलाया था. हमसे कहा कि इस समय स्थिति थोड़ी खराब है. सपा और कांग्रेस के गठबंधन से अल्पसंख्यक वोट उधर जा रहा है. इसलिए हमें उनका जवाब देना है. इस पर हमने बहन जी से कहा कि आपने हमें बुलाकर टिकट दिया था. अगर बसपा मोहम्मदाबाद सीट पर सिबकतुल्ला को टिकट देती है तो मैं अपने समर्थकों से बातकर उसे हराने की सलाह लूंगा. मैं तो बस चाहता हूं किसी गुंडे को इस क्षेत्र से दूर रखा जाए. इस सीट से सिबकतुल्ला अंसारी विधायक हैं."

बाहुबली मुख्तार अंसारी साल 1996 में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे. चार बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी पिछले 11 सालों से जेल में बंद हैं. पहली बार 1996 में बीएसपी की हाथी पर सवार होकर मऊ से विधायक बने बाहुबली मुख्तार दो बार निर्दलीय चुनाव जीते. 2012 में समाजवादी पार्टी की लहर में भी मुख्तार अपनी पार्टी के निशान पर जीत गए. मुख्तार के बड़े भाई अफजाल अंसारी सबसे पहले राजनीति में आए. अंसारी भाइयों में सबसे बड़े सिबकतुल्ला अंसारी भी विधायक हैं. पेशे से टीचर सिबकतुल्ला दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं.

छह महीने पहले अंसारी परिवार ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का विलय समाजवादी पार्टी में किया था. शिवपाल यादव उन्हें समाजवादी पार्टी में लेकर आए थे. अखिलेश यादव के विरोध के बाद विलय वापस ले लिया गया. बलिया, मऊ, गाजीपुर इसके साथ ही वाराणसी की कुछ सीटों पर अंसारी बंधुओं का दबदबा है. कुल मिलाकर 15 से 20 सीट पर अंसारी बंधुओं की पकड़ मानी जाती है.

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