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लखनऊ के RML के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन टेंडर पर उठे सवाल

लखनऊ के RML के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन टेंडर पर उठे सवाल

मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन सप्लाई को लेकर हुआ टेंडर विवादों में है.

मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन सप्लाई को लेकर हुआ टेंडर विवादों में है.

मेरठ (Meerut) के मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन के लिए हुए टेंडर में अफसरों ने पुष्पा सेल्स प्रा. लि के नाम पर मुहर लगा दी है. 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इसी कंपनी के पास ऑक्सीजन सप्लाई का काम था.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टिट्यूट (RML Institute) की ओर से गोरखपुर (Gorakhpur) ऑक्सीजन कांड  की आरोपी कंपनी को काम सौंपने का विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मेरठ (Meerut) के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज (Lala Lajpat Rai Medical College) में टेंडर पर सवाल उठने लगे हैं.

लोहिया इंस्टिट्यूट के चिकित्साधिकारियों के बाद मेरठ मेडिकल कॉलेज के अधिकारी आरोपी कंपनी पर मेहरबान दिख रहे हैं. मेरठ मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन पाइपलाइन के लिए हुए टेंडर में अफसरों ने पुष्पा सेल्स प्रा. लि के नाम पर मुहर लगा दी है. 2017 में गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में इसी कंपनी के पास ऑक्सीजन सप्लाई का काम था. आरोप है कि ऑक्सीजन सप्लाई में गड़बड़ी के चलते दर्जनों बच्चों की मौत हुई थी. जिसके बाद कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था, जिसमें अभी भी क्लीन चिट नहीं मिली है. इस संबंध में सीएम और मुख्य सचिव से शिकायत की गई है. जिसके बाद  अधिकारी अब इस मामले में जांच कराने की बात कर रहे हैं.

उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम ने कराया था टेंडर

ऑक्सीजन पाइपलाइन के लिए उप्र राजकीय निर्माण निगम ने टेंडर कराया था. इसके लिए हुए टेक्निकल बिड में टेंडर कमेटी ने पुष्पा सेल्स प्रा. लि. को सबसे मुफीद पाया. सीएम को भेजी गई शिकायत के मुताबिक गाइडलाइन के क्लॉज 13ए के मुताबिक टेंडर में ऐसी किसी कंपनी को शामिल नही किया जाना चाहिए, जिसके खिलाफ एफआईआर हो या जिसके खिलाफ अदालत में मामला चल रहा हो. आरोप है कि उप्र निर्माण निगम ने टेंडर में सीवीसी के इस क्लॉज को शामिल नहीं किया, जिससे आरोपी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके.

लोहिया इंस्टिट्यूट के टेंडर में भी यही खेल हुआ

सामाजिक कार्यकर्ता और शिकायतकर्ता श्वेता सिंह ने पूरे मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सीएम और मुख्य सचिव को शिकायती पत्र लिखा है. उनका कहना है कि इससे पहले लोहिया इंस्टीट्यूट में हुए टेंडर में भी सीवीसी गाइडलाइन की कई शर्तों को दयकिनार किया गया था, जिससे कंपनी को फायदा मिल सके. अब यही खेल मेरठ मेडिकल कॉलेज के टेंडर में खेला गया है. गोरखपुर मामले में पुष्पा सेल्स प्राइवेट लिमिटेड को क्लीन चिट नहीं मिली है. ऐसे में टेंडर की शर्त में सीवीसी का क्लॉज 13ए न जोड़ने का उसे काफी फायदा मिला.

जिम्मेदार फंसे तो टेंडर निरस्त का दे रहे हवाला

पूरे मामले में उप्र राजकीय निर्माण निगम केएमडी यूके गहलोत का कहना है कि टेक्निकल बिड में कंपनी को पास किया गया है. अभी उसे टेंडर दिया नहीं गया है. हमारे पास इससे जुड़ी कई शिकायतें आ रही हैं, जिनका अध्ययन किया जा रहा है. कई खामियां मिली हैं. जानकारी छिपाकर टेंडर में शामिल होने की पुष्टि होते ही टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा.

प्रदेश भर में खामियां कम नहीं

लोहिया और मेरठ मेडिकल कॉलेज की तरह शासन के पास प्रदेश के अन्य मेडिकल कॉलेजों में ऑक्सीजन सप्लाई की शिकायतें आ रही हैं. इसमें गोंडा जिला अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई में मानकों के मुताबिक उपकरण नहीं लगाए जा रहे थे. साथ ही रामपुर, गाजीपुर, वाराणसी, बस्ती, रायबरेली और सिद्धार्थनगर के जिला अस्पतालों में कराए जा रहे कामों की शिकायत भी शासन में हुई है.

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Tags: Lucknow news, Meerut news, Up news in hindi, Uttarpradesh news

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