MLA अदिति सिंह बोलीं- मेरे निजी टि्वटर हैंडल से महत्वपूर्ण है कोरोना वायरस से लड़ाई
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MLA अदिति सिंह बोलीं- मेरे निजी टि्वटर हैंडल से महत्वपूर्ण है कोरोना वायरस से लड़ाई
रायबरेली से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह (File Photo)

विधायक अदिति सिंह (MLA Aditi Singh) ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि मेरे निजी टि्वटर हैंडल पे क्या चल रहा है? इससे ज्यादा महत्वपूर्ण विषय है, कोरोना वायरस से लड़ाई और पीड़ितों की मदद.

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लखनऊ. उत्तर प्रदेश में रायबरेली (Raebareli) सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने अपने टि्वटर हैंडल (Twitter Handle) से पार्टी का नाम हटा दिया है. उन्होंने अब अपना हैंडल @AditiSinghRBL कर लिया है. यहां आरबीएल का मतलब रायबरेली है. अदिति सिंह के इस निर्णय को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं. हालांकि खुद अदिति सिंह इस पर कुछ साफ नहीं बोलतीं. अदिति सिंह ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि दुनिया इस समय कोरोना महामारी (Corona Epidemic) से लड़ रही है. मेरा सबसे निवेदन है कि श्रमिक (Laborers) भाइयों की मदद ज्यादा से ज्यादा करें. मेरे निजी टि्वटर हैंडल पे क्या चल रहा है? इससे ज्यादा महत्वपूर्ण विषय है, कोरोना वायरस से लड़ाई और पीड़ितों की मदद.

बता दें पिछले दिनों योगी सरकार और कांग्रेस के बीच प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए 1000 बसें मुहैया कराने को लेकर जमकर घमासान मचा. इस बीच अदिति सिंह ने ट्वीट कर पार्टी को बैकफुट पर ला दिया. अदिति सिंह ने ट्वीट किया, 'आपदा के वक्त ऐसी निम्न सियासत की क्या जरूरत? एक हजार बसों की सूची भेजी. उसमें भी आधी से ज्यादा बसों का फर्जीवाड़ा. 297 कबाड़ बसें, 98 आटो रिक्शा व एबुंलेंस जैसी गाड़ियां और 68 वाहन बिना कागजात के...ये कैसा क्रूर मजाक है. अगर बसें थीं तो राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र में क्‍यों नहीं लगाई?'

इसके अलावा अदिति ने एक और ट्वीट में लिखा, 'कोटा में जब यूपी के हजारों बच्चे फंसे थे, तब कहां थीं ये तथाकथित बसें, तब कांग्रेस सरकार इन बच्चों को घर तक तो छोड़िए, बॉर्डर तक न छोड़ पाई, तब योगी आदित्यनाथ ने रातों-रात बसें लगाकर इन बच्चों को घर पहुंचाया, खुद राजस्थान के सीएम ने भी इसकी तारीफ की थी.'



पहले भी पार्टी लाइन से हटकर दे चुकी हैं बयान



इससे पहले भी पिछले साल अक्टूबर में एक दिन के विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान एक तरफ प्रियंका गांधी लखनऊ में प्रदर्शन कर रही थीं. वहीं अदिति सिंह सत्र में पार्टी व्हिप का उल्लंघन कर विधानसभा में उपस्थित थीं. उस समय पार्टी की तरफ से उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा.

योगी सरकार ने बढ़ाई सुरक्षा

विशेष विधानसभा सत्र में भाग लेने के तुरंत बाद यूपी सरकार ने अदिति सिंह की सुरक्षा बढ़ा दी थी. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात जो कि कांग्रेस के भीतर हड़कंप मचाने के लिए काफी थी. हालांकि उनकी भाजपा में जाने की चर्चा थी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. यही नहीं, अदिति सिंह पिछले साल 22 से 24 अक्टूबर के बीच रायबरेली में आयोजित पार्टी के प्रशिक्षण सत्र से गायब थीं और पार्टी ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने इसका जवाब नहीं दिया.

सोनिया के गढ़ में हनक 'विधायक जी' की ही रही

रायबरेली में छह विधानसभा सीटें बछरावां, हरचंदपुर, रायबरेली सदर, सरेनी, ऊंचाहार और सलोन हैं. लेकिन, कांग्रेस का गढ़ होने के बावजूद वर्ष 2017 तक रायबरेली सदर सीट पर कांग्रेस (Congress) का कब्ज़ा नहीं रहा. वजह थी ‘विधायक जी’के नाम से मशहूर अखिलेश सिंह. बाहुबली अखिलेश सिंह क्रिमिनल बैकग्राउंड होने के बावजूद यहां की जमीन पर पकड़ रखते थे. अखिलेश सिंह का दबदबा और हनक इस सीट पर देखने को मिलती रही. वर्ष 2017 के चुनाव में अपनी गिरती सेहत और सियासी विरासत को संजोए रखने के लिए अखिलेश ने अपनी बेटी अदिति सिंह को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़वाकर विधानसभा भेजा. अखिलेश का पिछले साल देहांत हो गया.

इनपुट: राजीव पी सिंह

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First published: May 27, 2020, 6:55 PM IST
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