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शक्ति प्रदर्शन से उत्तर भारत में 'राजपूत चेहरा' बनने की राह पर हैं बाहुबली राजा भैया!

बाहुबली विधायक राजा भैया
बाहुबली विधायक राजा भैया

अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया की राजा भैया ने अपनी रैली में इस बात पर जोर दिया कि ज्यादा से ज्यादा सभी समुदाय के लोग इस पार्टी से जुड़ पाए. इसलिए उन्होंने सवाल उठाया कि दलित की बेटी और सवर्णों की बेटी में अंतर क्या.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2018, 9:40 AM IST
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लखनऊ में मायावती के बाद दूसरी सबसे बड़ी रैली कर बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने एक बार फिर अपनी सियासी धमक दिखाई. रैली में दो लाख के करीब जुटी भीड़ ने साबित कर दिया कि राजा भैया जनसत्ता पार्टी के सहारे उत्तर भारत में प्रमुख राजपूत चेहरा बनना चाहते हैं. इस सवाल पर न्यूज18 यूपी के एग्जीक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री कहते हैं कि राजा भैया ने रैली के जरिए जो अपनी पार्टी के लिए मुद्दे चुने है. वो इस बात का ध्यान करके चुने है कि उस मुद्दे से ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ पाए. उन्होंने बताया कि राजा भैया अच्छी तरह से जानते है कि केवल राजपूतों की पार्टी उत्तर प्रदेश में बहुत कुछ नहीं हासिल कर सकती.

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अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया की राजा भैया ने अपनी रैली में इस बात पर जोर दिया कि ज्यादा से ज्यादा सभी समुदाय के लोग इस पार्टी से जुड़ पाए. इसलिए उन्होंने सवाल उठाया कि दलित की बेटी और सवर्णों की बेटी में अंतर क्या. अमिताभ ने कहा कि अगर दलित की बेटी पर छेड़खानी का मुकदमा दर्ज हो सकता है तो गैर दलित पर क्यों नहीं. राजा भैया ने रैली में साफ संदेश देने की कोशिश की दलित की बेटी के साथ अपराध हो या गैर दलित के साथ अपराध हमेशा अपराध की श्रेणी में आता है. राजा भैया ने इन्हीं मुद्दे को लेकर अपना फलक को उंचा करने की कोशिश की.



रैली में पहुंचे राजा भैया

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रघुराज प्रताप सिंह हमेशा इस बात का ध्यान रखने है कि उनके साथ अल्पसंख्यकों का जुड़ाव हो. यहीं वजह है कि राजा भैया के साथ पहले दिन प्रेस कॉन्फेस के दौरान एक मुसलमान साथ था. वहीं आज की रैली पर एक मुसलमान मंच पर राजा के साथ खड़ा हुआ था. अमिताभ अग्निहोत्री ने बताया कि बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह हमेशा से चाहते है कि दलित, सवर्णों, पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक सभी समुदाय के लोग उनकी पार्टी से जुड़े. जिसका नतीजा है रैली में 2 लाख से अधिक की भीड़ का जमा होना.

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एग्जीक्यूटिव एडिटर अमिताभ अग्निहोत्री कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में अभी 6 महीने से ज्यादा वक्त बचा है. लेकिन इतना जरूर कह सकता हूं कि राजा भैया की कोशिश होगी कि चुनाव को वे प्रभावित करें. वहीं राजा भैया के लिए 2019 का लोकसभा चुनाव एक बड़ा इम्तिहान के रूप में सामने का सकता है. बता दें कि रैली के बाद सत्ता के गलियारों में हलचल है. कहा जा रहा है कि सवर्णों के साथ लेकर पार्टी बनाने वाले राजा भैया ने अपनी धमक इस रैली से एक बार फिर दिखाई है.

रैली में जुटी लाखों की भीड़


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बता दें कि रघुराज प्रताप सिंह ने 26 साल की उम्र में 1993 में पहली बार कुंडा विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी. इसके बाद से वे लगातार इसी सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल करते आ रहे हैं. उन्होंने सियासत में पहला कदम 26 साल की उम्र में रखा था.
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