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    राज्यसभा चुनाव: नामांकन खारिज होने के खिलाफ EC में शिकायत करेंगे प्रकाश बजाज, अखिलेश से की मुलाकात

    राज्यसभा चुनाव में वाराणसी के प्रकाश बजाज ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था जो खारिज हो गया है.
    राज्यसभा चुनाव में वाराणसी के प्रकाश बजाज ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन किया था जो खारिज हो गया है.

    सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मुलाकात के बाद प्रकाश बजाज ने कहा कि हम इस निर्णय के खिलाफ पहले चुनाव में शिकायत करने जा रहे हैं. इलेक्शन कमीशन से हम कहेंगे कि राज्यसभा चुनाव के पूरे प्रॉसेज को रोका जाए.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 30, 2020, 8:37 AM IST
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    लखनऊ. उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव (Rajyasabha Election) के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी (Independent Candidate) के रूप में पर्चा दाखिल करने वाले प्रकाश बजाज (Prakash Bajaj) ने नामांकन खारिज होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मुलाकात की. काफी देर ये मुलाकात चली. मुलाकात के बाद प्रकाश बजाज ने कहा कि हम इस निर्णय के खिलाफ पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) में शिकायत करने जा रहे हैं. इलेक्शन कमीशन से हम कहेंगे कि राज्यसभा चुनाव के पूरे प्रॉसेज को रोका जाए. प्रकाश बजाज ने कहा कि इसके अलावा हमने कोर्ट जाने का विकल्प भी रखा है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनका नॉमिनेशन का 1 सेट गायब किया गया.

    पिता ने भी लगाया आरोप

    उधर प्रकाश बजाज के पिता और पूर्व विधायक प्रदीप बजाज ने भी आरोप गाया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नॉमिनेशन का एक पूरा सेट गायब किया. रिटर्निंग ऑफिसर की साजिश से नॉमिनेशन का एक सेट गायब हुआ. प्रदीप बजाज ने कहा कि हमारे पास 2 सेट नॉमिनेशन के पुख्ता सबूत हैं. बीजेपी ने मिलकर हमारे साथ साजिश की. दूसरे उम्मीदवार को लाभ पहुंचाने के लिए साजिश रची गई. उन्होंने कहा कि इलेक्शन कमीशन से हम अपील कर रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया को रोका जाए.



    कौन हैं प्रकाश बजाज
    मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले प्रकाश बजाज पेशे से वकील हैं. वो मुंबई में प्रैक्टिस करते हैं. वाराणसी में उनका घर जवाहर नगर कालोनी में है. सियासत उनको विरासत में मिली है. उनके पिता प्रदीप बजाज 1977 में जनता पार्टी से विधायक रहे. वो यूपी की देवरिया सीट से विधायक बने थे. साथ ही वो पूरी दुनिया में आस्था के केंद्र श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद के सदस्य भी रहे हैं. जिस समय उनके पिता न्यास परिषद के सदस्य बने थे, उस वक्त वो गैर ब्राह्मण होने के कारण काफी चर्चा में रहे थे.
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