होम /न्यूज /उत्तर प्रदेश /

UP By-Election 2020: जानिए भाजपा के क्लीन स्वीप में कौन बन रहे हैं दो रोड़े!

UP By-Election 2020: जानिए भाजपा के क्लीन स्वीप में कौन बन रहे हैं दो रोड़े!

जानिए भाजपा के क्लीन स्वीप में कौन हैं दो रोड़े (file photo)

जानिए भाजपा के क्लीन स्वीप में कौन हैं दो रोड़े (file photo)

जिन आठ सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं उनमें दो सीटें रामपुर (Rampur) की स्वार और जौनपुर (Jaunpur) की मल्हनी भी शामिल है.

लखनऊ. यूपी में विधानसभा (UP Assembly) की 8 सीटों पर उपचुनाव (By-Election) होने वाले हैं. ऐसे में सभी पार्टियों के प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्र में ताकत झोंके हुए हैं. उधर, उपचुनाव में पलड़ा सत्ताधारी पार्टी की ओर झुका रहता है लेकिन, यूपी की अलग कहानी है. एक बार फिर से 8 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं. वैसे तो नतीजे कौन जानता है लेकिन, आठों सीटों पर बीजेपी अपना परचम आसानी से लहरा पाती यदि दो बड़े रोड़े उसके रास्ते में न होते. पहले आजम खान और दूसरे बाहुबली धनंजय सिंह. भाजपा के लिए ये दोनों किसी शूल से कम नहीं है जिनकी वजह से उसे इन दोनों जगहों पर कभी जीत नहीं मिल सकी है.

रामपुर की स्वार और जौनपुर की मल्हनी सीट

जिन आठ सीटों पर उपचुनाव होने वाले हैं उनमें दो सीटें रामपुर की स्वार और जौनपुर की मल्हनी भी शामिल है. इन सीटों पर फतह भाजपा के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है. ऐसा इसलिए क्योंकि रामपुर में आजम खान और जौनपुर में बाहुबली धनंजय उसे हमेशा पीछे धकेलते रहे हैं. इतिहास गवाह है कि इन दोनों की वजह से पार्टी को इन दोनों सीटों पर कभी जीत नसीब नहीं हुई.

बाहुबली धनंजय सिंह का दबदबा

पहले बात करते हैं जौनपुर की. इस जिले की मल्हनी सीट पर ठाकुरों और यादवों का बोलबाला रहा है. सपा के पारसनाथ यादव यहां से जीतते रहे, क्योंकि यादव वोट उन्हें एकमुश्त मिलते रहे. दूसरी पार्टियां इसलिए चुनाव हारती रहीं क्योंकि ठाकुरों के वोट में बड़ा बटवारा होता रहा. इसमें एक बड़ा फैक्टर धन्नंजय सिंह रहे. 2012 में बनी मल्हनी सीट के दो चुनावों का इतिहास बताता है कि धनंजय सिंह के पास 50 हजार वोटों का जुगाड़ हमेशा रहता है. 2012 के चुनाव में उनकी पत्नी डॉ. जागृति सिंह और फिर 2017 के चुनाव में धनंजय सिंह को लगभग 50 हजार वोट मिले.

स्वार सीट से भाजपा की जीत पर संशय

दोनों ही बार वे दूसरे नम्बर पर रहे. अब बात भाजपा की. 2012 का चुनाव पार्टी ने नहीं लड़ा. 2017 में वो चौथे नंबर पर रही. इस सीट पर भाजपा के लिए यही संकट है. धनंजय सिंह के पचास हजार वोट उसकी नैया पार नहीं लगने देते. मल्हनी से पहले इस सीट का नाम रारी था जिससे धनंजय सिंह दो बार सपा को हराकर विधायक रह चुके हैं. तब भी लगभग 50 हजार पाकर जीते थे और हारने पर भी पचास हजार बरकरार रखे हुए हैं. ये भी नहीं भूलना चाहिए कि धनंजय सिंह जौनपुर से सांसद भी रह चुके हैं.

ये भी पढे़ं- शिवसेना पर भड़के अयोध्या के संत, दी चेतावनी- भूल से भी शहर में प्रवेश ना करें उद्धव ठाकरे

अब बात आजम खान की. यहां की स्वार सीट से भाजपा को कभी जीत हासिल नहीं हो सकी है. हालांकि 2012 से पहले जब ये सीट स्वार टाण्डा हुआ करती थी. तब भाजपा कई मर्तबा यहां से जीती. लेकिन, 2002 से लगातार उसे मुंह की खानी पड़ रही है. हालांकि उसने नम्बर दो की हैसियत बनाये रखी है. इस सीट पर काज़िम अली खान और भाजपा में जंग होती रही लेकिन जैसे ही आजम खान की एंट्री हुई.

आजम फेमिली का बोलबाला

दोनों पस्त हो गये. और तो और आजम फेमिली को मिली जीत का फासला भी बहुत बढ़ गया. अब देखिये 2002, 2007 और 2012 में काज़िम अली जीते लेकिन, 2017 में जब इस सीट से आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम लड़े तो काजिम अली तीसरे नम्बर पर चले गये. 2012 में काजिम अली से भाजपा की हार का अंतर 13 हजार था जो 2017 में अब्दुल्ला आजम के सामने बढ़कर 53 हजार हो गया. बता दें कि जिन 8 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं उनमें से 6 भाजपा के पास जबकि 2 सपा के पास रही हैं.

आपके शहर से (लखनऊ)

Tags: Azam Khan, BJP, CM Yogi, Jaunpur news, Rampur news, UP news, UP police, Yogi adityanath

अगली ख़बर