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यूपी: नागरिक संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक पार्टियों की ये रही मांग

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Updated: December 9, 2019, 9:52 AM IST
यूपी: नागरिक संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक पार्टियों की ये रही मांग
नागरिक संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक पार्टियों की ये रही मांग (file photo)

नागरिक संशोधन बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों को जवाब देने हुए यूपी बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि लोग इस बिल को मजहबी दृष्टि के नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है.

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  • Last Updated: December 9, 2019, 9:52 AM IST
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लखनऊ. लोकसभा (Lok Sabha) में सोमवार को नागरिक संशोधन बिल (Citizen Amendment Bill) संसद में पेश किया जाएगा. मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि उनके समुदाय को टारगेट करके सरकार बिल ला रही है. वहीं, बिल को लेकर उत्तर प्रदेश के सियासी दल में विरोध की तस्वीर सामने आ रही है. लखनऊ में मुस्लिम धर्मगुरू मौलाना खालिद रशीद इसे मुसलमानों के खिलाफ एक साजिश बताते हैं. वहीं बसपा के सांसद कुंवर दानिश अली ने कहा है कि एनआरसी (NRC) के मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी संसद के दोनों सदनों में विरोध करेगी. उन्होंने कहा कि यह बिल भारत के सविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लिखित संविधान के खिलाफ है. इसलिए बिल का बहुजन समाज पार्टी विरोध करेगी.

महिलाओं की सुरक्षा पर बिल लाए सरकार- सपा

उधर, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनुराग भदौरिया ने कहा कि नागरिक संशोधन बिल को एक बहनाना है. असल में बीजपी वोट की राजनीति करती है. उन्होंने ने देश को राज्य के विकास के बिल लाए. भदौरिया आगे कहते हैं कि बीजेपी सरकार को संसद के अंदर में महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी दूर करने के लिए बिल लाए. जिससे देश में विकास की गंगा बहेगी.

मजहबी दृष्टि के नजरिए से देखने की जरूरत नहीं- बीजेपी

नागरिक संशोधन बिल को लेकर विपक्षी पार्टियों को जवाब देने हुए यूपी बीजेपी के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि लोग इस बिल को मजहबी दृष्टि के नजरिए से देखने की जरूरत नहीं है. ये मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में खतरा बने लोगों को चिन्हित किया जाएगा. अगर भारत किसी तरह की संशोधन बना रहा है कि तो किसी तरह की आपत्ति नहीं होने चाहिए. वहीं विदेशों में हिंदुओं की स्थिति ठीक नहीं है, अगर कोई हिंदू वापस भारत आना जाता है तो उसे सहूलियत दी जाएगी.

क्या है नागरिकता संशोधन बिल

नागरिकता संशोधन बिल नागरिकता अधिनियम 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया जा रहा है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा. नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा.ये भी पढ़ें:

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First published: December 9, 2019, 9:52 AM IST
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