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पश्चिम उत्तर प्रदेश में 90 सीट जीतने के अमित शाह के दावे के पीछे हैं ये कारण

पश्चिम उत्तर प्रदेश में 90 सीट जीतने के अमित शाह के दावे के पीछे हैं ये कारण

शुरुआती दो फेजों में पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही चुनाव होना है. भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए जो विशेष तैयारियां कर रखी है.

शुरुआती दो फेजों में पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही चुनाव होना है. भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए जो विशेष तैयारियां कर रखी है.

शुरुआती दो फेजों में पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही चुनाव होना है. भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए जो विशेष तैयारियां कर रखी है.

उत्तर प्रदेश के अन्य इलाकों में राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से विकास और कानून-व्यवस्था की भी मुद्दा उठा रही हैं लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाति-बिरादरी और धर्म को लेकर सियासत उफान पर है. इस इलाके में इन्हीं समीकरणों पर फोकस करते हुए पार्टियों ने दांव लगाने शुरू किए हैं.

नेटवर्क18 के ग्रुप एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अमित शाह ने कहा कि अभी पूरे उत्तर प्रदेश का आकलन करना जल्दबाजी है. मैं इतना जरूर कहूंगा कि​ पहले और दूसरे चरण के चुनाव में कुल 135 सीटों में बीजेपी 90 सीटें जीतेगी.

शुरुआती दो फेजों में पश्चिम उत्तर प्रदेश में ही चुनाव होना है. भाजपा ने पश्चिम उत्तर प्रदेश के लिए जो विशेष तैयारियां कर रखी है. उनमें कैराना पलायन, धार्मिक आधार पर आरक्षण का खुला विरोध, यांत्रिक कत्लखनों पर रोक प्रमुख मुद्दे हैं, जिनको लेकर पार्टी गांव-गांव तक समर्थन जुटाने में लगी हुई है.

पार्टी की तैयारी की झलक उसके घोषणापत्र में भी देखी जा सकती है. चाहे वह कैराना पलायन हो, कानून व्यवस्था का मामला हो, जिसमें बिना जाति और धर्म देखे एफआईआर लिखना शामिल है, गन्ना किसानों को बकाए का भुगतान हो, उन्हें एडवांस चेक देने की बात हो, यांत्रिक कत्लखानों पर पूरी तरह रोक लगाने की बात हो या ​तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं से रायशुमारी हो, सभी को घोषणापत्र में विशेष जगह दी गई है. इन मामलों पर पार्टी का मानना है कि भाजपा लोगों का विश्वास जीतने में सफल रहेगी.

इसके अलावा पार्टी सर्जिकल स्ट्राइक मुद्दे को भी वोट में तब्दील होते देख रही है.
हालांकि नोटबंदी को लेकर पार्टी में थोड़ी असमंजस जरूर है. कारण ये है कि पश्चिम उत्तर प्रदेश में ज्यादातर छोटी औद्योगिक इकाइयां काम करती हैं. नोटबंदी से सबसे ज्यादा ये ही प्रभावित रहीं.

वहीं सपा और बसपा की बात करें तो ये सच है कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग अखिलेश सरकार से मुजफ्फरनगर दंगों के बाद से ही नाराज रहा. लव जिहाद, कैराना पलायन और धर्मांतरण जैसे मुद्दों पर भी मुसलमान अखिलेश सरकार के रवैये से नाखुश दिखे. यही वजह है कि पिछले कुछ वक्त से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुसलमानों का रुझान समाजवादी पार्टी की बजाए बसपा की तरफ खिसकता नजर आ रहा था. लेकिन अब सपा का गठबंधन कांग्रेस के साथ हो जाने से तस्वीर बदल सकती है.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, बागपत, हापुड़ और गाजियाबाद जैसी सीटों पर अब समीकरण बदलते दिख रहे हैं. मुसलमानों का बड़ा तबका अखिलेश नीत गठबंधन की तरफ जा सकता है. लेकिन यहां मुसलिम मतदाता ये कहना भी नहीं भूलते कि आखिरी वक्त में जो भी बीजेपी को हराता दिखेगा, उनका वोट उसी तरफ जाएगा. यानी कई सीटों पर बसपा का उम्मीदवार सशक्त दिखने पर मुस्लिम मतदाता उसके नाम पर भी बटन दबा सकते हैं.

दरअसल पश्चिम उत्तर प्रदेश को भले ही कामधेनू की तरह देखा जाए लेकिन स्थानीय बुनियादी समस्यों से निजात अब तक नहीं मिल सकी है. हाईकोर्ट बेंच की स्थापना को लेकर चार दशकों से जनांदोलन चल रहा है लेकिन अभी तक कोई नतीजा नहीं निकला है. यही नहीं अलग राज्य बनाने की मांग, दम तोड़ते उद्योग धंधे, बंजर होती धरती, घटती पैदावार, पर्यावरण प्रदूषण, सरकारी नेौकरियों में घटता प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे उठते जरूर हैं लेकिन कोई भी पार्टी इन मुद्दों पर ज्यादा गंभीर नहीं दिखती.

भाजपा की ये रही रणनीति

  • धार्मिक आधार पर आरक्षण का विरोध

  • यांत्रिक कत्लखानों पर पूरी तरह से रोक

  • कानून व्यवस्था का मुद्दा

  • किसानों की कर्जमाफी

  • गन्ना किसानों के बकाए का भुगतान, एडवांस चेक प्रणाली

  • पश्चिमी यूपी से पलायन मुद्दा भुनाने की कोशिश

  • तीन तलाक पर मुस्लिम महिलाओं तक पहुंचने की कोशिश

  • महिलाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान

  • अवैध तरीके से जमीन के कब्जे का मुद्दा

Tags: Amit shah, BJP, लखनऊ

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