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उत्तर प्रदेश में भर्ती घोटाला! SIT दर्ज कर सकती है केस, जल्द पेश होगी रिपोर्ट

 जल्द ही रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी.

जल्द ही रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी.

एसआईटी (SIT) ने जांच में भर्तियों में हुई अनियमितता का मामला उजागर करते हुए गृह विभाग से मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराने क ...अधिक पढ़ें

लखनऊ. सहकारिता विभाग (Cooperative Department) में 2013 में राज्य भण्डारण निगम में 96 पदों पर हुई भर्तियों में अनियमितता पाई गई है. शासन की औपचारिक मंजूरी मिलते ही प्रदेश पुलिस की एसआईटी (SIT) आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सकती है. सूत्रों के अनुसार शासन के गृह विभाग में एसआईटी की रिपोर्ट पर होने वाली कार्रवाई के बारे में फैसला लिया जा चुका है. एसआईटी ने जांच में भर्तियों में हुई अनियमितता का मामला उजागर करते हुए गृह विभाग से मुकदमा दर्ज कर विवेचना कराने की संस्तुति की थी.

आला अधिकारियों पर तलवार लटकने के आसार

अपर मुख्य सचिव MVS रामी रेड्डी के मुताबिक, जांच रिपोर्ट में यूपी कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के तत्कालीन एमडी और उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवामंडल के तत्कालीन अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक ओंकार यादव  के अलावा तत्कालीन सचिव सेवामंडल व वर्तमान प्रबंध निदेशक UPCB  भूपेंद्र कुमार विश्नोई ,तत्कालीन GM SWC व  वर्तमान MD पैक्सफेड धीरेन्द्र सिंह वर्मा के साथ आवास विकास परिषद् में तैनात वरुण मिश्रा व निबंधक सहकारिता के कार्यालय के कुछ अधिकारियों का भी नाम हैं. आरोपी अफसरों को निर्धारित अर्हता में नियम के खिलाफ ढंग से बदलाव करने तथा परीक्षा एजेंसी बदल कर ओएमआर  शीट में हेराफेरी कराने में दोषी बताया गया है. इसको लेकर सहकारिता मंत्री मुकुट बिहारी वर्मा ने विभागीय अधिकारियों को समस्त साक्ष्य SIT को सौंपने के आदेश देते हुए जल्द जांच पूरा करने में सहयोग के आदेश दिए हैं.

SIT दूसरी रिपोर्ट भी जल्द शासन को भेजेगी

एसआईटी अन्य पदों पर भर्तियों की जांच अभी कर रही है. जल्द ही वह अपनी दूसरी रिपोर्ट भी शासन को भेज सकती है. दरअसल, साल 2013 में  सहकारिता विभाग में राज्य भण्डारण निगम में 96  पदों पर अपने चहेतो को भर्ती करने के लिए MD ओमकार यादव व सचिव भूपेंद्र कुमार ने 13.12.13 को पद विज्ञापित कर महज़ एक माह के अंतराल में नियमों को ताक पर रख कर  बीच में परीक्षा के लिए चयनित कंप्यूटर एजेंसी को बदलते हुए ओएमआर शीट में हेराफेरी कर अपने चहेतों की भर्ती कर ली. नतीजतन 3 कर्मचारी फ़र्ज़ी डिग्री में जांच के बाद बाहर हुए, बाकियों पर जांच जारी है.  सपा शासन में 2012 से 2017 कर मध्य 49 तरह के पदों के लिए कुल 2391 रिक्तियां विज्ञापित हुई थीं, जिसमें से 2343 पदों पर भर्तियां कर ली गई थीं. ये पद राज्य भंडारण निगम, पीसीएफ, सहकारी ग्राम विकास बैंक, यूपी कोऑपरेटिव विकास बैंक, यूपी कोऑपरेटिव यूनियन, जिला सहकारी बैंक, सहकारी ग्राम विकास बैंक व यूपीआरएनएन (पूर्व नाम पैक्सफेड) आदि सहकारी संस्थाओं में रिक्त थे. प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद वर्ष 2018 में इन भर्तियों की जांच शुरू हुई.

SIT ने  SWC को लेकर पत्राचार किया तेज़ 

साल 2013 में SWC में 96 पदों पर हुई भर्त्ती पर सहकारिता विभाग की रिपोर्ट के अनुसार सेवामण्डल को सिर्फ सहकारी संस्थान में भर्त्ती करने का अधिकार है, जबकि राज्य भंडारण निगम (SWC) राज्य सरकार का उपक्रम है जिसमें सिर्फ प्रमुख सचिव सहकारिता का प्रशाशनिक नियंत्रण होता है. आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता का कोई दखल नहीं होता है. ऐसे में तत्कालीन MD SWC ओमकार यादव द्वारा MD के रूप में 96 पदों पर अधियाचन सेवामंडल को भेजा गया व स्वयं ही तत्कालीन अध्य्क्ष सेवामण्डल के रूप में 96 पदों पर मंजूरी बिना शासन के अनुमति के हेराफेरी कर  1 माह के रिकॉर्ड टाइम में अपने चहेतों को भर्ती कर लिया गया.

वहीं दूसरी ओर तत्कालीन सचिव सेवामण्डल व वर्तमान MD उत्तरप्रदेश कोऑपरेटिव बैंक भूपेन्द्र कुमार ने 18 नवंबर 2013 को परीक्षा का पेपर बनाने से लेकर कॉपियों को जांचने के लिए कम्प्यूटर कंपनी वंडर पोस्ट क्रिएटिव सल्यूसन,लि.,विधान सभा मार्ग का चयन किया गया था जिसे 23 नवंबर को पत्र सौंपा गया कि पेपर बनाने से लेकर कॉपियों को जांचने का काम यही कंपनी करेगी. लेकिन,अचानक मनमाफिक काम न होने पर भूपेन्द्र कुमार ने इससे काम लेकर अन्य कम्प्यूटर कंपनी डाटा ट्रैक्स कम्प्यूटर सिस्टम लि. को 18 दिसंबर को काम सौंप दिया जो बिना शासकीय अनुमति व अनुबंध के किया गया. परिणामस्वरूप कंप्यूटर कंपनी के साथ मिलकर OMR शीट में हेराफेर कर मोटी रकम वसूलते हुए पदों पर भर्त्ती राज्य भण्डारण निगम में की गई जिसमें अधियाचन में हेरफेर का आरोप तत्कालीन GM वरुण मिश्रा पर लग रहे हैं. तो वहीं तत्कालीन महाप्रबंधक SWC धीरेंद्र कुमार वर्मा ने भी जमकर नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इंटरव्यू में खेल कर अपने चहेतों की भर्त्ती की.

मुख्यमंत्री को मंत्री मोती सिंह के लिखे पत्र के बाद आई जांच में तेजी

प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह 'मोती सिंह' ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कई गंभीर  सवाल उठाए थे. उनका दावा था कि साल 2012 से लेकर साल 2017 तक हुईं उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल की ओर से हुई 2324, सहकारी समितियों में हुई 2301 नियुक्ति और यूपी को ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, यूपी राज्य निर्माण सहकारी संघ और जिला सहकारी बैंकों में चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की कुल 50 नियुक्तियां हुई. लेकिन उत्तर प्रदेश सहकारी संस्थागत सेवा मंडल की ओर से हुई 2324 नियुक्तियों  में से 50 नियुक्तियों की ही जांच एसआईटी ने की है जिसके आधार पर फैसला लिया जा रहा है. बाकी नियुक्तियों की जांच अभी तक एसआईटी ने नहीं की है. पत्र के बाद एसआईटी ने दूसरे पदों की भी जांच शुरू की थी, जल्द ही रिपोर्ट शासन को सौंप देगी.

आपके शहर से (लखनऊ)

Tags: CM Yogi Aditya Nath, Up crime news, Uttar Pradesh Government

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