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पश्चिम यूपी के 12 जिलों में है अजीत सिंह का दबदबा, गठबंधन के लिए हो सकता है फायदेमंद

राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह

राष्ट्रीय लोक दल अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह

दरअसल इस दबाव के पीछे रालोद का जाट वोट बैंक है जो 12 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर उलटफेर करने में सक्षम है.

    लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर सपा और बसपा में गठबंधन तय है और इसका औपचारिक ऐलान ही अब बाकी है, जिसकी उम्मीद 15 जनवरी तक होने की है. इस गठबंधन में चौधरी अजीत सिंह की राष्ट्रीय लोक दल भी शामिल होने की कोशिश में है. हालांकि, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गठबंधन में रालोद को दो ही सीटें मिलती दिख रही हैं. जिसके बाद रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी पिछले दिनों सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में मिल भी चुके हैं. सूत्रों के मुताबिक जयंत चौधरी ने गठबंधन में रालोद के लिए कम से कम पांच सीटें मांगी हैं.

    दरअसल इस दबाव के पीछे रालोद का जाट वोट बैंक है जो 12 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर उलटफेर करने में सक्षम है. हालांकि 2014 में रालोद को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली थी. जिसके बाद माना जा रहा था कि पिता चौधरी चरण सिंह ने जाट मतदाताओं पर जो अपनी पकड़ बनाई थी, वह खत्म हो रही है. जिसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में इस बात पर मुहर लगी जब रालोद को एक बार फिर जाटलैंड में ही शिकस्त का मुंह देखना पड़ा. लेकिन कैराना लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के समर्थन से रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन की जीत से पार्टी को संजीवनी मिली. जिसके बाद कहा जाने लगा है कि बीजेपी से नाराज जाट एक बार फिर चौधरी अजीत सिंह की तरफ लौट रहा है.

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    वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र दुबे कहते हैं कि राष्ट्रीय लोक दल के नेता अजीत सिंह बारगेनिंग करने में माहिर हैं लेकिन गठबंधन उन्हें दो से ज्यादा सीटें नहीं देगा. इसकी एक वजह यह भी है उनके पास विकल्प का अभाव है. वहीं मामले में बीजेपी के प्रवक्ता हीरो बाजपेई कहते हैं कि यह बंधन या गठबंधन नहीं है बल्कि स्वार्थ का गठबंधन है. पहले तय कर लें कि कौन कितनी सीटों पर लड़ेगी.

    लोकसभा चुनाव से पहले एक बार फिर कहा जा रहा है कि पश्चिम यूपी में रालोद बीजेपी के खिलाफ एक मजबूत हथियार हो सकता है. अगर गठबंधन में रालोद शामिल होती है तो पश्चिम यूपी के 12 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर जाटों का निर्णायक होना गठबंधन के लिए फायदेमंद होगा.

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    उधर मामले में समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया गठबंधन को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे हैं. वे कहते हैं कि हमें बीजेपी को हराना है और कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा. यह राष्ट्रीय नेतृत्व तय करेगा. फिलहाल यह तय है कि गठबंधन हो चुका है.

    वहीं राष्ट्रीय लोकदल के प्रवक्ता अनिल दुबे कहते हैं कि हम अखिलेश यादव से मिलने गए थे और सीटों पर बात हुई है. कौन कितनी सीटों पर लड़ेगा, यह तय हो जाएगा लेकिन इतना स्पष्ट है कि बीजेपी को हराने के लिए गठबंधन हो चुका है.

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    हालांकि यह भी सही है कि 2014 के लोकसभा चुनावों में रालोद को एक भी सीट नहीं मिल सकी. यह भी माना जाता है कि एक दशक पहले जैसा प्रभाव अजित सिंह का इस क्षेत्र में नहीं रहा. लेकिन उपचुनाव में जीत से अजित सिंह की पार्टी रालोद के प्रभाव को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता.

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    Tags: Ajit singh, Lucknow news, Up news in hindi

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