बीजेपी के साथ दलितों व पिछड़ों को जोड़ने के लिए संघ मनाएगा रक्षाबंधन

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 24, 2018, 4:19 PM IST
बीजेपी के साथ दलितों व पिछड़ों को जोड़ने के लिए संघ मनाएगा रक्षाबंधन
सांकेतिक तस्वीर

इस बार संघ कार्यकर्ता दलित और मलिन बस्तियों में रक्षाबंधन मनाएंगे. तैयारी यह भी है कि रक्षाबंधन से कुंभ मेले के आयोजन के बीच पड़ने वाले सभी त्योहारों के सहारे दलितों और पिछड़ों को जोड़ा जाए.

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उत्तर प्रदेश उपचुनाव के नतीजों और सपा-बसपा गठबंधन की गणित ने भगवा टोली को बेचैन किया हुआ है. इसीलिए उसकी कोशिश है कि सरोकारों के सहारे दलितों और पिछड़ों की लामबंदी हो. यही वजह है कि यूपी में बीजेपी की जमीन तैयार करने के लिए आरएसएस ने भी कमर कस ली है. 2019 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर दलितों और पिछड़ों को अपने पक्ष में एकजुट करने की मुहिम को अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आगे बढ़ाएगा. संघ ने रक्षाबंधन पर्व के सहारे दलितों और पिछड़ों से रिश्ते की डोर मजबूत करने की तैयारी की है.

इस बार संघ कार्यकर्ता दलित और मलिन बस्तियों में रक्षाबंधन मनाएंगे. तैयारी यह भी है कि रक्षाबंधन से कुंभ मेले के आयोजन के बीच पड़ने वाले सभी त्योहारों के सहारे दलितों और पिछड़ों को जोड़ा जाए. सामाजिक सरोकार की शुरुआत आरएसएस ने रक्षाबंधन पर्व से की है. संघ के कार्यकर्ता दलितों और पिछड़ों की बस्तियों में जाकर वहां लोगों को रक्षा सूत्र बांधेगा.

गौरतलब है कि आरएसएस वर्ष भर में प्रमुख 6 त्योहारों को मनाता है. इनमें रक्षाबंधन समेत गुरू पूर्णिमा, नव वर्ष प्रतिपदा, हिन्दू साम्राज्य दिवस, विजय दशमी व मकरसक्रान्ति शामिल हैं. रक्षाबंधन कार्यक्रम को बड़ी तैयारी है. संघ ने प्रत्येक जिलों में रक्षाबंधन के पर्व पर बड़े कार्यक्रम करने की योजना बनाई है.

लखनऊ में चार बड़े कार्यक्रम हो रहे हैं. लखनऊ दक्षिण भाग का रक्षाबंधन कार्यक्रम 25 अगस्त को कानपुर रोड स्थित सीएमएस के सभागार में होगा. इसी दिन पश्चिम क्षेत्र का रक्षाबंधन कार्यक्रम शाम को शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय के सभागार में किया जाएगा. उत्तर भाग का सीएमएस ऑडीटोरियम एलडीए कालोनी कानपुर रोड पर होगा. साथ ही यूपी टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, आईटी कालेज में भी एक कार्यक्रम रखा गया है. जिसमें संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रहेंगें.

संघ के सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी का यह कहना कि हिंदू समाज की समस्या ‘कौन हूं? कहां से हूं? किस जिले से हूं?’ है. कार्यकर्ता इसे दूर कर हिंदू समाज को एकजुट करें. कोशिश है कि इन सरोकारों से दलितों व पिछड़ों में जो शंकाएं हैं वह दूर होंगी और उन्हें हिंदू समाज से जोड़ा जाएगा. यह अहसास दिलाया जाएगा कि वे हिंदू समाज का अभिन्न हिस्सा हैं.

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First published: August 24, 2018, 3:27 PM IST
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