यूपी में सेहतमंद विकास : गांवों की सेहत बुलंद करेगा योगी सरकार का हेल्थ सब-सेंटर

इन हेल्थ सब-सेंटरों में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र काम करने लगें इसके लिए योगी सरकार 7 करोड़ रुपये खर्च करेगी.
इन हेल्थ सब-सेंटरों में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र काम करने लगें इसके लिए योगी सरकार 7 करोड़ रुपये खर्च करेगी.

यूपी के हेल्थ सब-सेंटर्स में प्राथमिक स्तर पर बीपी, शुगर, टीबी, खसरा, कुष्ठ रोग, मलेरिया, हृदय, टाइफायड और दूसरी बीमारियां की पहचान की जाएगी और फिर इन रोगियों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास भेजा जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 5, 2020, 8:07 PM IST
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लखनऊ. टाइफायड, मलेरिया और टीबी जैसी बीमारियों की जांच के लिए अब गांव के लोगों को शहर का मुंह नहीं ताकना होगा. क्योंकि योगी सरकार (Yogi Government) ने फैसला किया है कि वह यूपी (Uttar Pradesh) के गांव में ही इन बीमारियों की जांच और इलाज की व्यवस्था करेगी. योगी सरकार ने ऐसी स्वास्थ्य योजना बनाई है कि गांव के लोगों को इलाज के लिए भटकने की जरूरत नहीं. गांव के हेल्थ सब-सेंटरों को अपग्रेड करके इस लायक बना देंगे कि वो इन बीमारियों का इलाज अपने यहां ही कर सकें.

7 करोड़ रुपये खर्च कर अपग्रेड होंगे हेल्थ सब-सेंटर

इन हेल्थ सब-सेंटरों में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र काम करने लगें इसके लिए योगी सरकार 7 करोड़ रुपये खर्च करेगी. पहले चरण में लखनऊ में 97 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र खोले जाएंगे. दूसरे और तीसरे चरण में पूरे राज्य में स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र खोल दिए जाएंगे. सरकार की योजना है कि हर स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र को 7 लाख रुपये दिए जाएंगे. इन केंद्रों में 12 तरह की वैसी बीमारियों का पता लगाया जा सकेगा जो संक्रमण की श्रेणी में नहीं आते. इसके बाद इन बीमारियों का यहां इलाज भी किया जाएगा. चीफ मेडिकल अफसर डॉ. संजय भटनागर ने कहा कि ये 97 स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र को राज्य सरकार से मंजूरी मिल चुकी है. ये केंद्र प्राइमरी और कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर्स में बेहतर इलाज सुनिश्चित करेंगे. इसके लिए कम्यूनिटी हेल्थ अफसर की नियुक्ति की जाएगी.




कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर की होगी नियुक्ति

इन केद्रों में प्राथमिक स्तर पर बीपी, शुगर, टीबी, खसरा, कुष्ठ रोग, मलेरिया, हृदय, टाइफायड और दूसरी बीमारियां की पहचान की जाएगी और फिर इन रोगियों को स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पास भेजा जाएगा. अब तक इन हेल्थ सब-सेंटरों में एएनएम बैठा करते थे लेकिन अब कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर इस काम के लिए नियुक्त किए जाएंगे. किंग जॉर्ड मेडिकल यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों में छह महीने की ट्रेनिंग के बाद नर्सेज को सीएचओ के रूप में नियुक्त किया जाएगा. ये सभी सीएचओ को नेशनल हेल्थ मिशन की ओर से सैलरी दी जाएगी. इन केंद्रों के जरिए गांवों में जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा. इसके तहत उन्हें हफ्ते में दो दिन योग सिखाया जाएगा, ताकि वे अपने शरीरऔर दिमाग का ख्याल रख सकें.
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