लाइव टीवी

राम मंदिर के मुद्दे पर संतों में ही मतभेद, अलग-अलग दावों से उठ रहे सवाल
Lucknow News in Hindi

Amit Tiwari | News18 Uttar Pradesh
Updated: January 31, 2019, 1:59 PM IST

केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अयोध्या के संत तो दो फाड़ में नजर आ ही रहे हैं, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वमिस्वरूपनंद सरस्वती और राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई का दावा करने वाली विश्व हिंदू परिषद के भी अलग-अलग दावे हैं.

  • Share this:
लोकसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ बीजेपी राम मंदिर निर्माण को लेकर अपने प्रतिबद्धता जाहिर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई बार-बार टलने से साधु-संतों के साथ ही रामभक्तों में बढ़ रहे असंतोष को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर गैर विवादित 67 एकड़ भूमि को उनके मालिकों को लौटाने की मांग की है. केंद्र सरकार के इस कदम के बाद अयोध्या के संत तो दो फाड़ में नजर आ ही रहे हैं, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वमिस्वरूपनंद सरस्वती और राम मंदिर आंदोलन की अगुवाई का दावा करने वाली विश्व हिंदू परिषद के भी अलग-अलग दावे हैं.

मोदी-योगी के खिलाफ अखिलेश का पोल-खोल प्लान, सोशल मीडिया पर आक्रामक होगा कैंपेन

जिसके बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने की होड़ है या फिर कुछ और. जहां मामले में मुस्लिम पक्षकार का कहना है कि उसकी लड़ाई 2.77 एकड़ विवादित भूमि की है और उसका बाकी की जमीन से कोई लेना देना नहीं है. दूसरी तरफ हिंदू पक्षकार अपना दावा अलग ही कर रहे हैं.

निर्मोही अखाड़ा ने किया राम भक्त होने का दावा



जहां एक ओर निर्मोही अखाड़ा ने केंद्र सरकार से राम भक्त होने का दावा करते हुए सहयोग की मांग की है. वहीं, श्री रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने रामलला की भूमि को उन्हें ही प्रदान करने की मांग की है, जबकि निर्मोही अखाड़े ने विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राम जन्मभूमि न्यास पर लोगों को लड़ाने और राजनीति करने का आरोप लगाया.

राहुल गांधी के गढ़ अमेठी के दो युवाओं को Twitter पर फॉलो कर रहे हैं पीएम मोदी

निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेन्द्र दास का कहना है कि विश्व हिंदू परिषद और राम जन्म भूमि न्यास किसी भी रूप में राम मंदिर मामले में पक्षकार नहीं हैं. सिर्फ दो ही प्रमुख पक्षकार हैं एक सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और दूसरा निर्मोही अखाड़ा. गौरतलब है कि राम जन्म भूमि बनाम राम जन्म भूमि न्यास का मुकदमा फैजाबाद कोर्ट में लंबित है.

प्रियंका गांधी की एंट्री से बसपा बदल रही रणनीति, मायावती के चुनाव लड़ने पर सस्पेंस!

ऐसे में निर्मोही अखाड़ा विवाद को हल करने के लिए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को जन्म स्थान से दूर विद्या कुंड में मस्जिद बनाने के लिए जमीन देने के लिए तैयार है. साथ ही निर्मोही अखाड़ा की मांग है कि रामलला के मंदिर के लिए जो अधिग्रहित जमीन और अंदर की जमीन है उसे केंद्र सरकार निर्मोही अखाड़े को सौंप दे.

लोकसभा चुनावः राहुल गांधी के गढ़ में कांग्रेस को झटका, 13 सभासद BJP में शामिल

स्वरूपानंद सरस्वती ने 21 फ़रवरी को किया भूमि पूजन का ऐलान

उधर बात करें तो शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का मानना है कि राम मंदिर का निर्माण साधु-संतों द्वारा ही होगा. इसका सियासी या कानूनी हल निकलना संभव नहीं दीखता. प्रयागराज कुंभ में दो दिनी परम धर्म संसद के आखिरी दिन राम मंदिर को लेकर धर्मादेश जारी किया गया. शंकराचार्य स्‍वामी स्वरूपानंद सरस्वती की ओर से जारी इस आदेश में बसंत पंचमी के बाद प्रयागराज से अयोध्‍या रवाना होने का आह्वान किया गया है. साथ ही कहा गया है कि राम मंदिर निर्माण के लिए गोली खाने को भी तैयार रहें.

विहिप भी कर रही कुंभ में धर्म संसद

दूसरी तरफ राम मंदिर आन्दोलन की अगुवाई की बात करने वाली विहिप भी सरकार के रुख पर हमलावर है. वह किसी भी कीमत पर इस मुद्दे को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहती. हालांकि उसने केंद्र सरकार की याचिका का स्वागत किया है, लेकिन 31 जनवरी से कुंभ में लगने वाली धर्मसंसद में राम मंदिर आन्दोलन को लेकर नई रणनीति पर चर्चा होगी. हालांकि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने खुद को इस संसद से अलग कर लिया है. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि इस धर्म संसद का मकसद क्या है.

एक क्लिक और खबरें खुद चलकर आएंगी आपके पास, सब्सक्राइब करें न्यूज़18 हिंदी  WhatsApp अपडेट्स

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए लखनऊ से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 31, 2019, 12:56 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर