क्या BSP सुप्रीमो मायावती की वजह से अखिलेश यादव ने उठाया है ये कदम?

आजकल मीडिया और सोशल मीडिया से दूर हो गए हैं अखिलेश?
आजकल मीडिया और सोशल मीडिया से दूर हो गए हैं अखिलेश?

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव अपनी हार के कारणों में कहीं मीडिया को भी शामिल तो नहीं कर रहे और इसी वजह से दूरी बना ली है?

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आम चुनाव में गठबंधन को मिली अप्रत्याशित हार और बसपा सुप्रीमो मायावती के आरोपों से परेशान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ऊबर नहीं पा रहे हैं. जबकि हर किसी को उम्‍मीद थी कि वह नयी रणनीति के साथ पार्टी में ऊर्जा का संचार करने के लिए कुछ कारगर कदम उठाएंगे, लेकिन ऐसा भी होता नहीं दिख रहा है.

23 जुलाई के बाद उठाया ये कदम, लेकिन...
23 मई को चुनाव में मिली करारी हार के बाद अखिलेश यादव ने सपा प्रवक्ताओं को हटा दिया था, जो कि अब तक बहाल नहीं हो सके हैं. जबकि मीडिया फ्रेंडली माने जाने वाले अखिलेश यादव अब पत्रकारों के सवालों को टालने में माहिर हो गए हैं. यही नहीं, लोकसभा चुनावों में हार के बाद सपा प्रमुख ने ना सिर्फ मीडिया बल्कि सोशल मीडिया से भी दूरी बना ली. यही वजह है कि 23 मई के बाद उनके ट्वीट की संख्या काफी कम हो गयी है या कहा जाए कि न के बराबर हो गयी है.

इस दिन से सोशल मीडिया से हैं गायब
यूपी की बार काउंसिल अध्यक्षा दरवेश यादव हत्याकांड में मीडिया में सीमित बयान और दो-तीन ट्वीट के बाद अखिलेश यादव सोशल मीडिया से भी गायब हैं. अखिलेश यादव मीडिया से क्यों दूरी बनाए हुए हैं इसका जबाब उनके पहले के बयानों में ढूंढा जा सकता है. वह बीजेपी को मुद्दे से भटकाने में माहिर पार्टी के साथ ही वादा खिलाफी करने वाली सबसे बड़ी पार्टी होने का बयान देते रहे हैं. मीडिया में बीजेपी के प्रचार-प्रसार को लेकर तंज कसने वाले अखिलेश अक्सर पीसी करने के बाद पत्रकारों से कहते थे कि इसे दिखा देना, इसे भी चला देना. जबकि मीडिया उनके बयानों को तवज्जों भी देता था.





फिर क्‍यों मीडिया से बनाई दूरी?
अखिलेश यादव अपनी हार के कारणों में कहीं मीडिया को भी शामिल तो नहीं कर रहे और इसी वजह से दूरी बना ली है. जबकि गठबंधन कर लोकसभा की 10 सीटें जीतने के बाद मायावती सोशल मीडिया और मीडिया के सामने आ गयी हैं. मीडिया से दूर रहने वाली मायावती आम चुनाव के दौरान अपने ट्विटर एकांउट के सहारे सोशल मीडिया से जुड़ी और मीडिया उनको जमकर फालो कर रही है. वहीं, अखिलेश की तरह ही सोशल मीडिया के सहारे प्रदेश में हो रही घटनाओं के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार को घेर रही हैं.

क्‍या अखिलेश का ये कदम जरूरी था?
आम चुनाव में पत्रकारों से अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करने का बयान देने वाले अखिलेश यादव भले ही कोई नई रणनीति के तहत मीडिया और सोशल मीडिया से दूरी बना लिए हों, लेकिन लोकतन्त्र में राजनीतिक दलों को अपने विचारों और नीतियों के साथ जनता के बीच बने रहा भी जरूरी होता है.

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