कोरोना संकट के बहाने किसानों से गेहूं खरीद बंद, झूठे आंकड़े पेश कर रही BJP सरकार: अखिलेश

UP: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर तंज किया है.   (File Photo)

UP: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर तंज किया है. (File Photo)

Lucknow News: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सवाल किया है कि यूपी में जब अधिकांश जगह क्रय केन्द्र ही नहीं खुले. जहां खुले वहां बोरों-नकदी का अभाव रहा, घटतौली और किसानों को लौटाने की खब़रें आती रहीं तो कैसे गेहूं की खरीद का ग्राफ चढ़ गया?

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 22, 2021, 5:14 PM IST
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लखनऊ. समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने कहा है कि भाजपा सरकार के कोरोना संकट (Corona Crisis) के चलते हाथ पांव फूले हुए है. मुख्यमंत्री जी किंकर्तव्यविमूढ़ हो गए हैं और सरकार अनिर्णय तथा जड़ता की शिकार हो चली है. प्रदेश में आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है तो राज्य का सबसे बड़ा अन्नदाता किसान (Farmer) भी सरकारी उपेक्षा का शिकार बनाया जा रहा है. अर्थव्यवस्था में किसान का गहरा नाता है. भाजपा अपनी गलत नीतियों के चलते प्रदेश को बर्बादी, बदहाली में ढकेल देने पर तुली है. जो सरकार अपने दोष दूसरों पर मढ़ कर केवल सत्ता भोग में ही लिप्त है, उसके जाने से ही जनता को अपनी तकलीफों से मुक्ति मिल सकती है.

सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि कोरोना संकट के बहाने भाजपा सरकार ने किसानों से गेहूं की खरीद बंद कर दी है. सरकार खरीद के झूठे आंकड़े पेश कर रही है, जब अधिकांश जगह क्रय केन्द्र ही नहीं खुले. जहां खुले वहां बोरों-नकदी का अभाव रहा, घटतौली और किसानों को लौटाने की खब़रें आती रहीं तो कैसे खरीद का ग्राफ चढ़ गया? किसान को 1975 रूपये की एमएसपी मिल रही है तो फिर वह आंदोलन क्यों कर रहा है? किसान बाजार में 15 से 1700 रुपये प्रति कुंतल में गेंहू बेचने को मजबूर है. ऐसा लगता है कि बिचौलियों को फायदा पहुंचाकर गेंहू खरीद का लक्ष्य हासिल करने की साजिश की गई है.

हिम्मत है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं सीएम: अखिलेश

अखिलेश ने चुनौती देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी में हिम्मत है तो वह पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं. झूठ बोलना और जनता को भ्रमित करना भाजपा का स्वभावगत चरित्र बन गया है. गेंहू क्रय केन्द्रों में खरीद की सच्चाई अखबारों में छप रही है. अधिकारी केवल बयान दे रहे हैं कि सब ठीक होगा. मुख्यमंत्री जी फर्जी आंकड़ों पर फूले नहीं समा रहे हैं. कोरोना की पहली लहर में वे ऐसे ही वाहवाही लूट चुके हैं पर आज हालात उनके काबू से बाहर है. अस्पतालों से लेकर शवदाह गृहों तक लाशों के ढेर हैं, उनकी आत्माएं श्राप दे रही हैं.
फसल को अग्निकाण्डों और अंधड़, असामयिक बरसात से भी काफी नुकसान पहुंचा

उन्होंने कहा कि केवल खरीद केन्द्रों की गड़बड़ियों से ही किसान परेशान नहीं रहा है. उसकी फसल को अग्निकाण्डों और अंधड़ और असामयिक बरसात से भी काफी नुकसान पहुंचा है. सैकड़ों हेक्टेअर गेंहू खलिहानों में लगी आग में जलकर राख हो गया. बुधवार शाम को अंधड़-बारिश से बड़े पैमाने पर खेतो में कटा पड़ा गेंहू उड़ गया है, जो खेतों में खड़ा है, उसके बचने की उम्मीद कम है. आम की फसल को बहुत नुकसान हुआ है.

किसान की बर्बादी को देखने की स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री जी को कहां फुर्सत है? उसको राहत देने के लिए मुआवजे की घोषणा नही की गई है. किसान की हालत यह है कि वह दुर्दशा पर कर्ज और तंगहाली में वह अपनी जान ही देता आया है, यही विकल्प भाजपा सरकार ने गरीब और किसान के लिए छोड़ रखा है. ईश्वर ऐसी संवेदनशून्य सरकार से जल्द मुक्ति दिलाए तभी किसान को अन्याय और शोषण से मुक्ति मिलेगी.
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