UP उपचुनावों में समर्थन देने वाले मतदाताओं का धन्यवाद, विकास के लिए हम निरंतर वचनबद्ध रहेंगे: अखिलेश

सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
सपा प्रमुख अखिलेश यादव (फाइल फोटो)

अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने अपने ट्वीट में लिखा है कि उपचुनावों में समर्थन देने वाले सभी मतदाताओं का हार्दिक धन्यवाद. विकास के लिए हम निरंतर वचनबद्ध रहेंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 11, 2020, 3:02 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा उपचुनावों (UP Assembly By-Election) की 7 सीटों में से महज अपनी एक जौनपुर (Jaunpur) की मल्हनी सीट (Malhani Seat) बचाने में कामयाब रहे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने ट्वीट कर मतदाताओं का धन्यवाद दिया है. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने लिखा है कि उपचुनावों में समर्थन देने वाले सभी मतदाताओं का हार्दिक धन्यवाद. विकास के लिए हम निरंतर वचनबद्ध रहेंगे.

बता दें इससे पहले मंगलवार को उपचुनावों का परिणाम आने के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार का असली चेहरा अब सामने आ रहा है. भाजपा राज में अपराध और अपराधियों की संख्या बढ़ी है. सत्ता का संरक्षण प्राप्त होने से वे बेखौफ हैं. निर्दोष लोगों, गरीबों, किसानों, नौजवानों की परेशानियां बढ़ी है. भाजपा अपनी अहंकारी एकाधिकारवादी राजनीति से देश में लोकतंत्र को भी कमजोर करने में लगी है. भाजपा चुनाव जीतने का षड्यंत्र करती रहती है. समाजवादी पार्टी लोकतंत्र को बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर अभियान छेड़ेगी.


चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तभी होंगे, जब उनमें पारदर्शिता हो: अखिलेश



अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा ने देश की संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. उसमें जरा भी लोकलाज नहीं बची है. जनता के मनोबल को गिराने की उसकी साजिशें चल रही हैं. चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तभी होंगे, जब उनमें पारदर्शिता हो. भाजपा ने चुनावों को अपनी साजिशों से विवादास्पद और अविश्वसनीय बना दिया है. जनता की जागरूकता और उसके सहयोग-समर्थन से ही लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई जारी रहेगी.



'किसानों, नौजवानों को सबसे ज्यादा परेशनियां उठानी पड़ रहीं'

अखिलेश यादव आज पार्टी मुख्यालय, लखनऊ में विभिन्न जनपदों से आए कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि भाजपा राज में किसानों, नौजवानों को सबसे ज्यादा परेशनियां उठानी पड़ रही हैं. 3 नए कृषि कानूनों से किसानों के हितों को चोट पहुंची है और वे सभी आक्रोशित है. उनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही है. किसानों के धान की लूट हो रही है. सरकारी दावे के बावजूद उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है.
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