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UP: सियासी चौराहे पर खड़े हैं आज़म खान, किस तरफ बढ़ायेंगे कदम?

सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सांसद आजम खान को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं. (File Photo)
सपा के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सांसद आजम खान को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं. (File Photo)

UP: विपक्ष में आज़म खान (Azam Khan) को लेकर होड़ सी दिख रही है. पहले कांग्रेस (Congress) और अब असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) आज़म खान के जख्म सहला रहे हैं. इस बीच वो ये बताना नहीं भूलते कि उनकी अपनी समाजवादी पार्टी ने उनका साथ छोड़ दिया है.

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लखनऊ. पिछले एक साल से समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के वरिष्ठ नेता और रामपुर से सांसद आजम खान (Azam Khan) जेल में बंद हैं. फिर भी यूपी की राजनीति में उनकी चर्चा लगातार जारी है. विपक्ष में तो आज़म खान को लेकर होड़ सी दिख रही है. पहले कांग्रेस (Congress) और अब असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) आज़म खान के जख्म सहला रहे हैं. इस बीच वो ये बताना नहीं भूलते कि उनकी अपनी समाजवादी पार्टी ने उनका साथ छोड़ दिया है. ऐसे आरोपों पर सपा सफाई देने लगती है कि आज़म उनके हैं और उसे दिखावटी प्रेम जाहिर करने की जरूरत नहीं है. फिलहाल आज़म खान को लेकर सबसे बड़ा सवाल इन दिनों यही तैर रहा है कि वो किस सियासी नाव में सवारी करेंगे?

अखिलेश की रामपुर यात्रा को लेकर चर्चाएं तेज

पिछले साल फरवरी में आजम खान को जेल हुई थी. धीरे-धीरे एक साल पूरा होने वाला है. उनके जेल जाने के कुछ दिनों बाद से ही ये सवाल उठने लगे कि अखिलेश यादव और सपा ने आज़म खान को तन्हा छोड़ दिया है. इसकी वजह भी थी. जब आज़म पर मुकदमे हो रहे थे, तब पार्टी ने सरकार के खिलाफ कोई कड़ा स्टैण्ड नहीं लिया. जेल जाने के बाद आजम से सिर्फ एक मर्तबा ही अखिलेश यादव मिले. उस मुलाकात के साल भर बाद वे रामपुर पहुंच रहे हैं. अब इस यात्रा के तमाम सियासी मायने निकाले जा रहे हैं.



'आजम से दूरी भी, करीबी भी'
NEWS 18 उर्दू के सीनियर एसोसिएट एडिटर तारिक कमर ने इसके सियासी मायने बताये. तारिक कमर ने कहा कि अखिलेश यादव को लगता है कि रामपुर की चौहद्दी के पार आजम खान का मुस्लिम वोट बैंक पर कोई अख्तियार नहीं रहा. इसके अलावा आज़म के पक्ष में ज्यादा दिखकर एक बड़े हिन्दू वोट बैंक की नाराजगी कौन मोल ले? इसीलिए सपा न तो सड़क पर उतरी और ना ही पार्टी के नेताओं को आज़म की परिक्रमा करते देखा गया. वो आज़म से दूर भी रहना चाहते हैं और मौके-मौके करीबी भी जाहिर करते रहते हैं." अभी हफ्ते भर पहले ही अखिलेश यादव ने अयोध्या से लेकर चित्रकूट तक भगवान राम के दर्शन किये थे.



अखिलेश यादव आज़म खान के नहीं हुए तो...

लेकिन, सपा की इसी डिप्लोमैसी से कांग्रेस और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को आज़म खान के जरिये सपा पर हमला बोलने का मौका मिल गया. कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के चेयरमैन शाहनवाज आलम कहते रहे हैं कि जब अखिलेश यादव आज़म खान के नहीं हुए तो मुस्लिमों के क्या होंगे? दूसरी तरफ ये भी चर्चा में है कि असदुद्दीन ओवैसी आज़म खान से जेल में मिलने या रामपुर उनके घर जा सकते हैं. हालांकि पार्टी के प्रवक्ता असीम वकार ने कहा कि ओवैसी के आने की कोई औपचारिक जानकारी उनके पास नहीं है लेकिन, किसी से कोई मिलता है तो हर्ज ही क्या है.

सपा आजम की पार्टी है, कैसे छोड़ सकती हैं: सुम्मैया राणा

असल में कांग्रेस और AIMIM आजम खान के जरिये सपा को घेरना चाहती है. दोनों का मकसद एक ही है, मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी. आज़म के लिए दरियादिली दिखाने वाली ऐसी पार्टियों पर सपा भड़की हुई है. सपा की फायर ब्राण्ड प्रवक्ता सुम्मैया राणा ने कहा कि असदुद्दीन औवैसी को आज़म खान के नाम की क्या जरूरत पड़ गयी. झूठी खबर फैलाकर उन्हें अपनी ओर लाने की कोशिशें बेकार होंगी. समाजवादी पार्टी आज़म खान की पार्टी है और वो कैसे इसे छोड़ के जा सकते हैं. ये सिर्फ अफवाह है.

3 केस में जमान मिलनी है बाकी

बता दें कि आज़म खान कई मामलों में जेल में बन्द हैं. उन पर मुकदमे कराने वाले रामपुर के ही आकाश सक्सेना ने बताया कि अभी तीन मुकदमों में जमानत मिलनी बाकी है. आज़म पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट, पैन कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप हैं. इन तीन मामलों में उन्हें जमानत नहीं मिली है. 26 फरवरी 2020 को आज़म खान ने इन्हीं मामलों में रामपुर की कोर्ट में सरेण्डर किया था. वे जेल भेज दिये गये थे लेकिन अगले दिन उन्हें रामपुर से सीतापुर जेल ट्रांसफर कर दिया गया था. तब से वे यहीं बन्द हैं.
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