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नए कृषि कानूनों के खिलाफ यूपी में समाजवादी पार्टी 7 दिसंबर से करेगी किसान यात्रा की शुरुआत

सपा प्रमुख अखिलेाश यादव ने किसान यात्रा के आयोजन का आह्वान किया है. (फाइल फोटो)
सपा प्रमुख अखिलेाश यादव ने किसान यात्रा के आयोजन का आह्वान किया है. (फाइल फोटो)

किसान यात्राओं में ‘किसानों की आय बढ़ाओ और खेती-किसानी बचाओ' की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी सुविधानुसार अपने साधनों - पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल - से शामिल होंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 3, 2020, 9:22 PM IST
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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हर जनपद में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) किसान यात्रा (Kisan Yatra) का आयोजन करेगी. यह आयोजन केंद्र सरकार (central government) के नए कृषि कानून (new agricultural laws) के खिलाफ और किसानों के समर्थन में होगा. किसान यात्रा का आह्वान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया है. अखिलेश यादव के निर्देश के मुताबिक, 7 दिसंबर 2020 से यूपी के हर जनपद में किसान यात्रा आयोजित की जाएगी.

‘किसानों की आय बढ़ाओ और खेती-किसानी बचाओ' की मांग को लेकर समाजवादी पार्टी की किसान यात्राओं में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता, पदाधिकारी सुविधानुसार अपने साधनों - पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल - से शामिल होंगे. इन यात्राओं के दौरान किसानों के मुद्दों पर जनता को जागरूक किया जाएगा. अखिलेश यादव ने कहा है कि किसानों की हर तकलीफ पर उल्टे उन्हें ही कोसने वाली भाजपा सरकार में किसान चौतरफा मार से बेहाल हैं. किसान को न तो गेहूं, न धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिला है. न ही उसकी आय दुगनी हुई है. सरकारी क्रय केन्द्र भाजपा की बदनियति का शिकार हो गए हैं. अपनी आवाज उठाने वाले किसानों पर भाजपा लाठी, गोली, आंसू गैस और पानी की बौछार कर दमनचक्र चलाती है.

अखिलेश यादव ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और आम जनता से अपील की है कि वे अन्नदाता के संघर्ष में उनका साथ दें और हरसम्भव मदद करें. किसान भाइयों के लिए आटा, दाल, चावल और दूध की कमी न होने पाए. गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब और हरियाणा के किसान दिल्ली बॉर्डर पर जमे हैं. केंद्र सरकार से किसानों की दूसरे राउंड की बातचीत चल रही है. इस बीच देश के विभिन्न हिस्से से किसानों के समर्थन में आवाज उठने लगी है. वामपंथी संगठन से लेकर ट्रक चालक यूनियन तक किसानों के पक्ष में आंदोलन करने को तैयार हैं.
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