अखिलेश यादव से मिले ओमप्रकाश राजभर, गठबंधन को लेकर अटकलें तेज

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 23, 2019, 3:48 PM IST
अखिलेश यादव से मिले ओमप्रकाश राजभर, गठबंधन को लेकर अटकलें तेज
सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने की अखिलेश यादव से मुलाकात

सपा (Samajwadi Party) मुख्यालय पर दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई, जिसके बाद गठबंधन (Alliance) को लेकर कयासों का बाजार गर्म है.

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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार  में मंत्री रहे और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) ने शुक्रवार को लखनऊ (Lucknow) में समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से मुलाकात की. सपा मुख्यालय पर दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई, जिसके बाद गठबंधन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात सूबे में होने वाले आगामी उपचुनाव में गठबंधन को लेकर हुई है.

भाजपा तथा प्रदेश सरकार के खिलाफ लगातार बयान देने वाले ओमप्रकाश राजभर को लोकसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था. उसके बाद से पहली बार ओमप्रकाश राजभर ने बड़ा कदम उठाया है. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि अनिल राजभर (Anil Rajbhar) को प्रमोट कर योगी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने से भी ओमप्रकाश राजभर बेचैन हैं. यही वजह है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष से आगे की रणनीति पर चर्चा की है. ताकि अपने राजभर वोट में सेंध लगने से रोका जा सके.

उपचुनाव में दो सीटों पर लड़ने की तैयारी में हैं राजभर
दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी से गठबंधन तोड़ अकेले मैदान में उतरने वाले ओमप्रकाश राजभर सूबे की 13 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में दो सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रहे हैं. लिहाजा वो गठबंधन की तलाश में हैं. राजभर यह कह चुके हैं कि वो अम्बेडकरनगर की जलालपुर और बहराइच की बलहा सीट से प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे. कहा जा रहा है कि योगी कैबिनेट से निकाले जाने के बाद राजभर बदला लेने के मूड में हैं. ऐसे में वो सपा के साथ गठबंधन कर उपचुनाव लड़ सकते हैं. गौरतलब है कि 2017 के विधानसभा चुनाव में राजभर ने बीजेपी से गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. जिसके बाद पहली बार पार्टी के चार विधायक जीते थे.

अखिलेश के लिए भी उपचुनाव है चुनौती
दरअसल, कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव भी उपचुनाव में गठबंधन को लेकर मंथन कर रहे हैं. पहले कांग्रेस और फिर बसपा से गठबंधन असफल रहने के बाद उन्हें नए साथी की तलाश है. इसके पीछे वजह यह है कि इस बार बीजेपी के साथ पूर्व सहयोगी से भी उनका मुकाबला है. यह पहली बार है जब बसपा उपचुनाव लड़ने जा रही है. ऐसे में सपा के बेहतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी भी अखिलेश के कंधों पर होगी. जिन 13 सीटों पर उपचुनाव होने हैं उनमे से कुछ सीटों पर राजभर की पार्टी से गठबंधन फायदेमंद हो सकता है.

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First published: August 23, 2019, 3:09 PM IST
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