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दूसरे फेज में यूपी की आठ सीटों पर इन दिग्गजों में कांटे की टक्कर, जानिए कौन है किस पर भारी

इन दिग्गजों के बीच है मुकाबला

इन दिग्गजों के बीच है मुकाबला

इस बार बीजेपी को सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के अलावा कांग्रेस से भी चुनौती मिल रही है. दूसरे चरण में बीजेपी का 6 सीटों पर सीधा मुकाबला बसपा के साथ है, जबकि दो सीटों पर सपा और रालोद के उम्मीदवार से उसे चुनौती मिल रही है.

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यूपी में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में 18 अप्रैल को पश्चिम यूपी की आठ सीटों पर मतदान होना है. इस बार इन आठ सीटों पर 85 उम्मीदवार मैदान में हैं. फतेहपुर सिकरी में सर्वाधिक 15 तो नगीना में सबसे कम सात उम्मीदवार मैदान में हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव में ये सभी आठों सीटें बीजेपी के खाते में गई थी. इस बार बीजेपी के सामने पिछले प्रदर्शन की दोहराने की चुनौती है.

इस बार बीजेपी को सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के अलावा कांग्रेस से भी चुनौती मिल रही है. दूसरे चरण में बीजेपी का 6 सीटों पर सीधा मुकाबला बसपा के साथ है, जबकि दो सीटों पर सपा और रालोद के उम्मीदवार से उसे चुनौती मिल रही है. इस चरण में कई सीटों पर कांग्रेस ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाकर भी बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

नगीना लोकसभा सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद डॉ यशवंत पर भरोसा जताते हुए उन्हें फिर से मैदान में उतरा है. यह सीट परिसीमन के बाद 2009 मवे अस्तित्व में आई थी. इस बार मुख्य मुकाबला बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुई ओमवती देवी, बीजेपी के डॉक्टर यशवंत सिंह और सपा-बसपा गठबंधन के कारण यहां से बसपा के टिकट पर गिरीश चंद्र के बीच है. पिछले चुनाव में बीजेपी के यशवंत सिंह को कुल 39 फीसदी वोट मिले थे. उन्हें चुनाव में 3,67,825 वोट यानी 39 फीसदी वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के यशवीर सिंह को 2,75,435 (29.2%) और बहुजन समाज पार्टी के गिरीश चंद्रा को 2,45,685 (26.1%) वोट मिले थे. इस लिहाज से इस सीट पर गठबंधन भारी नजर आ रहा है.

अमरोहा पर लोकसभा सीट इस बार त्रिकोणीय मुकाबला होगा. बीजेपी ने एक बार फिर अपने मौजूदा सांसद कंवर सिंह तंवर पर भरोसा जताया है. वहीं गठबंधन की तरफ से बसपा के टिकट पर जेडीएस छोड़कर आए कुंवर दानिश अली मैदान में हैं. कांग्रेस ने सचिन चौधरी को मैदान में खड़ा किया है. पिछले चुनाव में कंवर सिंह तंवर (बीजेपी) को 48.3 फीसदी, हुमैरा अख्तर (एसपी) को 33.8 फीसदी और फरहत हसन (बीएसपी) को 14.9 फीसदी मत हासिल हुए थे. इस बार बीजेपी के लिए मतों के बिखराव को रोकना बड़ी चुनौती है.

बुलंदशहर लोकसभा सीट से 2019 में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है. इस चुनावी समर में 13 उम्मीदवार मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी के निवर्तमान सांसद भोला सिंह, कांग्रेस के बंशी सिंह और बसपा के योगेश वर्मा के बीच है. पिछले चुनाव में भोला सिंह को 6 लाख से ज्यादा वोट मिले थे. इस बार भी बीजेपी का यह मजबूत किला गठबंधन को चुनौती देता दिख रहा है.

तालों की नगरी से मशहूर अलीगढ़ लोकसभा चुनाव के लिहाज से काफी अहम शहर है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की एक प्रमुख सीट होने के अलावा यहां की अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी चर्चा का केंद्र है. मौजूदा समय में ये सीट भारतीय जनता पार्टी के खाते में है. बीजेपी ने इस बार फिर यहां से सांसद सतीश कुमार गौतम को मैदान में उतारा है. वहीं एसपी-बीएसपी गठबंधन ने यहां जातीय गणित साधने की कोशिश में अजीत बालियान को मैदान में उतारा था, लेकिम कांग्रेस ने पूर्व सांसद विजेन्द्र सिंह को टिकट देकर जाट वोट बैंक का गणित बिगाड़ दिया है. इस सीट का फैसला काफी हद तक कल्याण सिंह और उनके परिवार के रुख पर निर्भर करता है क्योंकि यहां लोध वोटर भी निर्याणक संख्या में हैं.

पिछले करीब दो दशक से हाथरस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है. हाथरस सीट पर मुस्लिम-जाट का समीकरण हावी रहता है, यही कारण है कि मायावती की बहुजन समाज पार्टी भी इस सीट पर प्रबल दावेदार रहती है. हाथरस लोकसभा सीट आरक्षित सीटों में आती है. पिछले दो दशक से बीजेपी का इस सीट पर कब्ज़ा है. इस बार बीजेपी ने राजवीर सिंह को टिकट दिया है. सपा यहां गठबंधन के साथ मैदान में है. सपा की तरफ से रामजीलाल सुमन चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस ने त्रिलोकी राम दिवाकर को मैदान में उतारा है. लिहाजा बीजेपी को गठबंधन से कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है.

आगरा उत्तर प्रदेश में चर्चित लोकसभा सीटों में शामिल है. अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस संसदीय सीट पर लड़ाई रोचक होती जा रही है. बीजेपी ने इस बार आगरा के कद्दावर पार्टी नेता और SC-ST कमीशन के अध्यक्ष रमाशंकर कठेरिया को इटावा भेजकर राज्य सरकार में मंत्री एसपी सिंह बघेल को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने इस सीट से प्रीता हरित को मैदान में उतारा है. गठबंधन की ओर से इस सीट पर बीएसपी उम्मीदवार मनोज कुमार सोनी हैं. इस सीट पर भी बीजेपी और गठबंधन में कांटे की टक्कर है.

जाट बाहुल मथुरा सीट भी बीजेपी के लिए नाक का सवाल है. बीजेपी ने एक बार फिर मौजूदा सांसद हेमा मालिनी पर दांव खेला है. उनका मुकाबला गठबंधन की तरफ से रालोद प्रत्याशी कुंवर नरेंद्र सिंह मैदान में हैं. कांग्रेस ने इस सीट से महेश पाठक को टिकट दिया है. पिछले चुनाव में इस सीट से जयंत चौधरी को हार का सामना करना पड़ा थ. इस सीट पर भी मुख्य मुकाबला गठबंधन और बीजेपी के बीच ही है.

फतेहपुर सीकरी ने पिछले दो लोकसभा चुनावों में ग्लैमर और हाई प्रोफाइल उम्मीदवारों को नकार दिया है. ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार राज बब्बर के सामने बड़ी चुनौती है. 2009 में लोकसभा सीट बनने के बाद से ही फतेहपुर सीकरी चर्चा में रही है. 2009 में राज बब्बर यहां ग्लैमर लेकर आए थे. वहीं 2014 में अमर सिंह, लेकिन दोनों को हार का समना करना पड़ा. इस बार बीजेपी ने जहां अपने मौजूदा सांसद बाबू लाल का टिकट काटकर राजकुमार चाहर को मैदान में उतारा है. वहीं गठबंधन ने बाहुबली नेता गुड्डू पंडित पर दांव लगाया है. राज बब्बर कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से एक बार फिर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. यानी मुकाबला हाई वोल्टेज होने से साथ-साथ त्रिकोणीय दिख रहा है.

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