चुनावी काउंटडाउन के बीच बीजेपी में यूपी प्रभारी की रेस शुरू, भूपेंद्र यादव प्रबल दावेदार

वर्तमान यूपी प्रभारी ओम माथुर सीन से गायब नजर आ रहे हैं. माना जा रहा है कि सूबे की राजनीति में गठबंधन की आहट और यादव परिवार में दो फाड़ देखते हुए बीजेपी हाईकमान जल्द ही अपना फैसला सुना सकते हैं.

Kumari ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 10, 2018, 2:46 PM IST
चुनावी काउंटडाउन के बीच बीजेपी में यूपी प्रभारी की रेस शुरू, भूपेंद्र यादव प्रबल दावेदार
भूपेंद्र यादव (फाइल)
Kumari ranjana | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 10, 2018, 2:46 PM IST
बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में ये तय हो गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति मिशन 2019 की तकदीर लिखेगी. पिछले लोकसभा चुनाव में अमित शाह यूपी के प्रभारी थे. रिकार्डतोड़ जीत मिलने के बाद वह राष्ट्रीय अध्यक्ष बने. अब सबसे बड़ा सवाल इस समय ये है कि यूपी का लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कौन होगा प्रभारी?

दरअसल अमित शाह के यूपी के प्रभारी बनने से पहले सूबे में बीजेपी खस्ताहाल थी. शाह ने संगठन को मजबूत किया और देश को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा मिला. नतीजा सामने आया. सूबे में बीजेपी ने 71 सीटें जीतीं, वहीं दो सीटें उसके साथ जुड़ने वाली अपना दल ने भी जीतीं. इसके बाद 2017 में विधानसभा चुनाव से पहले ओम माथुर को यूपी का प्रभार दिया गया. ओममाथुर ने नेतृत्व में बीजेपी ने प्रचंड जीत भी दर्ज की. उसके बाद निकाय चुनाव आया और उसमें भी पार्टी को जीत हासिल हुई. लेकिन फूलपुर, गोरखपुर और कैराना उपचुनावों में मिली हार के बाद पार्टी के अंदर विरोधाभास के सुर सुनाई पड़ने लगे.

सूबे में बीजेपी लगातार 3 उपचुनाव हार चुकी है और ओममाथुर कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं. वे मेरठ में हुई प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में भी नहीं पहुंचे. कहा जाता है कि ओममाथुर ने खुद भी पार्टी आलाकमान के सामने यूपी के प्रभार को लेकर अपनी असमर्थता जता चुके हैं, जिसके बाद से लगातार उत्तरप्रदेश से दूरी बनाए हुए हैं. कहा तो ये भी जाता है कि विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद ओममाथुर की राय को किसी भी मंच पर अहमियत नहीं दी गई. उनको केंद्र में मंत्री बनाने की भी चर्चा रही, लेकिन उनके नाम पर मुहर नहीं लगी.

कारण चाहे जो भी हो, लेकिन ओम माथुर सीन से गायब नजर आ रहे हैं. अब ये माना जा रहा है कि सूबे की राजनीति में गठबंधन की आहट और यादव परिवार में दो फाड़ देखते हुए बीजेपी हाईकमान जल्द ही अपना फैसला सुना सकते हैं. सूबे में सबसे अधिक चर्चा राष्ट्रीय महामंत्री और राज्यसभा सदस्य भूपेंद्र यादव के नाम को लेकर है. सूत्रों की मानें तो ओबीसी वोटर्स को अपने पाले में लाने के लिए बीजेपी जल्द ही उनके नाम का ऐलान कर सकती है. मेरठ की प्रदेश कार्यसमिति में भी भूपेंद्र यादव काफी एक्टिव रहे, जबकि ओममाथुर कार्यसमिति में नहीं पहुंचे. इससे पहले अमित शाह के वाराणसी दौरे के समय भी भूपेंद्र यादव उनके साथ नजर आए.

ये भी माना जा रहा है कि कई और युवा चेहरों को सहप्रभारी के रूप में यूपी की राजनीति में सक्रिय किया जा सकता है. अक्सर बीजेपी के विधायक ये शिकायत करते नजर आते हैं कि सरकार में उनकी नहीं सुनी जा रही है. ऐसे में संघ की भी पसंद बन चुके भूपेंद्र यादव जहां वोटर्स को अपने पाले में लाने का कार्य करेंगे. वहीं सरकार और संगठन के बीच तालमेल भी बैठाएंगे. वैसे ओममाथुर की अनुपस्थिति के चलते बीजेपी कार्यकर्ता भी पेशोपेश में हैं और सबकी निगाहें पार्टी आलाकमान की तरफ लगी हैं.

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