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सपा-बसपा गठबंधन की 7 बड़ी बातें, जानिए क्या-क्या हैं शर्तें?

मायावती और अखिलेश यादव की फाइल फोटो

मायावती और अखिलेश यादव की फाइल फोटो

पिछले लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं और 31 सीटों पर नंबर दो रही थी, जबकि बहुजन समाज पार्टी 34 स ...अधिक पढ़ें

    समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के ऐलान की बस अब औपचारिकता ही बची है. सीटों के बंटवारों को लेकर भी स्थिति साफ हो गई है, लेकिन क्या ये दोनों पार्टियां बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी? लोकसभा सीट पर उस पार्टी का पहला हक होगा जो पिछले चुनाव में जीती थी या कि उसका जो नंबर दो पर रही थी. पिछले लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं और 31 सीटों पर पर नंबर दो रही थी. जबकि, बहुजन समाज पार्टी 34 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी. कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थीं और 6 सीटों पर नंबर 2 रही थी. राष्ट्रीय लोकदल और आम आदमी पार्टी 1-1 सीट पर नंबर 2 रहे थे लेकिन इस नियम में ढील भी दी जाएगी.

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    1.  जो समझौता होना है उसके अनुसार राष्ट्रीय लोक दल के लिए 3 सीटें, कांग्रेस के लिए 2 सीटें और सहयोगी दलों के लिए 5 और सीटें रिजर्व में रखी जाएंगी. फिलहाल सिर्फ 35-35 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया जाएगा. दोनों दल अभी आरएलडी से बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहते.

    2. संभावना है कि दोनों दल हर मंडल में कम से कम 2 सीट पर लड़ेंगे, ताकि किसी इलाके में एक ही पार्टी का वर्चस्व न हो और दूसरी पार्टी का सफाया नहीं हो. इसके लिए लोकसभा चुनाव में नंबर 2 रहने के नियम में की छूट दी जाएगी.

    3. प्रत्याशी चुनने में दोनों दल एक दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखेंगे. हाल-फिलहाल में पार्टी बदलने वाले या फिर मायावती और अखिलेश यादव के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने वालों का टिकट कट सकता है.

    4. सुहलदेव समाज पार्टी, अपना दल (कृष्णा पटेल), कौमी एकता दल जैसे छोटे दलों से बातचीत जारी रहने की संभावना है.

    5. वाराणसी सीट पर मोदी के खिलाफ किसी तीसरे दल के मजबूत उम्मीदवार का समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है.

    6. समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी की ओर से पार्टी सुप्रीमो मायावती की अनुमति के बिना मीडिया में कुछ भी बोलने पर सख्ती होगी. मुलायम सिंह यादव को गठबंधन के फैसलों से दूर रखा जा सकता है.

    7. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बीएसपी सुप्रीमो मायावाती 50 से ज्यादा चुनावी सभाएं साथ कर सकते हैं. पार्टी के और कोई नेता बिना हाईकमान की अनुमति के मंच साझा नहीं करेंगे.

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    Tags: Akhilesh yadav, BJP, Congress, Lok Sabha Election 2019, Mayawati

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