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कैसे मिले रोजगार? योगी सरकार के डेढ़ साल में ही विवादों में घिरीं कई भर्तियां

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फाइल फोटो

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फाइल फोटो

उत्तर प्रदेश में सरकारी भर्तियों का हाल ये है कि साल भर के अंदर कहीं पेपर आउट हुए और सॉल्वर गैंग पकड़े गए, किसी भर्ती में पेपर बांटने में लापरवाही सामने आई तो कहीं परीक्षा परिणाम पर भी धांधली उजागर हुई.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं कि यूपी सरकार प्रदेश में लाखों नौजवानों को नौकरी देगी. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू कुछ और कहानी बयां कर रहा है. दरअसल पिछले डेढ़ साल पर ही नजर डालें तो प्रदेश में निकली तमाम सरकारी नौ​करियों की भर्तियां विवादों के केंद्र में रहीं. कहीं पेपर आउट हुए और सॉल्वर गैंग पकड़े गए, किसी भर्ती में पेपर बांटने में लापरवाही सामने आई तो कहीं परीक्षा परिणाम पर भी धांधली उजागर हुई.

नतीजा ये हुआ कि लाखों नौजवान, जो एक अदद सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे थे, अब अदालतों के चक्कर काट रहे हैं या सरकारी जांचों पर टकटकी लगाए हैं. राजधानी लखनऊ की ही बात करें तो सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए तमाम नौजवान रोज प्रदर्शन कर रहे हैं. दरोगा भर्ती से लेकर सहायक शिक्षक भर्ती, सभी पर सवाल खड़े हुए.

एक नजर कुछ ऐसी ही विवादों में घिरी भर्तियों पर-

दरोगा भर्ती आॅनलाइन का पेपर आउट

उत्तर प्रदेश में दरोगा भर्ती 2016 की ऑनलाइन परीक्षा में नकल माफियाओं ने सेंध लगा दी. परीक्षा के पेपर लीक होने के बाद 3307 पदों के लिए हो रही दरोगा भर्ती परीक्षा 25 जुलाई 2017 को पूरी तरह रद्द कर दी गई. मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी गई. इससे पहले पेपर लीक होने के बाद पहले 25 और 26 जुलाई को होने वाली ऑनलाइन परीक्षा स्थगित की गई थी. बताया गया कि दरोगा भर्ती का 21 जुलाई को संपन्न ऑनलाइन परीक्षा का पेपर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह फैसला लिया गया.

पेपर लीक होने की सूचना कुछ अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री और डीजीपी को ट्विटर पर दी थी. जिसके बाद इसकी जानकारी यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड तक पहुंची और परीक्षा स्थगित करने का फैसला लिया गया था.

UPPCL की परीक्षा का पेपर आउट, पूरी भर्ती रद्द

2018 के मार्च में यूपी पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की जूनियर इंजीनियर परीक्षा में हुई धांधली के पकड़े जाने के बाद होने वाली सभी परिक्षाओं को रद्द कर दिया गया. मामले में एसटीएफ ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया था. इसके बाद अवर अभियंता, सहायक समीक्षा अधिकारी, कार्यालय सहायक, अपर निजी सचिव पद की परीक्षाएं रद्द की गईं. इस मामले में विद्युत सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव को निलंबित कर दिया गया. परीक्षा कराने वाली एजेंसी एपटेक को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया. मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए परीक्षा संचालन के सभी पैनलों को भी भंग कर दिया गया.

दरअसल 11 फ़रवरी को आयोजित हुई परीक्षा में धांधली की लिखित शिकायत 26 हजार अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की थी. जिसके बाद मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच एसटीएफ को सौंपी थी.

प्रतिष्ठित पीसीएस मुख्य परीक्षा भी विवादों में घिरी

यही नहीं इसी साल जून में उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग की पीसीएस मेन्स 2017 की परीक्षा निरस्त कर दी गई. दरअसल, इलाहाबाद में जीआईसी सेंटर पर दूसरी पॉली का प्रश्न पत्र खुलने से परीक्षा निरस्त करनी पड़ी. दूसरी पाली में हिंदी निबंध की परीक्षा थी और पहली पाली में सामान्य हिन्दी की परीक्षा थी. लेकिन गलती से हिंदी निबंध का प्रश्न पत्र खुल गया, जिसके बाद अभ्यर्थियों ने परीक्षा का बहिष्कार कर दिया.

अभ्यर्थियों के हंगामे के बाद लोक सेवा आयोग ने परीक्षा नियंत्रक को भेजा. परीक्षा नियंत्रक द्वारा पहली पाली में होने वाली सामान्य हिंदी की परीक्षा की जगह दूसरी पाली में होने वाली हिंदी निबंध की परीक्षा का प्रश्न पत्र खोले जाने की पुष्टि की. जिसके बाद लोक सेवा आयोग के सचिव जगदीश ने आज की दोनों पालियों की परीक्षा को निरस्त कर दिया.

एसएससी सीजीएल का पेपर आउट!

17 से 22 फरवरी के बीच हुए एसएससी सीजीएल टियर 2 परीक्षा का प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की खबर से हड़कंप मच गया.

...और सिपाही भर्ती की परीक्षा हुई रद्द

उत्तर प्रदेश पुलिस सिपाही भर्ती बोर्ड 2018 की दूसरी पाली में हुई परीक्षा रद्द कर दी गई. ये परीक्षा यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के माध्यम से पुलिस और पीएसी के 41520 पदों के लिए कराई गई थी. परीक्षा रद्द होने की वजह केंद्र व्यस्थापकों की बड़ी लापरवाही मानी. दरअसल, परीक्षा कराने वाली संस्था ने दो केंद्रों पर गलत प्रश्नपत्र बंटवा दिए, जिसके चलते दूसरी पाली की दोनों परीक्षाएं निरस्त करानी पड़ी.

एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती भी आई विवादों में

उत्तर प्रदेश के 39 जिलों में एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा 2018 का आयोजन जुलाई में किया गया. करीब 1760 केंद्रों पर होने वाली परीक्षा में 7.63 लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे. परीक्षा शुरू होते ही एसटीएफ ने प्रदेश भर से कुल 18 लोगों को एग्जाम सॉल्वर और फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया. कुल 46 लोगों को हिरासत में लिया गया.

टीचर भर्ती में रिजल्ट पर उठा विवाद

उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग की सहायक अध्यापक के 68500 पदों की भर्ती परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही. कभी कट ऑफ को लेकर तो कभी चयनित अभ्यर्थियों की सूची को लेकर हर कदम पर विवाद होते रहे. सबसे बड़ा विवाद तब शुरू हुआ, जब ये सामने आया की इस परीक्षा के रिजल्ट में ही खेल हुआ है. कहीं अनुपस्थित अभ्यर्थियों को 86 अंक देकर पास किया गया तो कहीं 2 नंबर वाले को 91 अंक दिए गए. इसके उलट 122 नंबर पाने वाले अभ्यर्थियों को 22 नंबर देकर चयनित सूची से बाहर किया गया. मामला अब कोर्ट में है.

नलकूप आॅपरेटर की परीक्षा का पेपर आउट

अब सितंबर में उत्तर प्रदेश में नलकूप चालक के 3210 पदों के लिए रविवार को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी गई. उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने यह कदम पेपर लीक होने के बाद उठाया. एसटीएफ ने इस मामले में 11 लोगों को मेरठ से गिरफ्तार किया. इन लोगों पर पेपर को लीक करने का आरोप है. पेपर आउट होने का सूचना मिलते ही आयोग में हड़कंप मच गया. आनन—फानन परीक्षा को निरस्त करने का फैसला किया. आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि परीक्षा की दूसरी तारीख बाद में घोषित की जाएगी.

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