मॉब लिंचिंग के खिलाफ मुस्लिमों को हथियार खरीदने की ट्रेनिंग देने की तैयारी

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा जैसे बुद्धजीवी, लोगों को हथियार खरीदने की नसीहत दे रहे हैं. इसके लिए बाकायदा लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 22, 2019, 12:36 PM IST
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Updated: July 22, 2019, 12:36 PM IST
शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद और सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा जैसे बुद्धजीवी, लोगों को हथियार खरीदने की नसीहत दे रहे हैं. इसके लिए बाकायदा लखनऊ में 26 जुलाई को एक कैंप भी लगाया जाएगा, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय को हथियार खरीदने के तरीके के बारे में जानकारी दी जाएगी.

मॉब लिंचिंग करने वालों का कोई ईमान धर्म नहीं होता है. मौके का फायदा उठाकर कुछ लोग भीड़ को मरने और मारने के लिए उकसा देते हैं. इनके खिलाफ कानून भी है और कानून अपना काम भी करता है. लेकिन सवाल ये है कि इस भीड़ के खिलाफ अगर हथियार उठाने की वकालत की जाएगी, तो क्या हम हिंसक समाज की ओर कदम नहीं बढ़ा रहे हैं?

हथियार कैसे खरीदे, इसके लिए दी जाएगी ट्रेनिंग
ये अपने आपमें बड़ा सवाल है, ये सवाल इस लिए उठ खड़ा हुआ है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के वकील महमूद पराचा ने लखनऊ पहुंचकर शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद से मुलाकात की. उनसे मिलकर महमूद पराचा ने कहा कि 26 तारीख को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए कैंप लगाया जाएगा. इस कैंप में हथियार के लिए कैसे अप्लाई किया जाए, कैंप में इसकी ट्रेनिंग भी दी जाएगी.

कैंप में हथियार चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी
वहीं शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि 26 तारीख को जो कैंप लगेगा उसमें सिर्फ और सिर्फ इस बात की जानकारी दी जाएगी कि सरकार से असलहा कैसे लें और इसके लिए कैसे अप्लाई करें. इस कैंप में कोई हथियार की ट्रेनिंग नहीं दी जाएगी और न ही किसी प्रकार के हथियार के बारे में बताया जाएगा.

वहीं जाने माने वकील और ऑल इंदिया पर्सनल लॉ बोर्ड के मेंमबर जफरयाब जिलानी कहतें हैं कि हथियार रखने के लिए लोगों को जानकारी देना कोई गलत बात नहीं हैं. वो कहतें हैं कि अपनी जान बचाने के लिए आप किसी भी हद तक जा सकते हैं.
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ऐसे लोगों से इस बात की उम्मीद नहीं थी- मंत्री मोहसिन रजा
वहीं भाजपा सरकार में मंत्री मोहसिन रजा कहतें हैं कि ऐसे पढ़े लिखे लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती. वो लोगों को शिक्षित करने की बात कहते तो समाज सुधर जाता लेकिन वो इस बात का जवाब दें कि इस मॉब लिंचिंग की मॉब लॉंचिग किसने की थी. वो तो कांग्रेस की सरकार में शुरू हुई थी.

भीड़ की कोई शक्ल नहीं होती और इसी बात का फायदा हमेशा मॉब लिंचिंग करने वाली भीड़ उठाती है. अब इस उन्मादी भीड़ के खिलाफ हथियार लेकर चलने को उकसाने की क्या ये कोशिश नहीं है. क्या डर इस बात का नहीं है? अगर कानून हर हाथ का खिलौना हो जाएगा तो फिर पुलिस, अदालत और इंसाफ जैसे शब्द के मतलब क्या रह जाएंगे?

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First published: July 22, 2019, 11:31 AM IST
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