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मायावती को शिवपाल की खरीखोटी, गेस्ट हाउस कांड पर साधी चुप्पी
Lucknow News in Hindi

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: January 15, 2019, 11:51 AM IST
मायावती को शिवपाल की खरीखोटी, गेस्ट हाउस कांड पर साधी चुप्पी
शिवपाल यादव (File Photo)

मुलायम सिंह यादव की महागठबंधन की घोषणा से दूरी और सपा-बसपा से टिकट कटने के बाद बागी होने वाले नेताओं के भरोसे शिवपाल महागठबंधन को नुकसान पहुंचाने की काबिलियत रखते हैं.

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  • Last Updated: January 15, 2019, 11:51 AM IST
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समाजवादी पार्टी (सपा) से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी-लोहिया (प्रसपा-लो) बनाने वाले शिवपाल यादव को 2019 लोकसभा चुनावों के लिए चाबी चुनाव चिह्न मिला है. यूपी में सपा-बसपा के महागठबंधन के बाद शिवपाल की भूमिका और अहम हो जाती है. पहला मुलायम सिंह यादव की महागठबंधन की घोषणा से दूरी और चुप्पी, दूसरा सपा-बसपा से टिकट कटने के बाद बागी होने वाले नेताओं के भरोसे शिवपाल महागठबंधन को नुकसान पहुंचाने की काबिलियत रखते हैं. News18Hindi से विशेष बातचीत में शिवपाल यादव ने नेताजी, कांग्रेस से गठबंधन और महागठबंधन पर खुलकर बात की...

सवाल: नेताजी (मुलायम सिंह यादव) किसका चुनाव प्रचार करेंगे आपका या महागठबंधन का? उन्हें महागठबंधन की घोषणा से दूर क्यों रखा गया?
शिवपाल: सपा ने उस दल से गठबंधन किया है, जिसने हमेशा समाजवादी पार्टी खून से सींचने वाले नेता जी और जनेश्वर मिश्र जैसे नेताओं का अपमान किया था. यह मौका परस्ती का गठबंधन हैं. समाजवादी कार्यकर्ता और समाज का गरीब वंचित तबका इस गठबंधन को कभी स्वीकार नहीं करेगा. बाकी वक़्त आपको बता देगा.

सवाल: मायावती ने खुलकर आप पर बीजेपी से साठगांठ का आरोप लगाया है? क्या सच में कोई डील हुई है?



शिवपाल: मुझे खरीद पाना किसी के बस की बात नहीं. यह सभी को पता है कि कौन लोग आर्थिक भ्रष्टाचार में लिप्त है और कौन सी पार्टी में टिकट बेचे जाते हैं. सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ पिछले चार दशकों से मेरा जो संघर्ष है वो जनता के सामने है. मायावती इससे पहले भी पिछड़ों और दलितों का वोट लेकर बीजेपी की गोद में बैठ चुकी हैं. क्या गारंटी है कि मायावती चुनाव के बाद बीजेपी से हाथ नहीं मिलाएंगी. देश और प्रदेश की जनता जानती है कि बसपा प्रमुख मायावती ने बीजेपी के साथ मिलकर कितनी बार सरकारें बनाईं. यह वही मायावती हैं जिनकी पूर्ण बहुमत की सरकार में अल्पसंख्यक वर्ग के नौजवानों को उठा-उठाकर फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए.



सवाल: अखिलेश-मायावती के गठबंधन को कैसे देखते हैं, क्या ये यूपी में बीजेपी को हरा पाएगा?
शिवपाल: यह स्वार्थ सिद्धि के लिए बना ठगबंधन है. जिस तरह कांग्रेस और प्रसपा को इस गठबंधन से बाहर किया गया, उससे इस गठबंधन की मंशा पर भी संदेह पैदा होता है. सवाल यह भी है इसके पीछे की मंशा कहीं वंचितों, पिछड़ों, दलितों और मुसलमानों के मतों के विभाजन की तो नहीं है. और फिर चुनाव बाद मायावती का स्टैंड क्या होगा, बसपा सुप्रीमो का पुराना इतिहास तो कुछ और ही बयान करता है. अपने निर्माण के सीमित अवधि में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी ने अपने व्यापक जनाधार और लोकप्रियता के बल पर यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि प्रसपा के आभाव में यूपी के राजनीतिक हलके में सांप्रदायिक शक्तियों और सत्ता के विरुद्ध किसी भी मंच, गठबंधन या संघर्ष की कल्पना नहीं की जा सकती. जहां तक इस गठबंधन पर प्रतिक्रिया का प्रश्न है उस पर अभी से नफा नुकसान पर कोई प्रतिक्रिया देना थोड़ी जल्दबाजी होगी. जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव करीब आएगा, आप देखेंगे कि यूपी की राजनीति में नए समीकरण बनेंगे.

सवाल: आप के लिए कौन बड़ा प्रतिद्वंद्वी है? महागठबंधन या बीजेपी?
शिवपाल: मेरी ताउम्र लड़ाई सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ रही है. जहां तक महागठबंधन का प्रश्न है, प्रसपा के बिना ऐसा कोई गठबंधन यूपी में बन ही नहीं सकता. सामाजिक न्याय में यकीन रखने वाला हर शख्स इस गठबंधन की नियत को संदेह से देख रहा है.

सवाल: क्या कांग्रेस से गठबंधन को लेकर कोई बातचीत हुई है? क्या कांग्रेस की तरफ से कोई ऑफर मिला है?
शिवपाल: कांग्रेस इस देश की एक बड़ी सेक्युलर ताकत है, उसका एक समृद्ध इतिहास है. हमारे सेक्युलर मोर्चा में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी एवं बहुजन मुक्ति मोर्चा के साथ उत्तर प्रदेश की 40 से अधिक छोटी पार्टिया हैं, जिसके सहयोग के बिना बीजेपी को हराना असंभव होगा और यह मोर्चा अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों के हितो की रक्षा करने के लिए बनाया गया है. हमारा नारा है- जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी. ऐसे में किसी भी सेक्युलर ताकत का अगर निमंत्रण मिलता है तो उसका स्वागत है.

सवाल: महागठबंधन के ऐलान की प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने कई बार 'गेस्ट हाउस कांड' का ज़िक्र किया, जिसका आरोप आप पर लगता रहा है? क्या आपके बाहर रहने की शर्त पर ही मायावती मानी हैं?
शिवपाल: मायावती कैसे मानीं यह तो यह सपा के शीर्ष नेतृत्व से पूछिये. जहां तक 'गेस्ट हाउस कांड' का सवाल है, क्योंकि मामला सबज्यूडिस है इसलिए इसपर कुछ कहना उचित नहीं होगा.

सवाल: आपको चुनाव चिह्न 'चाबी' मिल गई, क्या ये यूपी में सत्ता की 'मास्टर की' में बदल पाएगी?
जवाब: इसके लिए भारतीय चुनाव आयोग को आभार. यह चाबी उत्तर प्रदेश की जनआकांक्षा, उम्मीद और विकास की कुंजी बनें. मेरी यही उम्मीद है.

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First published: January 15, 2019, 11:19 AM IST
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